Google Cloud ने अपने एक ऐसे आंतरिक सुरक्षा ढांचे की जानकारी साझा की है, जिसका इस्तेमाल बड़े सॉफ्टवेयर कोड में खामियां खोजने के लिए किया जा रहा है।
इस व्यवस्था में कई AI एजेंट के साथ मानव विशेषज्ञों की जांच भी शामिल है। कंपनी के अनुसार, पिछले करीब 10 महीनों में इसका इस्तेमाल सक्रिय कोड समीक्षा, सुरक्षा परीक्षण, रेड टीम गतिविधियों और चोरी हुए सोर्स कोड से जुड़ी जांच में किया गया है।
Google Cloud का AI आधारित सुरक्षा ढांचा कैसे काम करता है
Google Cloud के मुताबिक, इसका सबसे उल्लेखनीय परिणाम उस मामले में सामने आया, जिसमें किसी कंपनी के कोड भंडार चोरी हो गए थे। जांच के दौरान इस व्यवस्था ने केवल दो दिनों में 100 से अधिक गंभीर और वास्तविक सुरक्षा खामियों की पहचान की।
कंपनी का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर मैनुअल जांच की तुलना में यह प्रक्रिया काफी तेज रही। इसका इस्तेमाल ऐसे सॉफ्टवेयर वातावरण में भी किया गया है, जिनमें करोड़ों पंक्तियों का कोड मौजूद था।

इस प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा टीमों को वेब एक्सटेंशन और खुले स्रोत वाले कई प्रोजेक्ट में भी खामियां मिलीं। इनमें से कुछ मामलों को आधिकारिक सुरक्षा पहचान संख्या दी गई है, जबकि कई अन्य मामलों की जानकारी अभी सार्वजनिक करने की प्रक्रिया में है। कंपनी का कहना है कि यह व्यवस्था केवल सामान्य अनुमान के आधार पर काम नहीं करती, बल्कि अलग-अलग चरणों में कोड की गहराई से जांच करती है।
AI एजेंट पहले सॉफ्टवेयर का सुरक्षा मॉडल तैयार करते हैं
सबसे पहले सॉफ्टवेयर की संभावित सुरक्षा कमजोरियों का आकलन किया जाता है। एक प्रारंभिक AI एजेंट सॉफ्टवेयर का क्षेत्र समझता है, उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा करता है और उन हिस्सों को अलग करता है जिन्हें जांच में शामिल नहीं करना है।
इसके बाद अलग-अलग विशेषज्ञ एजेंट प्रमाणीकरण, अनुमति व्यवस्था और अनुरोधों के रास्ते जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों की जांच करते हैं। इन सभी जानकारियों को मिलाकर एक प्रारंभिक सुरक्षा मॉडल तैयार किया जाता है, जिसे आगे बढ़ने से पहले मानव विशेषज्ञ जांचता है।
इसके बाद दायरे में आने वाली प्रत्येक फाइल की जांच की जाती है। इसमें उन स्थानों को खोजा जाता है जहां बाहरी जानकारी सॉफ्टवेयर में प्रवेश करती है। साथ ही यह भी देखा जाता है कि उस जानकारी के साथ आगे कौन सा कोड काम करता है और क्या उसके रास्ते में सुरक्षा जांच मौजूद है। इससे किसी एक हिस्से को अलग से देखने के बजाय पूरे कोड के संदर्भ को समझने में मदद मिलती है।
🔐 AI सुरक्षा जांच की प्रक्रिया
- पहला चरण: सॉफ्टवेयर और संभावित जोखिमों का आकलन
- दूसरा चरण: AI एजेंट द्वारा महत्वपूर्ण हिस्सों की पहचान
- तीसरा चरण: बाहरी जानकारी और डेटा के प्रवाह की जांच
- चौथा चरण: संभावित सुरक्षा खामियों की पहचान
- अंतिम चरण: मानव विशेषज्ञ द्वारा समस्या की पुष्टि
कोड और डेटा के प्रवाह की गहरी जांच
गहरी जांच के दौरान नियंत्रण और डेटा के प्रवाह को अलग-अलग देखा जाता है। एक तरफ यह जांच की जाती है कि कहीं किसी उपयोगकर्ता को ऐसी अनुमति तो नहीं मिल रही जो उसे नहीं मिलनी चाहिए।
दूसरी तरफ बाहरी इनपुट का पीछा करके देखा जाता है कि वह किसी खतरनाक कार्य तक तो नहीं पहुंच रहा। इस तरह अनुमति से जुड़ी गलती, कोड में हानिकारक निर्देश पहुंचने और अन्य गंभीर सुरक्षा समस्याओं का पता लगाने की कोशिश की जाती है।
AI द्वारा बताई गई संभावित खामियों को कई जांच चरणों से गुजारा जाता है। इसके बाद यह तय किया जाता है कि समस्या वास्तव में मौजूद है, गलत अनुमान है या जांच के योग्य नहीं है।
सही पाई गई खामियों को जोखिम के आधार पर अलग किया जाता है और एक ही समस्या की दोबारा रिपोर्टिंग से बचाया जाता है। अंत में मानव विशेषज्ञ खुद उस समस्या को दोहराकर देखते हैं और यह जांचते हैं कि उसके आधार पर वास्तविक हमला संभव है या नहीं।
मानव विशेषज्ञों की भूमिका बनी रहेगी महत्वपूर्ण
Google Cloud के अनुसार, मानव विशेषज्ञों की भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण है। इससे गलत चेतावनियों को हटाने और AI द्वारा लगाए गए गलत अनुमान को पकड़ने में मदद मिलती है।
कंपनी ने यह भी बताया कि उसके सुरक्षा विशेषज्ञों ने अलग-अलग प्रोग्रामिंग भाषाओं, ढांचों और सुरक्षा कमजोरियों के लिए नियम तैयार किए हैं। इन नियमों का इस्तेमाल जांच को अधिक सटीक बनाने के लिए किया जाता है।
कंपनी का मानना है कि हमलावरों द्वारा AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच ऐसी तकनीक रक्षात्मक सुरक्षा के लिए उपयोगी हो सकती है। जब किसी संगठन का निजी कोड बाहर निकल जाता है, तब हमलावर बहुत तेजी से उसकी कमजोरियां तलाश सकते हैं। ऐसे समय में सुरक्षा टीमों के लिए कम समय में बड़े कोड आधार को समझना चुनौतीपूर्ण होता है।
🤖 AI और मानव विशेषज्ञों का सहयोग
- AI एजेंट: बड़े कोड आधार का तेजी से विश्लेषण
- सुरक्षा मॉडल: संभावित जोखिम वाले हिस्सों की पहचान
- स्वचालित जांच: डेटा और नियंत्रण के प्रवाह का विश्लेषण
- मानव विशेषज्ञ: संभावित खामियों की पुष्टि
- मुख्य लाभ: गलत चेतावनियों को कम करना और जांच को तेज करना
बड़े सॉफ्टवेयर में AI आधारित जांच की जरूरत
Google Cloud का कहना है कि केवल मैनुअल कोड समीक्षा भी पर्याप्त नहीं है, क्योंकि आधुनिक सॉफ्टवेयर बहुत बड़ा और जटिल हो चुका है। सामान्य सुरक्षा जांच उपकरण भी कई बार सॉफ्टवेयर के व्यावसायिक नियमों, किसी कार्य के वास्तविक रास्ते और अलग-अलग उपयोगकर्ता अधिकारों के संदर्भ को पूरी तरह नहीं समझ पाते। इसी वजह से कंपनी ने AI आधारित एजेंट और मानव विशेषज्ञों को एक ही प्रक्रिया में जोड़ने का तरीका अपनाया है।
इस व्यवस्था को चलाने के लिए Google की एजेंट विकास तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी ने इसे लगातार चलने वाली सेवा के बजाय एक विशेष समय पर इस्तेमाल किए जाने वाले ढांचे के रूप में बताया है। इसकी क्षमता जांचने के लिए कंपनी ने कृत्रिम रूप से तैयार किए गए कोड आधार भी बनाए, ताकि पहले से इंटरनेट पर उपलब्ध सुरक्षा खामियों वाले आंकड़ों पर निर्भरता कम हो।
सुरक्षा परीक्षण में गंभीर कमजोरी की पहचान
एक हालिया सुरक्षा परीक्षण में इस व्यवस्था ने एक ग्राहक के वेब सॉफ्टवेयर के कोड की जांच की और ऐसी गंभीर कमजोरी का पता लगाया, जिसके जरिए हमलावर दूर से कोड चला सकता था। यह मामला दिखाता है कि AI आधारित सुरक्षा प्रणाली बड़े कोड आधार में उन समस्याओं को जल्दी पहचानने में मदद कर सकती है, जिन्हें पारंपरिक तरीके से खोजने में काफी समय लग सकता है।
Google Cloud के अनुसार, भविष्य में ऐसी तकनीक सुरक्षा विशेषज्ञों का स्थान लेने के बजाय उनके काम को तेज करने में मदद कर सकती है। खासकर बड़े सॉफ्टवेयर में शुरुआती स्तर की जांच को स्वचालित करके विशेषज्ञों को उन मामलों पर अधिक समय देने का अवसर मिल सकता है, जहां मानवीय समझ और वास्तविक परीक्षण की जरूरत होती है।
Frequently asked questions
1. Google Cloud का नया सुरक्षा ढांचा क्या करता है?
यह ढांचा बड़े सॉफ्टवेयर कोड में सुरक्षा कमजोरियां खोजने में मदद करता है। इसमें कई AI एजेंट अलग-अलग हिस्सों की जांच करते हैं और बाद में मानव विशेषज्ञ संभावित खामियों की पुष्टि करते हैं। इससे सुरक्षा जांच अधिक तेज और व्यवस्थित हो सकती है।
2. AI एजेंट सॉफ्टवेयर की खामियां कैसे खोजते हैं?
AI एजेंट पहले कोड की संरचना और संभावित जोखिम वाले हिस्सों को समझते हैं। इसके बाद वे बाहरी जानकारी के प्रवेश, अनुमति व्यवस्था और डेटा के प्रवाह की जांच करते हैं। अलग-अलग एजेंट अपने निष्कर्ष साझा करके संभावित सुरक्षा समस्याओं की पहचान करते हैं।
3. सुरक्षा जांच में मानव विशेषज्ञों की जरूरत क्यों है?
AI द्वारा मिली हर संभावित समस्या वास्तविक सुरक्षा कमजोरी नहीं होती। मानव विशेषज्ञ परीक्षण करके यह देखते हैं कि खामी वास्तव में काम करती है या नहीं। इससे गलत चेतावनियां कम होती हैं और महत्वपूर्ण समस्याओं की सही पहचान करने में सहायता मिलती है।
4. यह तकनीक बड़े कोड आधार के लिए क्यों उपयोगी है?
बड़े सॉफ्टवेयर में लाखों या करोड़ों पंक्तियां हो सकती हैं, जिन्हें पूरी तरह हाथ से जांचना कठिन होता है। यह तकनीक अलग-अलग हिस्सों का तेजी से विश्लेषण कर सकती है, जिससे सुरक्षा टीमों को संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों तक जल्दी पहुंचने में मदद मिलती है।
5. क्या AI आधारित सुरक्षा जांच पारंपरिक तरीकों की जगह ले सकती है?
AI सुरक्षा जांच पारंपरिक तरीकों को पूरी तरह खत्म करने के बजाय उनका सहयोग कर सकती है। यह शुरुआती और दोहराव वाले विश्लेषण को तेज करती है, जबकि विशेषज्ञ जटिल मामलों की पुष्टि करते हैं। दोनों तरीकों के साथ इस्तेमाल से बेहतर सुरक्षा परिणाम मिल सकते हैं।
निष्कर्ष
AI आधारित सुरक्षा तकनीक सॉफ्टवेयर की कमजोरियां जल्दी पहचानने का उपयोगी तरीका बन रही है। Google Cloud का तरीका स्वचालित विश्लेषण और विशेषज्ञ जांच को साथ लाता है। इससे बड़े कोड आधार की सुरक्षा जांच तेज, व्यवस्थित और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।
Disclaimer: यह जानकारी केवल समाचार उद्देश्य के लिए है और इसे तकनीकी या सुरक्षा सलाह नहीं माना जाना चाहिए।
