गढ़वा में इलाज के अभाव में महिला की मौत, ग्रामीणों ने उठाए सवाल

गढ़वा जिले के मेराल प्रखंड के खेरवार टोला से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गढ़वा ज़िले के मेराल ब्लॉक की पूर्वी पंचायत के खेरवार टोला से एक दिल दहला देने वाली कहानी सामने आई है, जो प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाती है। बुनियादी सुविधाओं और इलाज की भारी कमी के कारण, रविवार दोपहर 63 वर्षीय पार्वती मुसहर की मौत हो गई।

इलाज के अभाव में महिला की मौत

पार्वती के परिवार का कहना है कि वह लंबे समय से बीमार थीं, लेकिन बहुत ज़्यादा गरीबी के कारण उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पाया। सही देखभाल न मिलने से उनकी हालत बिगड़ती गई और आखिरकार उनके जर्जर घर में ही उनकी मौत हो गई। इस घटना से पूरे टोले में मातम छाया हुआ है और लोग प्रशासन की बेरुखी से बहुत नाराज़ हैं।

महादलित परिवार की सदस्य पार्वती मुसहर की मौत के बाद सामने आई गरीबी और बेबसी की तस्वीर ने सभी को झकझोर कर रख दिया। परिवार की आर्थिक हालत इतनी खराब थी कि उनके पास पारंपरिक अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं थे, जिसमें लकड़ी और कफ़न जैसी चीज़ें शामिल होती हैं।

⚠️ घटना की मुख्य बातें

  • स्थान: खेरवार टोला, मेराल प्रखंड, गढ़वा
  • मृतका: 63 वर्षीय पार्वती मुसहर
  • कारण: इलाज और बुनियादी सुविधाओं की कमी
  • स्थिति: अत्यधिक गरीबी में जीवनयापन
  • प्रभाव: पूरे क्षेत्र में शोक और नाराजगी

ग्रामीणों और समाजसेवियों ने की मदद

इस दुखद स्थिति के बारे में पता चलते ही स्थानीय ग्रामीणों, समाजसेवियों और पंचायत प्रशासन ने सहानुभूति दिखाई। पंचायत सचिव राधा कुमारी के साथ-साथ समाजसेवी देवव्रत मेहता, देव कुमार राम, विनेश मेहता, दिनेश महतो और विनोद चौधरी शोक-संतप्त परिवार को आर्थिक मदद और ज़रूरी सामान देने के लिए तुरंत मौके पर पहुँचे। उनकी मिली-जुली कोशिशों, त्वरित कार्रवाई और चंदे की वजह से ही पार्वती मुसहर का अंतिम संस्कार ठीक से हो पाया।

इस दुखद घटना ने खेरवार टोला में मुसहर समुदाय के बेहद खराब रहन-सहन की स्थिति को उजागर किया है। कई सालों से यहाँ रहने के बावजूद, स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में अभी भी मुश्किल होती है।

सरकारी योजनाओं से वंचित होने का आरोप

नेता चुनाव से पहले बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद उनकी भलाई का ध्यान रखने वाला कोई नहीं होता। स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के डिजिटल दौर में भी, खेरवार टोला के लोग आदिम युग जैसी अभावों भरी ज़िंदगी जीने को मजबूर हैं।

📌 ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

  • प्रधानमंत्री आवास योजना: सभी पात्र परिवारों को लाभ
  • राशन कार्ड: गरीब परिवारों को नए कार्ड जारी हों
  • बिजली सुविधा: खंभे लगाकर आपूर्ति बहाल की जाए
  • पेयजल: हैंडपंप की व्यवस्था की जाए
  • स्वास्थ्य सेवाएं: नियमित हेल्थ कैंप लगाए जाएं

टोले के ज़्यादातर परिवार बहुत गरीब हैं; उनके पास न तो खाद्य सुरक्षा के लिए राशन कार्ड हैं, न पक्के घर, न बिजली कनेक्शन और न ही पीने के साफ़ पानी की पर्याप्त सुविधाएँ। एक बुजुर्ग माँ की दर्दनाक मौत के बाद स्थानीय लोग सिस्टम से बहुत नाराज़ हैं। प्रभावित लोगों ने ज़िला प्रशासन, गढ़वा के डिप्टी कमिश्नर और स्थानीय अधिकारियों से मुसहर समुदाय की इस भयानक स्थिति और तकलीफ़ पर गंभीरता से ध्यान देने की अपील की है।

प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग

उन्होंने ज़िला प्रशासन से गुहार लगाई है कि पूरे टोले को तुरंत *प्रधानमंत्री आवास योजना* का लाभ दिया जाए, सभी गरीब परिवारों को नए राशन कार्ड जारी किए जाएं, बिजली सप्लाई बहाल करने के लिए खंभे लगाए जाएं, साफ़ पीने के पानी के लिए हैंडपंप लगवाए जाएं और इस दूर-दराज़ इलाके में नियमित रूप से सरकारी हेल्थ कैंप लगाए जाएं, ताकि किसी और गरीब, बेबस परिवार को कभी ऐसी भयानक स्थिति का सामना न करना पड़े।

Disclaimer: यह समाचार स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। प्रशासनिक जांच या आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार तथ्यों में बदलाव संभव है।

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I’m Gourav Kumar Singh, a graduate by education and a blogger by passion. Since starting my blogging journey in 2020, I have worked in digital marketing and content creation. Read more about me.

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