सोलर मॉड्यूल बनाने वाली कंपनियाँ समान जगह से अधिक बिजली उत्पादन करने वाली तकनीकों पर काम कर रही हैं। 24 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, Insolation Energy यानी INA Solar की सहायक कंपनी Insolation Green Energy ने अमेरिका की Caelux Corporation के साथ पाँच साल की रणनीतिक साझेदारी की है। इसका लक्ष्य 3 GW क्षमता वाले perovskite-TOPCon hybrid tandem solar modules का व्यावसायीकरण करना है।
साझेदारी में कौन-सी तकनीक शामिल है?
योजना में Caelux की Energy Producing Glass तकनीक को INA Solar के N-type TOPCon प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ना शामिल है। कंपनियाँ ऐसी hybrid tandem तकनीक विकसित करना चाहती हैं जिसमें perovskite-आधारित बिजली बनाने वाली काँच की परत और TOPCon solar cells मिलकर काम करें। कंपनियों ने 2028 तक मॉड्यूल दक्षता 29 प्रतिशत तक पहुँचाने का लक्ष्य बताया है। यह भविष्य का लक्ष्य है, मौजूदा उत्पाद की गारंटी नहीं।
Tandem solar module क्या होता है?
Tandem सेल में प्रकाश को पकड़ने वाली एक से अधिक परतों का इस्तेमाल किया जाता है। अलग-अलग सामग्री प्रकाश के अलग हिस्सों को उपयोग में ला सकती हैं, जिससे सही डिजाइन में कुल दक्षता बढ़ाने की संभावना रहती है। हालांकि, लैब के परिणाम और बड़े पैमाने पर बनने वाले मॉड्यूल का वास्तविक प्रदर्शन अलग हो सकता है। टिकाऊपन, लागत और उत्पादन प्रक्रिया भी व्यावसायिक सफलता के लिए जरूरी हैं।
कंपनियों को क्या करना होगा?
रिपोर्ट के अनुसार, साझेदारी में तकनीक का सत्यापन, उत्पादन की तैयारी और जरूरी नियामकीय मंजूरियाँ शामिल होंगी। भारत में लागू ALMM जैसी सूची और संबंधित मानकों की जरूरत भी परियोजना के व्यावसायिक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। उत्पादन शुरू करने से पहले गुणवत्ता नियंत्रण, आपूर्ति श्रृंखला और बड़े पैमाने पर निर्माण की क्षमता साबित करनी होगी।
INA Solar की मौजूदा निर्माण क्षमता
रिपोर्ट में बताया गया है कि INA Solar जयपुर में तीन सोलर मॉड्यूल निर्माण सुविधाएँ संचालित करती है, जिनकी संयुक्त वार्षिक क्षमता 5.5 GW है। कंपनी 4.5 GW TOPCon solar cell facility और मध्य प्रदेश के Narmadapuram में aluminium frame निर्माण सुविधा भी विकसित कर रही है। ये अलग-अलग परियोजनाएँ हैं; उनकी स्थिति और शुरू होने की तारीख की पुष्टि कंपनी के अपडेट से करनी चाहिए।
भारतीय सोलर उद्योग के लिए संभावित असर
अगर तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो एक ही क्षेत्रफल में अधिक बिजली उत्पादन करने की संभावना बन सकती है। इससे जमीन सीमित होने वाले प्रोजेक्ट में लाभ हो सकता है। दूसरी ओर, नई सामग्री की लागत, दीर्घकालिक मौसम सहनशीलता और निर्माण की जटिलता पर भी ध्यान देना होगा। इसलिए नई तकनीक का मूल्यांकन केवल दक्षता के दावे से नहीं किया जाना चाहिए।
अधिक जानकारी के लिए Energetica India की मूल रिपोर्ट देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. INA Solar और Caelux ने क्या घोषणा की?
दोनों कंपनियों ने पाँच साल की रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। इसका उद्देश्य perovskite-आधारित Energy Producing Glass और TOPCon सेल तकनीक को जोड़कर hybrid tandem सोलर मॉड्यूल का व्यावसायीकरण करना है।
2. 3 GW का लक्ष्य क्या दर्शाता है?
3 GW साझेदारी के तहत प्रस्तावित मॉड्यूल व्यावसायीकरण का घोषित पैमाना है। इसे पहले से स्थापित उत्पादन या तत्काल बाजार में उपलब्ध 3 GW उत्पाद नहीं समझना चाहिए; परियोजना को तकनीकी और व्यावसायिक चरण पूरे करने होंगे।
3. Perovskite-TOPCon tandem तकनीक क्यों चर्चा में है?
इसमें अलग-अलग प्रकाश-अवशोषक परतों को मिलाकर अधिक ऊर्जा प्राप्त करने की संभावना है। लेकिन लागत, टिकाऊपन, तापमान और नमी के प्रति व्यवहार तथा बड़े पैमाने पर निर्माण की क्षमता को भी प्रमाणित करना जरूरी है।
4. कंपनियों ने दक्षता का क्या लक्ष्य रखा है?
रिपोर्ट में 2028 तक मॉड्यूल दक्षता 29 प्रतिशत तक पहुँचाने का लक्ष्य बताया गया है। यह भविष्य का लक्ष्य है, इसलिए इसे आज उपलब्ध हर मॉड्यूल की प्रमाणित दक्षता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
5. ALMM मंजूरी का क्या महत्व है?
ALMM भारत में सोलर मॉड्यूल और निर्माताओं से जुड़ी सरकारी सूची है, जो कुछ परियोजनाओं और योजनाओं में लागू होती है। किसी नए मॉड्यूल का उपयोग करने से पहले संबंधित परियोजना पर लागू नियम और पात्रता जाँचना जरूरी है।
निष्कर्ष
INA Solar-Caelux साझेदारी अगली पीढ़ी के अधिक दक्ष सोलर मॉड्यूल विकसित करने की कोशिश है। इसका वास्तविक असर तकनीकी परीक्षण, प्रमाणन, लागत और व्यावसायिक उत्पादन पर निर्भर करेगा। 2028 का दक्षता लक्ष्य अभी भविष्य की योजना है।
अस्वीकरण: लेख प्रकाशित रिपोर्ट पर आधारित है। तकनीकी और उत्पादन संबंधी लक्ष्य कंपनियों द्वारा घोषित योजनाएँ हैं, सुनिश्चित परिणाम नहीं।