Gold Supply 2026: खदानों से सोने का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

सोने की कीमतें ऊंचे स्तर पर रहने के बावजूद 2026 की तीसरी तिमाही में पुराने सोने की रीसाइक्लिंग में गिरावट दर्ज की गई, जबकि खदानों से उत्पादन बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की 3 नवंबर 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई से सितंबर के दौरान खदानों से सोने का उत्पादन लगभग 1,071 टन रहा। यह पिछले वर्ष की समान अवधि से तीन प्रतिशत अधिक है और तीसरी तिमाही के लिए अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इसके उलट रीसाइक्लिंग से मिलने वाला सोना आठ प्रतिशत घटा।

खदानों से उत्पादन 1,071 टन

रिपोर्ट के अनुसार तीसरी तिमाही में खदानों से सोने का उत्पादन 1,070.9 टन रहा। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह लगभग 1,040.7 टन था। उत्पादन में बढ़ोतरी से वैश्विक आपूर्ति को सहारा मिला। हालांकि कुल सोने की आपूर्ति सालाना आधार पर लगभग एक प्रतिशत घटकर 1,368.6 टन रही। इसका कारण यह है कि खदानों के उत्पादन में वृद्धि के बावजूद रीसाइक्लिंग और अन्य आपूर्ति घटक कमजोर रहे।

खनन उत्पादन का आंकड़ा केवल सोने की उपलब्धता बताता है, यह नहीं बताता कि बाजार में हर समय पर्याप्त सोना बिक रहा है। खदानों से निकले सोने को परिष्कृत करने, बाजार तक पहुंचाने और आभूषण या निवेश उत्पाद बनाने में समय लगता है। इसलिए उत्पादन और बाजार में तुरंत उपलब्ध सोने के बीच अंतर हो सकता है।

रीसाइक्लिंग में आठ प्रतिशत गिरावट

रिपोर्ट में पुराने आभूषणों और अन्य स्रोतों से सोना वापस बाजार में लाने की प्रक्रिया को रीसाइक्लिंग कहा गया है। तीसरी तिमाही में रीसाइक्लिंग से लगभग 314.5 टन सोना मिला, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से आठ प्रतिशत कम है। ऊंचे भाव के बावजूद लोगों ने पुराने गहने बेचने या गलवाने में उतनी तेजी नहीं दिखाई जितनी सामान्य तौर पर उम्मीद की जा सकती है।

कई परिवार सोने को लंबे समय की बचत मानते हैं। कीमत बढ़ने पर भी वे अपने गहने तुरंत नहीं बेचते, क्योंकि उनका भावनात्मक और पारिवारिक महत्व होता है। कुछ लोगों को लगता है कि भविष्य में भाव और बढ़ सकते हैं। इसके अलावा पुराने आभूषणों को बेचने पर मिलने वाली वास्तविक रकम शुद्धता, कटौती और दुकान की शर्तों पर निर्भर करती है।

ऊंची कीमत के बावजूद पुराना सोना क्यों नहीं आया?

सोने की कीमत ऊंची होने से पुराने गहने बेचने की इच्छा बढ़ सकती है, लेकिन यह अकेला कारण नहीं है। परिवारों की जरूरत, शादी या त्योहार के लिए गहने रखने की इच्छा और भविष्य की कीमतों की उम्मीद भी निर्णय को प्रभावित करती है। कई लोग पुराने आभूषण बेचने के बजाय उन्हें नए डिजाइन में बदलवाना पसंद करते हैं। ऐसे मामलों में सोना बाजार में पूरी तरह नया माल बनकर नहीं आता, बल्कि उसी परिवार के पास रहता है।

रीसाइक्लिंग में गिरावट का अर्थ यह भी हो सकता है कि ऊंचे भाव पर बाजार को पुराना सोना कम मिल रहा है। यदि मांग मजबूत हो और आपूर्ति सीमित रहे, तो कीमतों पर असर पड़ सकता है। लेकिन कीमतों की दिशा केवल आपूर्ति से तय नहीं होती। निवेशकों की खरीद, केंद्रीय बैंकों की मांग और वैश्विक आर्थिक हालात भी महत्वपूर्ण हैं।

भारत के खरीदारों और ज्वेलर्स पर संभावित असर

भारत में आभूषण उद्योग के लिए सोने की उपलब्धता आयात, घरेलू पुनर्चक्रण और स्थानीय बाजार की मांग पर निर्भर करती है। खनन उत्पादन का रिकॉर्ड स्तर वैश्विक आपूर्ति को कुछ सहारा देता है, लेकिन इससे भारतीय दुकानों में कीमत तुरंत कम होना जरूरी नहीं है। आयात लागत, रुपये की विनिमय दर, शुल्क और स्थानीय मांग का प्रभाव भी बना रहता है।

ज्वेलर्स पुराने गहने खरीदकर उन्हें परिष्कृत करने और दोबारा उपयोग करने की व्यवस्था रखते हैं। ग्राहक जब पुराने गहने बदलते हैं, तो उन्हें शुद्धता जांच, वजन और कटौती की जानकारी लेनी चाहिए। अलग-अलग दुकानों की शर्तें अलग हो सकती हैं। लिखित हिसाब लेना और पुराने सोने का वजन अपने सामने करवाना बेहतर रहता है।

गहनों की सफाई के लिए मुलायम कपड़ा उपयोगी हो सकता है, लेकिन हर आभूषण पर रासायनिक क्लीनर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मोती, रत्न और नाजुक डिजाइन वाले गहनों की सफाई विशेषज्ञ से कराएं। यहां आभूषण साफ करने वाला मुलायम कपड़ा देखें।

आपूर्ति के आंकड़ों से क्या संकेत मिलता है?

तीसरी तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि सोने की आपूर्ति में खनन की भूमिका मजबूत हुई, लेकिन रीसाइक्लिंग कमजोर रही। यदि आगे भी खदानों से उत्पादन बढ़ता है और पुराने सोने की वापसी धीमी रहती है, तो बाजार में आपूर्ति का संतुलन बदल सकता है। आने वाली तिमाहियों में उत्पादन, रीसाइक्लिंग और मांग के आंकड़ों पर नजर रखना उपयोगी होगा।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने रिपोर्ट में बताया कि कुल आपूर्ति सालाना आधार पर एक प्रतिशत कम रही। इसका मतलब यह है कि खनन उत्पादन में रिकॉर्ड होने के बावजूद बाकी स्रोतों की कमजोरी ने कुल आपूर्ति की वृद्धि को सीमित रखा। निवेशक और कारोबारियों को केवल खदान उत्पादन की एक संख्या से निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।

मूल आंकड़ों के लिए वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की पूरी तिमाही रिपोर्ट देखी जा सकती है।

सोने की आपूर्ति के प्रमुख आंकड़े

  • खदान उत्पादन: 1,070.9 टन
  • खदान उत्पादन में बढ़ोतरी: 3 प्रतिशत
  • रीसाइक्लिंग: 314.5 टन
  • रीसाइक्लिंग में गिरावट: 8 प्रतिशत
  • कुल आपूर्ति: 1,368.6 टन

पुराने गहने बदलते समय सावधानी

  • वजन अपनी आंखों के सामने करवाएं
  • शुद्धता जांच की प्रक्रिया समझें
  • कटौती और पिघलाने का खर्च पूछें
  • लिखित मूल्यांकन और रसीद लें
  • अलग-अलग दुकानों से प्रस्ताव की तुलना करें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. तीसरी तिमाही 2026 में खदानों से कितना सोना निकला?

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान खदानों से लगभग 1,070.9 टन सोना निकला। यह पिछले वर्ष की समान अवधि से तीन प्रतिशत अधिक और तीसरी तिमाही का रिकॉर्ड स्तर था।

2. सोने की रीसाइक्लिंग में कितनी गिरावट आई?

तीसरी तिमाही में रीसाइक्लिंग से लगभग 314.5 टन सोना मिला। यह पिछले वर्ष की समान अवधि से आठ प्रतिशत कम था। ऊंची कीमतों के बावजूद पुराने गहनों की बिक्री और पुनर्चक्रण कमजोर रहा।

3. सोने की कीमत बढ़ने पर लोग पुराने गहने क्यों नहीं बेचते?

कई परिवार सोने को बचत और पारिवारिक विरासत मानते हैं। वे भविष्य में और ऊंचे भाव की उम्मीद कर सकते हैं या गहनों को बेचने के बजाय नए डिजाइन में बदलवाना पसंद करते हैं।

4. क्या खनन उत्पादन बढ़ने से भारत में सोना सस्ता होगा?

केवल खनन उत्पादन बढ़ने से भारत में कीमत कम होना तय नहीं है। अंतरराष्ट्रीय भाव, डॉलर, रुपये, आयात शुल्क, स्थानीय मांग और अन्य आपूर्ति स्रोत भी घरेलू कीमत तय करने में भूमिका निभाते हैं।

5. पुराने गहने बदलते समय क्या जांचना चाहिए?

पुराने गहनों का वजन, शुद्धता, कटौती, पिघलाने का खर्च और नई खरीद की मेकिंग लागत स्पष्ट रूप से पूछें। मूल्यांकन अपने सामने करवाएं और सभी गणनाओं के साथ लिखित रसीद जरूर लें।

निष्कर्ष

तीसरी तिमाही में खदानों का उत्पादन रिकॉर्ड पर पहुंचा, लेकिन पुराने सोने की रीसाइक्लिंग कमजोर रही। इससे कुल आपूर्ति में बढ़ोतरी सीमित रही। आने वाले महीनों में उत्पादन और पुनर्चक्रण के नए आंकड़े बाजार की दिशा समझने में मदद करेंगे।

अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। सोना बेचने या खरीदने से पहले प्रमाणित मूल्यांकन और लिखित शर्तों की पुष्टि करें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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