दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (जीआरएपी) के नियमों में बदलाव किए हैं। नए बदलावों के तहत पुराने वाहनों की आवाजाही पर कुछ प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया गया है।
अब हरियाणा के सोनीपत में भी जीआरएपी के तीसरे चरण के तहत बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 या उससे पुराने मानक वाले डीजल हल्के चार पहिया वाहनों पर पाबंदी लागू करने का प्रावधान शामिल किया गया है। इससे पहले इस तरह के प्रतिबंध गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर जैसे क्षेत्रों में लागू थे।
जीआरएपी के नियमों में क्या बदलाव हुए?
आयोग ने इन बदलावों को 28 सितंबर को हुई अपनी 30वीं बैठक में मंजूरी दी थी। इसके अगले दिन इनकी घोषणा की गई। जीआरएपी के नियमों में इससे पहले नवंबर 2025 में बदलाव किए गए थे। इन संशोधनों का उद्देश्य प्रदूषण बढ़ने पर समय रहते कदम उठाना और दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखना है।
नए नियमों के अनुसार, जीआरएपी के पहले चरण के दौरान हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड तथा जम्मू-कश्मीर जैसे आसपास के राज्यों से आने वाली अंतरशहरी और अंतरराज्यीय बसों की दिल्ली-एनसीआर में आवाजाही पर भी पाबंदियां लागू होंगी। इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस-6 मानक वाली डीजल बसों को इससे छूट दी गई है। पहले इस तरह के प्रतिबंध जीआरएपी के दूसरे चरण में लागू किए जाते थे। अब इन्हें पहले चरण में शामिल करने से प्रदूषण बढ़ने की स्थिति में परिवहन से जुड़े कदम पहले ही उठाए जा सकेंगे।
पुराने वाहनों और बसों के लिए नए नियम
- सोनीपत: जीआरएपी के तीसरे चरण में पुराने वाहनों पर प्रतिबंध का प्रावधान।
- पेट्रोल वाहन: बीएस-3 मानक वाले हल्के चार पहिया वाहन प्रभावित होंगे।
- डीजल वाहन: बीएस-4 या उससे पुराने मानक वाले हल्के चार पहिया वाहन प्रभावित होंगे।
- बसें: पहले चरण में अंतरशहरी और अंतरराज्यीय बसों पर पाबंदियों का प्रावधान।
- छूट: इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस-6 मानक वाली डीजल बसों को छूट दी गई है।
मालवाहक वाहनों की छूट समाप्त
आयोग ने जरूरी सामान ले जाने वाले बीएस-4 और उससे पुराने मानक के मालवाहक वाहनों को दी गई छूट भी समाप्त कर दी है। यह बदलाव जीआरएपी के तीसरे और चौथे चरण से संबंधित है। इसका मतलब है कि इन चरणों के दौरान ऐसे वाहनों को पहले मिलने वाली विशेष राहत अब उपलब्ध नहीं होगी। हालांकि, वाहन मालिकों को अपनी यात्रा या माल की ढुलाई से पहले लागू नियमों की आधिकारिक जानकारी जरूर जांचनी चाहिए, क्योंकि प्रतिबंध प्रदूषण के स्तर और संबंधित आदेशों के अनुसार लागू होते हैं।
निर्माण और तोड़फोड़ के नियमों का विस्तार
निर्माण और तोड़फोड़ से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए भी नियमों का दायरा बढ़ाया गया है। आयोग ने वर्ष 2021 में जारी निर्देश संख्या 11 से 18 में संशोधन किया है। पहले ये निर्देश मुख्य रूप से एनसीआर के शहरी निकायों और नगरपालिका क्षेत्रों के अधिकार क्षेत्र में आने वाली निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर लागू होते थे। इन नियमों के तहत निर्माण परियोजनाओं का ऑनलाइन पंजीकरण और निगरानी करने की व्यवस्था भी शामिल थी। इसके अलावा, 500 वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले भूखंडों पर निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़ी परियोजनाओं का पंजीकरण अनिवार्य किया गया था।
नए बदलावों के बाद इन निर्देशों को एनसीआर के राज्यों में आने वाले अन्य क्षेत्रों तक भी विस्तारित किया गया है। इनमें शहरी क्षेत्र, नियंत्रित क्षेत्र, विकास क्षेत्र, औद्योगिक विकास क्षेत्र, औद्योगिक क्षेत्र और राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास के गलियारे शामिल हैं। इससे निर्माण कार्यों की निगरानी का दायरा बढ़ेगा और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है।
निर्माण कार्यों और पंजीकरण से जुड़े अहम बदलाव
- पुराने निर्देश: वर्ष 2021 के निर्देश संख्या 11 से 18 में संशोधन।
- पंजीकरण: 500 वर्ग मीटर या उससे बड़े भूखंडों की संबंधित परियोजनाओं के लिए पंजीकरण अनिवार्य।
- नया दायरा: शहरी, नियंत्रित और विकास क्षेत्रों तक विस्तार।
- औद्योगिक क्षेत्र: औद्योगिक विकास और औद्योगिक क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।
- राष्ट्रीय राजमार्ग: आसपास के गलियारों में भी निर्देश लागू होंगे।
- मुख्य उद्देश्य: निर्माण और तोड़फोड़ से होने वाले प्रदूषण की निगरानी बढ़ाना।
जीआरएपी के चार चरण और एक्यूआई का स्तर
जीआरएपी दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ने पर लागू किए जाने वाले आपातकालीन उपायों की व्यवस्था है। इसके चार चरण हैं, जिन्हें वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई के स्तर के आधार पर लागू किया जाता है। पहले चरण में एक्यूआई 201 से 300 के बीच होने पर कदम उठाए जाते हैं। दूसरे चरण में यह स्तर 301 से 400 तक पहुंचने पर सख्त उपाय किए जाते हैं। तीसरा चरण 401 से 450 के बीच एक्यूआई होने पर लागू होता है, जबकि 450 से ऊपर पहुंचने पर चौथा चरण लागू किया जाता है। इन चरणों के तहत वाहनों, निर्माण गतिविधियों और प्रदूषण फैलाने वाले अन्य स्रोतों पर अलग-अलग तरह के प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
जीआरएपी के चरणों की जानकारी
| चरण | एक्यूआई स्तर | प्रदूषण की स्थिति |
|---|---|---|
| पहला चरण | 201 से 300 | खराब |
| दूसरा चरण | 301 से 400 | बहुत खराब |
| तीसरा चरण | 401 से 450 | गंभीर |
| चौथा चरण | 450 से अधिक | अत्यंत गंभीर |
आधिकारिक जानकारी कहां देखें?
वाहनों, निर्माण गतिविधियों और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े ताजा निर्देशों के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट देखें। किसी भी यात्रा से पहले संबंधित क्षेत्र में लागू प्रतिबंधों की पुष्टि जरूर करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. जीआरएपी के नए नियमों में सोनीपत को क्यों शामिल किया गया है?
नए संशोधनों के तहत सोनीपत में भी जीआरएपी के तीसरे चरण के दौरान बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 या उससे पुराने मानक वाले डीजल हल्के चार पहिया वाहनों पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण उपायों का दायरा बढ़ाना है।
2. जीआरएपी के तीसरे चरण में किन वाहनों पर प्रतिबंध लग सकता है?
दिए गए नियमों के अनुसार, तीसरे चरण में बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 या उससे पुराने मानक वाले डीजल हल्के चार पहिया वाहन प्रभावित हो सकते हैं। प्रतिबंध संबंधित क्षेत्र में लागू आदेशों और प्रदूषण की स्थिति पर निर्भर करेंगे। यात्रा से पहले आधिकारिक निर्देश जांचना जरूरी है।
3. क्या दिल्ली-एनसीआर में आने वाली सभी बसों पर प्रतिबंध होगा?
नए नियमों में आसपास के राज्यों से आने वाली अंतरशहरी और अंतरराज्यीय बसों की आवाजाही पर पहले चरण से पाबंदियों का प्रावधान है। इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस-6 मानक वाली डीजल बसों को छूट दी गई है। वास्तविक प्रतिबंध लागू आदेशों के अनुसार तय होंगे।
4. निर्माण परियोजनाओं के पंजीकरण के नियमों में क्या बदलाव हुआ है?
निर्माण और तोड़फोड़ से संबंधित निर्देशों का दायरा एनसीआर के अतिरिक्त क्षेत्रों तक बढ़ाया गया है। 500 वर्ग मीटर या उससे बड़े भूखंडों पर संबंधित परियोजनाओं के पंजीकरण की व्यवस्था पहले से शामिल थी। नए बदलावों का उद्देश्य अधिक क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों की निगरानी करना है।
5. जीआरएपी का चौथा चरण कब लागू किया जाता है?
दिए गए विवरण के अनुसार, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 450 से ऊपर पहुंचता है, तब जीआरएपी का चौथा चरण लागू किया जाता है। इस चरण में प्रदूषण कम करने के लिए सख्त उपाय किए जा सकते हैं। लागू प्रतिबंधों की पुष्टि आयोग के आधिकारिक आदेशों से करनी चाहिए।
निष्कर्ष
जीआरएपी के नए बदलावों से दिल्ली-एनसीआर में पुराने वाहनों, बसों और निर्माण गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने का प्रयास किया गया है। वाहन मालिकों और निर्माण कंपनियों को यात्रा या काम शुरू करने से पहले संबंधित क्षेत्र के ताजा आधिकारिक निर्देश जांचने चाहिए, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
डिस्क्लेमर
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। प्रतिबंधों की वास्तविक स्थिति संबंधित सरकारी आदेशों पर निर्भर करती है। किसी भी निर्णय से पहले आधिकारिक अधिसूचना अवश्य जांचें।
