वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी फेड की ब्याज दर नीति के बीच सोने की चाल एक बार फिर निवेशकों के लिए अहम संकेत दे रही है। शुक्रवार के शुरुआती एशियाई कारोबार में गोल्ड में आई हल्की तेजी ने बाजार का ध्यान पश्चिम एशिया के हालात, महंगाई के जोखिम और सुरक्षित निवेश की मांग पर केंद्रित कर दिया है।
सोने की कीमतों में शुक्रवार को शुरुआती एशियाई कारोबार के दौरान हल्की तेजी देखने को मिली और गोल्ड का भाव फिर 4,100 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंच गया। स्पॉट गोल्ड करीब 4,120 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई है जब निवेशक अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर नजर बनाए हुए हैं। पश्चिम एशिया में हालात फिर बिगड़ने की आशंका ने सोने की सुरक्षित निवेश वाली मांग को सहारा दिया है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सोना 4,100 डॉलर के ऊपर, सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी
रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि वह अब भी ईरान के साथ हुए समझौते के ढांचे को पूरी तरह खत्म मानने के पक्ष में नहीं है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इससे पहले कहा था कि ईरान युद्ध खत्म करने के लिए बना फ्रेमवर्क अब “खत्म” हो चुका है। यह बयान ऐसे समय आया जब तेहरान ने होरमुज जलडमरूमध्य में जहाजों और पड़ोसी देशों पर हमले किए। इसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। ट्रंप ने चेतावनी भी दी कि अगर ईरान ने फिर से जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाया तो जवाबी कार्रवाई और ज्यादा सख्त हो सकती है। दूसरी ओर, गुरुवार को ईरान ने बहरीन, कुवैत और कतर में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि जॉर्डन ने ईरान की ओर से दागी गई कई मिसाइलों को रास्ते में ही रोकने का दावा किया।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव सिर्फ भू-राजनीतिक चिंता नहीं बढ़ा रहा, बल्कि इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। अगर पश्चिम एशिया में संघर्ष और बढ़ता है तो तेल की सप्लाई प्रभावित होने का डर रहेगा, जिससे क्रूड ऑयल महंगा हो सकता है। तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है और यही वजह है कि निवेशक अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली चाल को लेकर भी सतर्क हैं। अगर महंगाई बढ़ती है तो फेड ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है, और यह सोने की तेजी पर कुछ हद तक दबाव डाल सकता है।
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से तेल, महंगाई और गोल्ड पर असर की आशंका
गोल्ड में तेजी के पीछे 5 बड़े कारण
- स्पॉट गोल्ड: करीब 4,120 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार
- मुख्य वजह: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
- सुरक्षित निवेश की मांग: पश्चिम एशिया में अनिश्चितता से गोल्ड को सहारा
- तेल का जोखिम: होरमुज जलडमरूमध्य और सप्लाई बाधा की आशंका से क्रूड पर नजर
- महंगाई चिंता: तेल महंगा होने पर फेड की ब्याज दर नीति और सख्त हो सकती है
फेड की जून बैठक के मिनट्स ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। मिनट्स से पता चला कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक के भीतर ब्याज दरों को लेकर एकराय नहीं है। कुछ अधिकारी मानते हैं कि इस साल के अंत तक फेड फंड रेट मौजूदा स्तर पर या उससे थोड़ा नीचे हो सकती है, जबकि कई अन्य सदस्यों का मानना है कि ब्याज दरें मौजूदा लक्ष्य सीमा से ऊपर रहनी चाहिए। यानी फेड के भीतर अभी भी इस बात को लेकर स्पष्ट सहमति नहीं है कि महंगाई और आर्थिक हालात को देखते हुए आगे दरों में कटौती की जाए या सख्ती बरकरार रखी जाए।
ऐसे माहौल में सोने को फिर से सुरक्षित निवेश के रूप में समर्थन मिल रहा है। आम तौर पर जब दुनिया में युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई या मुद्रा बाजार में अस्थिरता बढ़ती है, तब निवेशक सोने की तरफ रुख करते हैं। हालांकि, अगर अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है या ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो सोने की तेजी सीमित हो सकती है। फिलहाल बाजार की नजर पश्चिम एशिया के हालात, कच्चे तेल की चाल और फेड के अगले संकेतों पर टिकी हुई है, क्योंकि यही तीन बड़े फैक्टर आने वाले दिनों में सोने की दिशा तय कर सकते हैं।
फेड की ब्याज दर नीति और डॉलर की चाल भी तय करेगी गोल्ड की अगली दिशा
आने वाले दिनों में गोल्ड पर नजर रखने वाले 3 बड़े फैक्टर
- पश्चिम एशिया के हालात: अमेरिका-ईरान तनाव और होरमुज जलडमरूमध्य से जुड़ी खबरें
- कच्चे तेल की चाल: सप्लाई जोखिम बढ़ने पर महंगाई और बाजार भावना पर असर
- फेड के संकेत: ब्याज दरों में कटौती, सख्ती या डॉलर की मजबूती से गोल्ड की दिशा तय हो सकती है
Disclaimer: सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर, ब्याज दरों और भू-राजनीतिक घटनाओं से प्रभावित होती हैं। निवेश से पहले ताजा जानकारी जरूर जांचें।

