Gen Z Startups: भारत के युवा संस्थापक बदल रहे Startup की सोच

भारत में स्टार्टअप की नई पीढ़ी अब पुराने कारोबारी तरीकों से अलग सोच रही है। खासकर Gen Z के युवा संस्थापक तकनीक के सहारे ऐसे कारोबार बनाने पर ध्यान दे रहे हैं, जिन्हें सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के दूसरे देशों में भी इस्तेमाल किया जा सके। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्मार्टफोन और इंटरनेट की आसान पहुंच ने इन युवाओं के लिए कारोबार शुरू करना पहले के मुकाबले आसान बना दिया है।

Gen Z के युवा संस्थापक बदल रहे हैं स्टार्टअप की सोच

21 साल के नमन पुष्प, जो एयरोस्पेस स्टार्टअप Airbound के संस्थापक हैं, इसी नई सोच का उदाहरण हैं। उनका कारोबार ऐसी ड्रोन तकनीक तैयार कर रहा है, जिसे बिना बड़े ढांचे के सामान की अंतिम दूरी तक डिलीवरी के लिए इस्तेमाल किया जा सके। उनका कहना है कि उनका लक्ष्य किसी विदेशी कंपनी का भारतीय रूप तैयार करना नहीं है, बल्कि ऐसी समस्या का समाधान करना है जो पूरी दुनिया के सामने है।

 

Gen Z Startups में AI और Deep Tech के जरिए Global Business पर जोर
Gen Z Startups में युवा संस्थापक Global Business और Deep Tech पर ध्यान दे रहे हैं।

 

भारत के स्टार्टअप क्षेत्र में यह बदलाव धीरे-धीरे दिखाई दे रहा है। पहले की पीढ़ी के कई संस्थापकों का लक्ष्य विदेशी कंपनियों की तर्ज पर भारतीय कारोबार बनाना था। इसी दौर में Flipkart, Snapdeal और Ola जैसी कंपनियां सामने आईं। इसके बाद दूसरी पीढ़ी ने भारत की जरूरतों को ध्यान में रखकर नए कारोबार बनाए। Meesho, Zepto और Paytm जैसे कारोबार इसी बदलाव का हिस्सा रहे।

अब वैश्विक बाजार पर नजर

अब युवा संस्थापक इससे आगे बढ़कर ऐसी तकनीक तैयार करना चाहते हैं जिसकी मांग दुनिया भर में हो। Digantara, Airbound और AI पर आधारित कई नई कंपनियां ऐसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं जिनमें गहरी तकनीकी जानकारी, लंबे समय तक काम और बड़े निवेश की जरूरत होती है। इन संस्थापकों के लिए सिर्फ तेजी से कंपनी का बड़ा मूल्य हासिल करना ही सफलता नहीं है।

भारत की बड़ी युवा आबादी भी इस बदलाव को बढ़ावा दे रही है। Boston Consulting Group के अनुसार भारत में Gen Z की संख्या करीब 37.7 करोड़ है। जैसे-जैसे इस पीढ़ी के युवा नौकरी और कारोबार की दुनिया में आगे बढ़ रहे हैं, उनकी सोच देश के नए कारोबार और तकनीकी विकास को प्रभावित कर रही है।

🚀 Gen Z स्टार्टअप की नई सोच

  • वैश्विक लक्ष्य: शुरुआत से ही दुनिया के बाजार को ध्यान में रखना
  • तकनीक: AI, इंटरनेट और स्मार्टफोन का इस्तेमाल
  • कम लागत: कम पूंजी में उत्पाद तैयार करने पर जोर
  • गहरी तकनीक: अंतरिक्ष, रक्षा और AI जैसे क्षेत्रों पर ध्यान
  • लंबी सोच: तेजी से बढ़ने के बजाय टिकाऊ कारोबार बनाना

AI ने कारोबार शुरू करना बनाया आसान

आज के युवा संस्थापकों के लिए कारोबार शुरू करने का तरीका भी बदल गया है। AI और इंटरनेट की मदद से कम समय और कम खर्च में उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। पहले कई कंपनियां बड़े निवेश की मदद से ग्राहक बढ़ाने और कारोबार फैलाने पर ध्यान देती थीं। अब कई युवा पहले उत्पाद तैयार करने, उसकी गुणवत्ता सुधारने और कम पूंजी में कारोबार चलाने पर ध्यान दे रहे हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में अपने प्रोफाइल पर संस्थापक लिखने वाले लोगों की संख्या में एक साल में 104 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं, बड़ी संख्या में संस्थापकों का मानना है कि AI ने कारोबार शुरू करना आसान बनाया है। इसकी वजह कम खर्च, तकनीकी जानकारी तक आसान पहुंच और नए लोगों से जुड़ने के बेहतर अवसर हैं।

निवेश से ज्यादा टिकाऊ कारोबार पर जोर

नई पीढ़ी के संस्थापक अब केवल तेजी से बढ़ने के बजाय लंबे समय तक टिकने वाले कारोबार पर जोर दे रहे हैं। निवेशकों की सोच में भी बदलाव आया है। पहले कंपनी की सफलता को ग्राहकों की संख्या, निवेश जुटाने और अरबों डॉलर के मूल्यांकन से जोड़ा जाता था। अब कारोबार की कमाई, खर्च पर नियंत्रण और लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Digantara के सह-संस्थापक अनिरुद्ध शर्मा का कहना है कि भारत में स्टार्टअप की शुरुआत के समय अधिकतर कंपनियां आम लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं पर काम करती थीं, क्योंकि वहां निवेश और बाजार दोनों उपलब्ध थे। उस समय गहरी तकनीक पर आधारित कंपनियां बनाने के लिए मजबूत शोध व्यवस्था भी कम थी। अब स्थिति बदल रही है और अंतरिक्ष, रक्षा तथा अन्य तकनीकी क्षेत्रों में नए कारोबार सामने आ रहे हैं।

💡 नए स्टार्टअप किन क्षेत्रों पर कर रहे हैं फोकस

  • अंतरिक्ष: उपग्रहों और अंतरिक्ष मलबे पर नजर रखने वाली तकनीक
  • रक्षा: नई तकनीक और उन्नत समाधान
  • AI: कम लागत में तकनीकी सेवाएं और उत्पाद
  • ड्रोन: सामान की अंतिम दूरी तक डिलीवरी के समाधान
  • सेमीकंडक्टर: लंबे समय की तकनीकी क्षमता विकसित करना

गहरी तकनीक वाले कारोबारों पर बढ़ रहा भरोसा

Digantara अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों, मलबे और दूसरी वस्तुओं पर नजर रखने की तकनीक विकसित कर रही है। कंपनी को हाल में 5 करोड़ डॉलर का निवेश मिला है। शर्मा का मानना है कि आज के दौर में केवल ज्यादा पैसा जुटाना जरूरी नहीं है। उनका लक्ष्य कम से कम पूंजी लेकर अधिक से अधिक तकनीक तैयार करना है। उनके अनुसार AI के दौर में समय का महत्व सिर्फ पैसे से ज्यादा बढ़ गया है।

AI आधारित कंपनी smallest.ai के सह-संस्थापक सुदर्शन कामथ के अनुसार AI के बढ़ते इस्तेमाल ने कंपनियों के खर्च का तरीका भी बदल दिया है। पहले बड़ी संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति पर खर्च किया जाता था, लेकिन अब कंपनियां कंप्यूटिंग क्षमता, तकनीकी साधनों और AI सेवाओं पर अधिक पैसा खर्च कर रही हैं।

लंबे समय की सोच के साथ आगे बढ़ रहे संस्थापक

नई पीढ़ी के संस्थापक तेजी से बढ़ने और जल्द बड़ी कंपनी बनने के बजाय लंबे समय तक चलने वाली संस्थाएं बनाना चाहते हैं। अंतरिक्ष, रक्षा और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में उत्पाद तैयार करने में कई साल लग सकते हैं। इसलिए इन क्षेत्रों में काम करने वाले संस्थापकों को लंबे समय की सोच के साथ आगे बढ़ना पड़ता है।

कुल मिलाकर, Gen Z के नए संस्थापकों की सोच कुछ मुख्य बातों पर आधारित है। वे शुरुआत से ही वैश्विक बाजार को ध्यान में रख रहे हैं, कंपनी के मूल्यांकन से ज्यादा तकनीक को महत्व दे रहे हैं, निवेश का सोच-समझकर इस्तेमाल कर रहे हैं और ऐसे लोगों को साथ जोड़ना चाहते हैं जो कारोबार को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी लें। उनका लक्ष्य सिर्फ अरबों डॉलर की कंपनी बनना नहीं, बल्कि भारत से ऐसी मजबूत और लंबे समय तक चलने वाली कंपनियां तैयार करना है जो दुनिया की बड़ी कंपनियों के साथ मुकाबला कर सकें।

Disclaimer: यह जानकारी समाचार और सामान्य जानकारी के लिए है। इसे निवेश या कारोबारी सलाह नहीं माना जाना चाहिए।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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