HPCL Q2 Results: मुनाफा 6% गिरकर ₹3,625 करोड़

हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 3,625.22 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। यह पिछले साल की इसी तिमाही के 3,859 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 6 प्रतिशत कम है। हालांकि, पहली तिमाही में भारी नुकसान के बाद कंपनी दूसरी तिमाही में फिर मुनाफे में लौट आई।

HPCL Q2 Results में मुनाफे और आय की स्थिति

कंपनी की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही में उत्पादों की बिक्री से होने वाली समेकित आय 26 प्रतिशत बढ़कर 1.38 लाख करोड़ रुपये हो गई। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह 1.09 लाख करोड़ रुपये थी। कुल आय भी करीब 25.8 प्रतिशत बढ़कर 1.39 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि एक साल पहले यह 1.11 लाख करोड़ रुपये थी।

मई 2026 में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कुल 7 रुपये की बढ़ोतरी के बाद कंपनी के विपणन मार्जिन को सहारा मिला। इसी वजह से HPCL पहली तिमाही में 12,264.67 करोड़ रुपये के नुकसान के बाद दूसरी तिमाही में मुनाफा दर्ज कर सकी।

📊 HPCL के तिमाही नतीजे

  • दूसरी तिमाही का मुनाफा: 3,625.22 करोड़ रुपये
  • सालाना बदलाव: मुनाफे में करीब 6% गिरावट
  • उत्पाद बिक्री से आय: 1.38 लाख करोड़ रुपये
  • कुल आय: 1.39 लाख करोड़ रुपये
  • पहली तिमाही का नुकसान: 12,264.67 करोड़ रुपये

पहली छमाही में कंपनी को हुआ नुकसान

दूसरी तिमाही में मुनाफा होने के बावजूद, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में HPCL को कुल 8,639.45 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। पिछले वित्त वर्ष की अप्रैल से सितंबर अवधि में कंपनी ने 7,970 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचीं, जिससे पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री पर कंपनी के मार्जिन पर दबाव पड़ा।

कंपनी ने कहा कि अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान कुछ पेट्रोलियम उत्पादों पर सीमित विपणन मार्जिन के कारण लाभ पर असर पड़ा। इसका मतलब है कि कच्चे तेल की लागत और तैयार ईंधन की बिक्री से मिलने वाली रकम के बीच का अंतर कंपनी के लिए कम अनुकूल रहा।

Refining Margin में सुधार, लेकिन दबाव बरकरार

कंपनी के लिए एक सकारात्मक बात रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार रहा। अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान HPCL का औसत ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन 27.89 डॉलर प्रति बैरल रहा। पिछले साल की इसी अवधि में यह 5.95 डॉलर प्रति बैरल था। यह आंकड़ा कच्चे तेल को पेट्रोल, डीजल और अन्य उत्पादों में बदलने के बाद मिलने वाले मार्जिन को दर्शाता है।

कंपनी ने घरेलू LPG की बिक्री पर हुए नुकसान की भरपाई के लिए मिलने वाले सरकारी मुआवजे की किस्तों को भी अपनी आय में शामिल किया। पेट्रोलियम मंत्रालय ने मार्च 2025 तक हुए और मार्च 2026 तक होने की आशंका वाले नुकसान के लिए 7,920 करोड़ रुपये के मुआवजे की जानकारी दी थी। अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान छह मासिक किस्तों के रूप में कुल 3,960 करोड़ रुपये दर्ज किए गए।

⚠️ HPCL के सामने मुख्य चुनौतियां

  • कच्चे तेल की कीमत: 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने से दबाव
  • पहली छमाही का नतीजा: 8,639.45 करोड़ रुपये का नुकसान
  • नकारात्मक बफर: 30 सितंबर 2026 को 18,048.82 करोड़ रुपये
  • प्रमुख जोखिम: तेल की लागत और विपणन मार्जिन में उतार-चढ़ाव
  • सकारात्मक संकेत: रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार

कच्चे तेल की प्रोसेसिंग और बिक्री में बदलाव

दूसरी तिमाही में HPCL ने 6.20 मिलियन टन कच्चे तेल की प्रोसेसिंग की, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह मात्रा 6.57 मिलियन टन थी। दूसरी ओर, घरेलू बिक्री बढ़कर 11.71 मिलियन टन हो गई, जो पिछले साल 11.16 मिलियन टन थी। निर्यात भी 0.91 मिलियन टन से बढ़कर 1.02 मिलियन टन पहुंच गया।

कंपनी ने बताया कि 30 सितंबर 2026 तक उसका जमा हुआ नकारात्मक बफर, यानी वह राशि जिसे अभी आय के रूप में मान्यता नहीं दी गई है, 18,048.82 करोड़ रुपये था। कंपनी के नतीजों और तेल बाजार से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए पाठक Moneycontrol की मूल रिपोर्ट देख सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. HPCL का Q2FY27 में शुद्ध मुनाफा कितना रहा?

HPCL ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 3,625.22 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। यह पिछले साल की समान तिमाही के 3,859 करोड़ रुपये से करीब 6 प्रतिशत कम था।

2. HPCL की दूसरी तिमाही में आय कितनी बढ़ी?

उत्पादों की बिक्री से कंपनी की समेकित आय 26 प्रतिशत बढ़कर 1.38 लाख करोड़ रुपये रही। कुल आय लगभग 25.8 प्रतिशत बढ़कर 1.39 लाख करोड़ रुपये पहुंची।

3. HPCL को पहली छमाही में नुकसान क्यों हुआ?

पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं। कुछ पेट्रोलियम उत्पादों पर विपणन मार्जिन कम रहने से अप्रैल-सितंबर अवधि में कंपनी की लाभप्रदता प्रभावित हुई।

4. HPCL के रिफाइनिंग मार्जिन में कितना सुधार हुआ?

अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी का औसत ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन 27.89 डॉलर प्रति बैरल रहा। पिछले साल की समान अवधि में यह 5.95 डॉलर प्रति बैरल था, इसलिए इसमें उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ।

5. क्या HPCL के नतीजे शेयर खरीदने का संकेत देते हैं?

केवल तिमाही मुनाफे के आधार पर शेयर खरीदने का फैसला नहीं करना चाहिए। निवेशक कंपनी के पूरे वित्तीय नतीजे, कच्चे तेल की कीमतें, मार्जिन, कर्ज, मूल्यांकन और अपने जोखिम को देखकर स्वतंत्र रूप से निर्णय लें।

निष्कर्ष

HPCL दूसरी तिमाही में मुनाफे में लौटी, लेकिन पहली छमाही का नुकसान बताता है कि ऊंचे कच्चे तेल और कमजोर विपणन मार्जिन का असर अभी अहम है। बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन सकारात्मक संकेत है, पर आगे के नतीजे ऊर्जा बाजार और लागत पर निर्भर रहेंगे।

Disclaimer: यह खबर केवल जानकारी के लिए है, निवेश की सलाह नहीं। शेयर बाजार में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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