देश में तेजी से बढ़ रहे Gig Workers को भविष्य में सामाजिक सुरक्षा का लाभ दिलाने की दिशा में केंद्र सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने राज्यसभा में बताया कि सरकार नए Labour Codes के जरिए ऐसे कामगारों के हितों की रक्षा करेगी। उनका कहना है कि बदलते रोजगार के दौर में बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक नौकरी के बजाय अलग-अलग प्लेटफॉर्म के माध्यम से काम कर रहे हैं, इसलिए उनके लिए भी सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।
Gig Workers के लिए Labour Codes के तहत सामाजिक सुरक्षा
👷 Gig Workers के लिए सरकार की बड़ी तैयारी
- मुख्य योजना: Labour Codes के तहत सामाजिक सुरक्षा
- अनुमानित Gig Workers: करीब 80 लाख
- e-Shram पंजीकरण: लगभग 10 लाख
- उद्देश्य: अधिक से अधिक कामगारों को जोड़ना
- फायदा: सरकारी योजनाओं तक आसान पहुंच
- फोकस: कानूनी सुरक्षा और सामाजिक लाभ
सरकार के अनुसार नीति आयोग के अनुमान के मुताबिक देश में करीब 80 लाख गिग वर्कर हैं। इनमें से लगभग 10 लाख लोगों का पंजीकरण e-Shram पोर्टल पर हो चुका है। सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक कामगारों को इस व्यवस्था से जोड़ना है ताकि उन्हें भविष्य में मिलने वाली योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके।
मंत्री ने बताया कि नए कानूनों में गिग वर्कर को अलग श्रेणी के रूप में मान्यता दी गई है। इसके तहत ऐसे लोगों की पहचान तय की गई है जो किसी पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध के बिना अपनी सेवाएं देकर आय अर्जित करते हैं। इससे उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए कानूनी आधार भी मजबूत होगा।
नए कानून में क्या-क्या प्रावधान हैं
सरकार का कहना है कि इन नए प्रावधानों में कामगारों के लिए कई महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं। इनमें नियुक्ति पत्र देने की व्यवस्था, नौकरी समाप्त करने से जुड़े नियम, दोबारा रोजगार में प्राथमिकता, तय अवधि की नौकरी से जुड़े प्रावधान, न्यूनतम वेतन, समय पर भुगतान और सुरक्षित कार्यस्थल जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा Social Security से जुड़े लाभ भी उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है।
मंत्री ने यह भी बताया कि देश में विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से बड़ी आबादी पहले से सामाजिक सुरक्षा के दायरे में है। सरकार चाहती है कि गिग वर्कर भी इन सुविधाओं से जुड़ें ताकि उन्हें भविष्य में आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिल सके।
📋 कामगारों को मिलने वाले प्रमुख लाभ
- नियुक्ति पत्र: रोजगार की स्पष्ट जानकारी
- न्यूनतम वेतन: तय नियमों के अनुसार भुगतान
- Social Security: सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ
- सुरक्षित कार्यस्थल: सुरक्षा संबंधी प्रावधान
- VDA: महंगाई के अनुसार संशोधन
- लागू करने की जिम्मेदारी: केंद्र और राज्य सरकारें
न्यूनतम वेतन और VDA पर सरकार का रुख
वेतन से जुड़े नियमों पर सरकार ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में न्यूनतम वेतन तय करने, उसकी समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर उसमें बदलाव करने का अधिकार है। नया वेतन कानून यह सुनिश्चित करता है कि तय किया गया न्यूनतम वेतन निर्धारित आधार वेतन से कम न हो।
महंगाई के प्रभाव को देखते हुए सरकार हर छह महीने में VDA में संशोधन करती है। यह बदलाव औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर किया जाता है ताकि बढ़ती महंगाई का असर कम किया जा सके और न्यूनतम वेतन पाने वाले कर्मचारियों को कुछ राहत मिल सके।
नियम लागू होने के बाद क्या होगा
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि श्रम कानूनों को लागू करने की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य दोनों की है। केंद्र अपने नियम जारी कर चुका है, जबकि कई राज्य अपने-अपने नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं। इनके पूरी तरह लागू होने के बाद गिग वर्कर समेत विभिन्न वर्गों के कर्मचारियों को नए प्रावधानों का लाभ मिलने की उम्मीद है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सरकारी बयान और उपलब्ध आधिकारिक विवरण पर आधारित है। अंतिम लाभ संबंधित नियम लागू होने पर निर्भर करेंगे।

