केंद्र सरकार ने गिफ्ट सिटी (GIFT City) में काम करने वाली कंपनियों के लिए विदेशी झंडे वाले जहाजों की लीजिंग और संचालन से जुड़े नियमों में बड़ी राहत दी है। नए फैसले का उद्देश्य भारत को वैश्विक समुद्री वित्त, शिप लीजिंग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रमुख केंद्र बनाना है।
केंद्र सरकार ने गुजरात के गांधीनगर स्थित गिफ्ट सिटी (GIFT City) में काम करने वाली कंपनियों को बड़ी राहत दी है। अब इन कंपनियों को विदेशी झंडे वाले जहाज (फॉरेन फ्लैग वेसल) किराये पर लेने के लिए समुद्री प्रशासन महानिदेशालय (DGMA) से अलग लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। सरकार ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है。
गिफ्ट सिटी की कंपनियों को विदेशी जहाज लीजिंग में बड़ी राहत
सरकार ने यह छूट तटीय शिपिंग अधिनियम, 2025 की धारा 37 के तहत दी है। नए नियम के अनुसार, गिफ्ट सिटी के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) में स्थापित कंपनियां विदेशी जहाजों को चार्टर पर लेकर बिना DGMA लाइसेंस के उनका उपयोग कर सकेंगी।
पहले भारत के समुद्री क्षेत्र में तटीय व्यापार के लिए विदेशी झंडे वाले जहाजों को संचालन से पहले DGMA से लाइसेंस लेना अनिवार्य था। इस प्रक्रिया में समय लगता था, जिससे कई कंपनियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।
सरकार के फैसले की प्रमुख बातें
- स्थान: गिफ्ट सिटी (GIFT City), गांधीनगर
- राहत: विदेशी झंडे वाले जहाजों के लिए DGMA लाइसेंस की जरूरत नहीं
- लागू प्रावधान: तटीय शिपिंग अधिनियम, 2025 की धारा 37
- लाभार्थी: IFSC में स्थापित कंपनियां
- सुविधा: विदेशी जहाजों को चार्टर पर लेकर संचालन
- उद्देश्य: शिप लीजिंग और समुद्री वित्त को बढ़ावा
नए नियम से कंपनियों को क्या फायदा होगा
तटीय शिपिंग अधिनियम, 2025 लागू होने के बाद कई उद्योग संगठनों और कारोबारियों ने इसकी कुछ शर्तों पर चिंता जताई थी। उनका कहना था कि इन नियमों की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमोडिटी ट्रेडिंग करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी जहाज किराये पर लेना मुश्किल हो गया है, जिससे उनका कारोबार प्रभावित हो सकता है।
सरकार का मानना है कि नए फैसले से गिफ्ट सिटी में काम कर रही कंपनियों को अधिक सुविधा मिलेगी और भारत को वैश्विक समुद्री वित्त और जहाज लीजिंग का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में मदद मिलेगी। इससे जहाज लीजिंग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इस फैसले का संभावित असर
- लाइसेंस प्रक्रिया: आसान और तेज
- कंपनियों को लाभ: समय और लागत में कमी
- व्यापार: अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी ट्रेडिंग को समर्थन
- शिप लीजिंग: कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद
- वैश्विक लक्ष्य: भारत को समुद्री वित्त केंद्र बनाना
- फोकस: गिफ्ट सिटी को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय हब के रूप में मजबूत करना
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। भविष्य में सरकारी अधिसूचना या नियमों में बदलाव होने पर जानकारी बदल सकती है।