Old Monk News: महाराष्ट्र को ₹300 करोड़ के आबकारी राजस्व का नुकसान

ओल्ड मोंक रम बनाने वाली कंपनी मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर प्राइवेट लिमिटेड ने सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि महाराष्ट्र में उसकी खोपोली फैक्ट्री मई से बंद है। कंपनी के अनुसार, इस वजह से राज्य को अब तक 300 करोड़ रुपये से अधिक के आबकारी राजस्व का नुकसान हुआ है।

कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील वेंकटेश धोंड ने अदालत में कहा कि शराब पर लगने वाला आबकारी कर राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री में काम बंद होने के कारण करीब 300 कर्मचारी भी खाली बैठे हैं।

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ओल्ड मोंक फैक्ट्री बंद होने से महाराष्ट्र को नुकसान

कंपनी ने अदालत को यह भी बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के साथ बातचीत के बावजूद इस विवाद का कोई समाधान नहीं निकल पाया है। नियामक ने कंपनी के उत्पादों के लेबल को दो बार मंजूरी देने से इनकार किया है। इससे पहले 3 सितंबर को हुई सुनवाई में एफएसएसएआई ने अदालत से कहा था कि ओल्ड मोंक को रम के रूप में नहीं बेचा जा सकता, क्योंकि इसे बनाने में न्यूट्रल स्पिरिट और रम का स्वाद देने वाले पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है।

कंपनी के वकील ने यह भी दलील दी कि ओल्ड मोंक का निर्माण और बिक्री देश के कई राज्यों में होती है, लेकिन प्रतिबंध केवल महाराष्ट्र में लगाया गया है। उन्होंने अदालत को बताया कि कंपनी रम बाजार में बड़ी हिस्सेदारी रखती है और उसकी बिक्री में लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा होने का दावा किया। इस पर अदालत ने सवाल उठाया कि यदि उत्पाद देश के दूसरे हिस्सों में भी बेचा जा रहा है, तो केवल महाराष्ट्र में ही इस पर आपत्ति क्यों की गई।

ओल्ड मोंक विवाद के प्रमुख तथ्य

  • कंपनी: मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर प्राइवेट लिमिटेड
  • फैक्ट्री: खोपोली, महाराष्ट्र
  • बंद होने का समय: मई से
  • दावा किया गया राजस्व नुकसान: 300 करोड़ रुपये से अधिक
  • प्रभावित कर्मचारी: करीब 300
  • मुख्य विवाद: उत्पाद के लेबल और रम के स्वाद से जुड़े नियम

लेबल से जुड़े विवाद का अब तक समाधान नहीं

इससे पहले 31 अगस्त को कंपनी ने अदालत को बताया था कि वह अपने उत्पाद के लेबल से ‘7 इयर्स ओल्ड ब्लेंडेड’ शब्द हटाने के लिए तैयार है। कंपनी ने इसके लिए संशोधित पैकेजिंग भी खाद्य नियामक के पास जमा कराई थी। हालांकि, लेबल और उत्पाद में इस्तेमाल होने वाले स्वाद से जुड़े विवाद का समाधान अभी नहीं हो सका है।

इस पूरे मामले की शुरुआत एफएसएसएआई की प्रयोगशाला जांच से हुई थी। जांच में कुछ शराब उत्पादों के अंदर बाहर से मिलाए गए कृत्रिम या प्राकृतिक पदार्थों जैसे स्वाद देने वाले तत्व पाए गए थे। नियामक का कहना था कि इन पदार्थों से पेय पदार्थों का वास्तविक स्वाद और उनकी प्राकृतिक विशेषताएं छिप सकती हैं।

एफएसएसएआई की आपत्तियों के मुख्य बिंदु

  • लेबल की मंजूरी: ओल्ड मोंक के लेबल को दो बार मंजूरी नहीं मिली।
  • स्वाद से जुड़ा सवाल: न्यूट्रल स्पिरिट और रम का स्वाद देने वाले पदार्थों के इस्तेमाल पर आपत्ति।
  • प्रयोगशाला जांच: कुछ उत्पादों में मिलाए गए स्वाद देने वाले तत्व पाए गए।
  • नियामक का पक्ष: पेय पदार्थ की वास्तविक प्रकृति और निर्धारित स्वाद स्पष्ट रहना चाहिए।
  • कंपनी का कदम: लेबल से ‘7 इयर्स ओल्ड ब्लेंडेड’ शब्द हटाने की पेशकश।

अन्य शराब कंपनियों के उत्पादों पर भी कार्रवाई

इन जांच नतीजों के आधार पर नियामक ने यूनाइटेड स्पिरिट्स के मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम, एंटिक्विटी ब्लू व्हिस्की और रॉयल चैलेंज व्हिस्की के कुछ प्रकारों की बिक्री पर रोक लगाई थी। इसके अलावा, मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर की ओल्ड मोंक रम के कुछ प्रकारों और इनब्रू बेवरेजेज की बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की तथा ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम पर भी कार्रवाई की गई थी। बाद में मैकडॉवेल्स नंबर 1 बनाने वाली यूनाइटेड स्पिरिट्स ने नियामक के साथ समझौता होने के बाद अपनी याचिका वापस ले ली थी।

एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक (मादक पेय पदार्थ) नियम, 2018 का हवाला देते हुए कहा कि रम और व्हिस्की जैसे पेय पदार्थों में उनका निर्धारित स्वाद और खुशबू बनी रहनी चाहिए। नियामक के अनुसार, रम में रम का अलग से स्वाद देने वाले पदार्थ या व्हिस्की में व्हिस्की का स्वाद मिलाना उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति के बारे में गलत जानकारी दे सकता है।

एनर्जी ड्रिंक के नाम पर भी नियामक की कार्रवाई

यह कार्रवाई केवल शराब बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं है। एफएसएसएआई ने पेप्सिको, रिलायंस के कैम्पा और मॉन्स्टर एनर्जी जैसी कंपनियों को भी कुछ उत्पादों पर ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द का इस्तेमाल बंद करने के लिए नोटिस जारी किए हैं। इसके बाद 6 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए कंपनियों को इस नाम से अतिरिक्त उत्पाद तैयार करने से रोक दिया था।

आधिकारिक जानकारी और नियम

खाद्य उत्पादों की सुरक्षा, लेबलिंग और नियामकीय नियमों की जानकारी के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट देखें। अदालत में चल रहे मामले की स्थिति जानने के लिए संबंधित न्यायालय के आधिकारिक आदेशों को प्राथमिकता दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. ओल्ड मोंक की खोपोली फैक्ट्री क्यों बंद है?

कंपनी के अनुसार, महाराष्ट्र में खोपोली स्थित फैक्ट्री मई से बंद है। विवाद का संबंध ओल्ड मोंक के उत्पाद लेबल और उसमें इस्तेमाल होने वाले स्वाद देने वाले पदार्थों से है। कंपनी ने अदालत को बताया कि एफएसएसएआई के साथ बातचीत के बावजूद अभी तक समाधान नहीं निकला है।

2. महाराष्ट्र को कितने आबकारी राजस्व का नुकसान होने का दावा है?

मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर प्राइवेट लिमिटेड ने बॉम्बे हाई कोर्ट में दावा किया कि फैक्ट्री बंद होने के कारण महाराष्ट्र को 300 करोड़ रुपये से अधिक के आबकारी राजस्व का नुकसान हुआ है। यह आंकड़ा कंपनी की ओर से अदालत में दिया गया दावा है।

3. एफएसएसएआई ने ओल्ड मोंक के लेबल पर आपत्ति क्यों की?

एफएसएसएआई ने उत्पाद की वास्तविक प्रकृति, लेबल और रम का स्वाद देने वाले पदार्थों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। नियामक के अनुसार, मादक पेय पदार्थों में निर्धारित स्वाद और खुशबू से जुड़े नियमों का पालन होना चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को उत्पाद के बारे में गलत जानकारी न मिले।

4. क्या ओल्ड मोंक के लेबल में बदलाव की पेशकश की गई थी?

हां, कंपनी ने 31 अगस्त को अदालत को बताया था कि वह अपने उत्पाद के लेबल से ‘7 इयर्स ओल्ड ब्लेंडेड’ शब्द हटाने के लिए तैयार है। कंपनी ने संशोधित पैकेजिंग भी नियामक को सौंपी थी। हालांकि, विवाद का पूर्ण समाधान होने की जानकारी इस विवरण में नहीं दी गई है।

5. क्या एफएसएसएआई ने दूसरी शराब कंपनियों पर भी कार्रवाई की?

हां, दिए गए विवरण के अनुसार, यूनाइटेड स्पिरिट्स और इनब्रू बेवरेजेज के कुछ शराब उत्पादों पर भी कार्रवाई हुई थी। मैकडॉवेल्स नंबर 1 बनाने वाली यूनाइटेड स्पिरिट्स ने नियामक के साथ समझौते के बाद अपनी याचिका वापस ले ली थी।

निष्कर्ष

ओल्ड मोंक से जुड़ा मामला उत्पाद लेबलिंग, स्वाद के मानकों और खाद्य नियामक की भूमिका से संबंधित है। कंपनी ने फैक्ट्री बंद रहने और राजस्व नुकसान का दावा किया है। आगे का समाधान नियामकीय प्रक्रिया और अदालत में होने वाली सुनवाई पर निर्भर करेगा।

डिस्क्लेमर

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। मामले से जुड़े दावे संबंधित पक्षों के हैं। नवीनतम स्थिति के लिए आधिकारिक आदेश और नियामकीय जानकारी देखें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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