बैटरी स्टोरेज महंगा हुआ, बढ़ सकती है बिजली की टैरिफ

Battery Energy Storage Projects India: भारत में बैटरी एनर्जी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स की बढ़ती लागत से भविष्य में टैरिफ दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे माल की महंगाई और बैटरी निर्माण लागत बढ़ने से कई परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता प्रभावित हो रही है।

भारत में बैटरी एनर्जी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ने से इनकी टैरिफ दरों में आने वाले समय में बढ़ोतरी हो सकती है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि बैटरी बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतें बढ़ने के कारण पहले कम दरों पर मिली कई परियोजनाओं को पूरा करना मुश्किल होता जा रहा है।

बैटरी एनर्जी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स की लागत क्यों बढ़ रही है?

🔋 भारत के बैटरी स्टोरेज सेक्टर की मुख्य बातें

  • क्षेत्र: Battery Energy Storage Projects
  • वर्तमान प्रोजेक्ट: लगभग 260 GWh क्षमता
  • मुख्य चुनौती: कच्चे माल की बढ़ती कीमतें
  • संभावित असर: टैरिफ दरों में बढ़ोतरी
  • उद्देश्य: 24 घंटे स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराना

भारत 24 घंटे स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराने के लिए बैटरी स्टोरेज क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है। फिलहाल देश में करीब 260 गीगावॉट-घंटे (GWh) क्षमता वाले कई स्टोरेज प्रोजेक्ट अलग-अलग चरणों में हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में बैटरी की कीमतें कम होने की उम्मीद में कंपनियों ने बहुत कम टैरिफ पर बोली लगाई थी, लेकिन अब लागत बढ़ने से उन परियोजनाओं की आर्थिक स्थिति कमजोर पड़ रही है।

इंडिया एनर्जी स्टोरेज अलायंस (IESA) के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में देश की स्थापित बैटरी स्टोरेज क्षमता बढ़कर 8.7 GWh हो गई, जो 2025 के अंत में केवल 0.78 GWh थी। वर्ष के अंत तक इसके 10 GWh तक पहुंचने की उम्मीद है। इसके बावजूद यह देश की कुल नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता की तुलना में अभी काफी कम है।

कच्चे माल की महंगाई का क्या असर पड़ा?

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन द्वारा बैटरी निर्यात पर मिलने वाली प्रोत्साहन योजनाएं वापस लेने और ईरान से जुड़े तनाव के कारण लिथियम, तांबा और एल्युमिनियम जैसी धातुओं की कीमतें बढ़ गई हैं। इसका सीधा असर बैटरी निर्माण लागत पर पड़ा है।

📊 बढ़ती लागत का संभावित प्रभाव

  • मुख्य कारण: लिथियम, तांबा और एल्युमिनियम महंगे
  • प्रभाव: बैटरी निर्माण लागत बढ़ी
  • SBI का संकेत: कई परियोजनाएं अटक सकती हैं
  • चुनौती: पुराने कम टैरिफ अब व्यावहारिक नहीं
  • विशेषज्ञों की सलाह: टिकाऊ और व्यावहारिक टैरिफ तय करें
  • संभावना: भविष्य में टैरिफ दरें बढ़ सकती हैं

SBI और उद्योग विशेषज्ञों की क्या राय है?

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के अधिकारियों ने बताया कि कुछ ऐसे प्रोजेक्ट, जिन्हें पहले वित्तीय मंजूरी मिल चुकी थी, अब आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं क्योंकि बैटरी की कीमतें बढ़ने के बाद आपूर्तिकर्ता पहले तय की गई दरों पर सामान देने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि 2025 में कुछ परियोजनाओं के लिए बेहद कम टैरिफ तय किए गए थे, लेकिन मौजूदा लागत के हिसाब से वे अब व्यावहारिक नहीं रहे।

वहीं महिंद्रा सस्टेन ने भी कंपनियों को केवल प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए बहुत कम टैरिफ देने से बचने की सलाह दी है। कंपनी का कहना है कि टैरिफ ऐसा होना चाहिए जिससे परियोजनाओं को समय पर वित्त मिले, उनका निर्माण तय समय में पूरा हो और वे लंबे समय तक आर्थिक रूप से सफल रह सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लागत में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहता है, तो आने वाले समय में बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं की टैरिफ दरें बढ़ सकती हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रिपोर्टों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। बाजार की परिस्थितियों और नीतिगत बदलावों के अनुसार स्थिति बदल सकती है।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

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