सोने की छड़ और सिक्के खरीदने वाले निवेशकों ने तीसरी तिमाही में पहले के मुकाबले कम खरीदारी की। World Gold Council की 3 नवंबर 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार जुलाई से सितंबर के बीच दुनिया भर में बार और सिक्कों की मांग 268 टन रही। यह पिछले साल की समान अवधि से 19 प्रतिशत कम है। रिपोर्ट के मुताबिक कई व्यक्तिगत निवेशक सोने की कीमत की अगली दिशा स्पष्ट होने का इंतजार करते रहे। हालांकि सभी देशों में रुझान एक जैसा नहीं था। चीन में मांग सालाना आधार पर बढ़ी और उसने वैश्विक गिरावट के बीच अलग तस्वीर दिखाई।
छड़ों और सिक्कों की मांग क्यों घटी?
जब सोने का भाव बहुत ऊंचा हो जाता है, तो निवेशक खरीदने से पहले अधिक सावधानी बरत सकते हैं। कुछ लोग सोचते हैं कि कीमत आगे और बढ़ेगी, जबकि दूसरे लोग गिरावट का इंतजार करते हैं। इस तरह अनिश्चितता के कारण खरीदारी टल सकती है। तीसरी तिमाही में औसत अंतरराष्ट्रीय भाव 4,262 डॉलर प्रति औंस रहा, जो पिछले साल की समान अवधि से 23 प्रतिशत अधिक था। ऊंचे भाव ने नए खरीदारों के लिए प्रवेश महंगा कर दिया।
रिपोर्ट के अनुसार सोने की छड़ों की मांग 203 टन के आसपास रही, जो पिछले साल से 19 प्रतिशत कम है। आधिकारिक सिक्कों की मांग में कुछ मजबूती रही और यह 35 टन तक पहुंची, जबकि पदक और नकली सिक्कों जैसी अन्य श्रेणी में गिरावट दर्ज हुई। कुल आंकड़े में इन सभी रूपों को जोड़कर देखा जाता है। इसलिए निवेशकों को समझना चाहिए कि बार और सिक्के की मांग अलग-अलग उत्पादों में बदल सकती है।
भारत में भी सोने के सिक्के और छड़ें कुछ लोग बचत और उपहार के रूप में खरीदते हैं। त्योहार, शादी और धार्मिक अवसरों पर सिक्कों की मांग बढ़ सकती है। लेकिन निवेश के उद्देश्य से खरीदने वाले व्यक्ति को केवल सोने के भाव पर ध्यान नहीं देना चाहिए। सिक्के का प्रीमियम, शुद्धता, प्रमाणपत्र, विक्रेता की विश्वसनीयता और वापस बेचने की शर्तें भी महत्वपूर्ण हैं।
बार और सिक्कों की मांग
- तीसरी तिमाही की कुल मांग: 268 टन
- सालाना गिरावट: 19 प्रतिशत
- सोने की छड़ों की मांग: करीब 203 टन
- आधिकारिक सिक्कों की मांग: करीब 35 टन
- चीन में मांग: सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़ी
चीन में खरीद बढ़ने की वजह क्यों महत्वपूर्ण है?
रिपोर्ट में चीन को एक ऐसा बड़ा बाजार बताया गया जहां तीसरी तिमाही में बार और सिक्कों की मांग पिछले साल से 7 प्रतिशत अधिक रही। यह वैश्विक गिरावट से अलग रुझान था। अलग-अलग देशों में सोने की खरीद पर स्थानीय मुद्रा, बचत की आदत, आर्थिक भरोसा, निवेश के दूसरे विकल्प और सरकारी नीतियों का असर पड़ता है। इसलिए चीन की खरीद बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि भारत या दूसरे देशों में भी समान बदलाव होगा।
भारत दुनिया के प्रमुख सोना बाजारों में शामिल है और बार तथा सिक्कों की खरीद में भी इसकी अहम हिस्सेदारी है। रिपोर्ट के अनुसार तीसरी तिमाही में भारत वैश्विक बार और सिक्का मांग का करीब 21 प्रतिशत हिस्सा रखता रहा, हालांकि देश में सालाना मांग कमजोर रही। इससे पता चलता है कि भारत में निवेशकों की रुचि बनी हुई है, लेकिन ऊंची कीमत और आयात शुल्क जैसे कारण खरीद को प्रभावित कर सकते हैं।
निवेशक के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि वह सोना क्यों खरीद रहा है। यदि उद्देश्य उपहार देना है तो डिजाइन और अवसर प्राथमिकता हो सकते हैं। यदि उद्देश्य बचत है तो खरीद और बिक्री के बीच का अंतर, भंडारण और प्रमाणपत्र की अहमियत बढ़ जाती है। यदि उद्देश्य अल्पकालिक मुनाफा है तो कीमतों के उतार-चढ़ाव से नुकसान का जोखिम भी समझना चाहिए। सोने की कीमत किसी भी दिशा में जा सकती है।
सिक्का या छड़ खरीदते समय क्या जांचें?
विक्रेता की पहचान और प्रतिष्ठा जांचें। उत्पाद की शुद्धता, वजन और प्रमाणपत्र स्पष्ट होना चाहिए। सीलबंद पैक हो तो उसकी स्थिति देखें और बिल में उत्पाद का पूरा विवरण दर्ज कराएं। सिक्के या छड़ पर कोई निशान या पैकिंग खराब हो तो विक्रेता से उसकी वापसी और दोबारा बिक्री की शर्त पूछें। बाजार में अलग-अलग ब्रांड और आकार उपलब्ध होते हैं, इसलिए केवल कम प्रीमियम देखकर निर्णय न लें।
भौतिक सोना घर पर रखने से सुरक्षा और बीमा का सवाल भी आता है। बैंक लॉकर या सुरक्षित अलमारी जैसे विकल्पों की लागत और सुविधा की तुलना करें। सिक्के को बार-बार खोलने या छूने से उसकी सतह पर निशान आ सकते हैं। इसलिए उसे साफ और सूखी जगह पर रखना बेहतर है। खरीदने के बाद बिल और प्रमाणपत्र को अलग सुरक्षित रखें, ताकि भविष्य में बेचते समय विवरण उपलब्ध हो।
एक और बात ध्यान रखने योग्य है कि सोने के सिक्के पर छपी कीमत या दुकानदार का बिक्री भाव ही भविष्य में मिलने वाला मूल्य तय नहीं करता। जब आप बेचेंगे तो खरीदार अपनी जांच और बाजार की दर के अनुसार मूल्य देगा। कुछ विक्रेता केवल अपने बेचे उत्पाद को वापस खरीदते हैं या अलग शर्तें रखते हैं। इसलिए खरीद के समय ही वापसी नीति पूछना समझदारी है।
सिक्का खरीदने की जांच सूची
- शुद्धता और वजन लिखित रूप में लें।
- प्रमाणपत्र और सीलबंद पैक देखें।
- विक्रेता की वापसी नीति पूछें।
- भंडारण और सुरक्षा की व्यवस्था करें।
आधिकारिक रिपोर्ट यहां पढ़ें: World Gold Council के आंकड़े। सिक्कों पर लिखे छोटे निशान और विवरण देखने के लिए सिक्कों की जांच वाला आवर्धक शीशा Amazon पर देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. तीसरी तिमाही में बार और सिक्कों की मांग कितनी रही?
World Gold Council के अनुसार जुलाई से सितंबर 2026 में वैश्विक बार और सिक्कों की मांग 268 टन रही। यह पिछले साल की समान तिमाही से 19 प्रतिशत कम थी, क्योंकि कई निवेशक कीमत की दिशा को लेकर सतर्क रहे।
2. क्या भारत बार और सिक्कों का बड़ा बाजार है?
हां, रिपोर्ट के अनुसार भारत तीसरी तिमाही में वैश्विक बार और सिक्कों की मांग का लगभग 21 प्रतिशत हिस्सा रखता था। हालांकि ऊंचे भाव और आयात शुल्क ने खरीद को प्रभावित किया।
3. चीन में सोने के सिक्कों की मांग कैसी रही?
चीन में तीसरी तिमाही के दौरान बार और सिक्कों की मांग पिछले साल की समान अवधि से सात प्रतिशत बढ़ी। यह वैश्विक बाजार की गिरावट से अलग रुझान था और देश के स्थानीय हालात को दिखाता है।
4. सोने का सिक्का खरीदते समय कौन-से कागज लें?
ग्राहक को पक्का बिल, वजन और शुद्धता का विवरण तथा उपलब्ध प्रमाणपत्र लेना चाहिए। सीलबंद पैक की स्थिति और विक्रेता की वापसी नीति भी पहले समझें, ताकि बाद में बेचने में परेशानी न हो।
5. क्या सोने के सिक्के में निवेश से निश्चित लाभ होता है?
नहीं, सोने का भाव ऊपर या नीचे हो सकता है। खरीद और बिक्री के बीच का अंतर, प्रीमियम, भंडारण और सुरक्षा लागत भी रिटर्न को प्रभावित करते हैं। इसलिए इसे निश्चित मुनाफे का साधन न मानें।
निष्कर्ष: तीसरी तिमाही में बार और सिक्कों की खरीद कमजोर रही, लेकिन भारत और चीन जैसे बड़े बाजारों की भूमिका बनी हुई है। खरीदारी से पहले शुद्धता, बिल, प्रीमियम और वापसी नीति समझना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रिपोर्ट पर आधारित है। सोने में निवेश जोखिम के अधीन है। खरीदने से पहले विक्रेता और उत्पाद की जानकारी जांचें।
