भारत शुक्रवार को रेल परिवहन के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू करने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा के जींद स्टेशन से देश की पहली Hydrogen Train को हरी झंडी दिखाएंगे। यह ट्रेन शुरुआती चरण में जींद–सोनीपत रेल मार्ग पर चलेगी। इसके साथ ही प्रधानमंत्री हरियाणा और पंजाब में रेलवे, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े लगभग 25,000 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का भी उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।
भारत की पहली Hydrogen Train भारतीय रेलवे के लिए स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक तकनीक की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है। यह परियोजना देश के परिवहन क्षेत्र को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
प्रधानमंत्री मोदी दिखाएंगे देश की पहली Hydrogen Train को हरी झंडी
देश की यह नई ट्रेन भारत को आधुनिक और स्वच्छ परिवहन तकनीक अपनाने वाले देशों की सूची में शामिल करेगी। इस परियोजना की तकनीकी योजना और मंजूरी का काम भारतीय रेलवे की अनुसंधान संस्था RDSO ने किया है। वहीं ट्रेन को तैयार करने का काम मेधा सर्वो ड्राइव्स ने किया, जबकि चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री ने इसके बाहरी डिजाइन और कोच तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।
यह ट्रेन Hydrogen Fuel Cell तकनीक पर आधारित है। इसमें हाइड्रोजन की मदद से बिजली तैयार की जाती है और उसी बिजली से ट्रेन चलती है। इस पूरी प्रक्रिया में किसी तरह का धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता। केवल पानी की भाप और थोड़ी गर्मी निकलती है, इसलिए इसे पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है।
Hydrogen Train की मुख्य जानकारी
- शुभारंभ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- मार्ग: जींद–सोनीपत
- कुल कोच: 10
- यात्री क्षमता: लगभग 2,600
- तकनीक: Hydrogen Fuel Cell
- उत्सर्जन: केवल पानी की भाप और गर्मी
10 कोच वाली ट्रेन की खासियत
भारतीय रेलवे का कहना है कि दुनिया के कई देशों में हाइड्रोजन से चलने वाली यात्री ट्रेनें पहले से मौजूद हैं, लेकिन उनमें ज्यादातर केवल दो या तीन कोच होते हैं। इसके मुकाबले भारत की यह ट्रेन 10 कोच वाली है और इसमें लगभग 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं। इससे यह साबित होता है कि हाइड्रोजन तकनीक का इस्तेमाल अधिक क्षमता वाली यात्री सेवाओं के लिए भी किया जा सकता है।
ट्रेन में दोनों सिरों पर दो Power Car लगाए गए हैं और बीच में आठ यात्री कोच हैं। प्रत्येक पावर कार में फ्यूल सेल, लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरी और हाइड्रोजन स्टोरेज सिलेंडर लगाए गए हैं। दोनों पावर कार मिलकर करीब 2,400 किलोवाट शक्ति पैदा करते हैं, जिससे ट्रेन की अधिकतम गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
परियोजना की प्रमुख विशेषताएं
- Power Car: 2
- यात्री कोच: 8
- कुल शक्ति: लगभग 2,400 किलोवाट
- अधिकतम गति: 110 किमी प्रति घंटा
- हाइड्रोजन भंडारण क्षमता: 3,000 किलोग्राम
- ईंधन भरने का केंद्र: जींद, हरियाणा
जींद में तैयार हुआ आधुनिक Hydrogen केंद्र
फिलहाल इस ट्रेन को 89 किलोमीटर लंबे जींद–सोनीपत रेल मार्ग पर चलाया जाएगा। इस रूट का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि जींद में हाइड्रोजन भरने की आधुनिक सुविधा तैयार की गई है। यहां पानी से हाइड्रोजन तैयार की जाती है, फिर उसे सुरक्षित टैंक में रखा जाता है और अधिक दबाव पर संग्रहित किया जाता है। इसके बाद विशेष मशीनों के जरिए ट्रेन के दोनों पावर कार में एक साथ हाइड्रोजन भरी जा सकती है, जिससे समय की बचत होती है।
रेलवे के अनुसार जींद स्थित इस केंद्र में लगभग 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन संग्रह करने की क्षमता है, जिससे नियमित रूप से ट्रेन का संचालन किया जा सकता है। इस पूरी व्यवस्था को सुरक्षा मानकों के अनुसार तैयार किया गया है और इसे संबंधित सरकारी एजेंसियों से मंजूरी भी मिल चुकी है।
सुरक्षा और भविष्य की योजना
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें डीजल ट्रेनों की तुलना में कई मायनों में बेहतर हैं। इससे प्रदूषण कम होगा, आयातित ईंधन पर निर्भरता घटेगी और शोर भी कम होगा। हालांकि इस तकनीक की शुरुआती लागत अधिक है, लेकिन भविष्य में बड़े स्तर पर इसका उपयोग होने पर इसकी लागत कम होने की उम्मीद है।
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना की कई स्तर पर जांच की गई है। हाइड्रोजन ज्वलनशील गैस होने के कारण पूरे सिस्टम को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुसार तैयार किया गया है। इसके अलावा जर्मनी की एक स्वतंत्र तकनीकी संस्था ने भी इस परियोजना का सुरक्षा परीक्षण किया है।
रेलवे का मानना है कि शुरुआत में इस तकनीक का उपयोग विरासत और विशेष रेल मार्गों पर किया जाएगा। यदि यह परियोजना सफल रहती है तो भविष्य में देश के अन्य चुनिंदा मार्गों पर भी हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों का विस्तार किया जा सकता है। इससे भारतीय रेलवे को स्वच्छ, आधुनिक और टिकाऊ परिवहन प्रणाली विकसित करने में बड़ी मदद मिलेगी।
अस्वीकरण: यह जानकारी सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। किसी भी आधिकारिक बदलाव के लिए भारतीय रेलवे की आधिकारिक जानकारी देखें।
