BRICS में भारत का बड़ा प्रस्ताव, ड्रग तस्करी रोकने को वर्चुअल ग्रुप

भारत ने BRICS देशों के सामने मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए एक बड़ा प्रस्ताव रखा है। जानिए वर्चुअल वर्किंग ग्रुप की योजना, बैठक के प्रमुख मुद्दे और भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ रणनीति।

भारत ने मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए BRICS देशों के सामने एक बड़ा प्रस्ताव रखा है। नई दिल्ली में आयोजित BRICS देशों की एंटी-ड्रग एजेंसियों की दो दिवसीय बैठक में भारत ने एक विशेष वर्चुअल वर्किंग ग्रुप (Virtual Working Group) बनाने की बात कही। इसका उद्देश्य बदलते तस्करी के तरीकों पर नजर रखना, सदस्य देशों के बीच तुरंत खुफिया जानकारी साझा करना और संयुक्त कार्रवाई को मजबूत बनाना है।

BRICS देशों के सामने भारत का बड़ा एंटी-ड्रग प्रस्ताव

बैठक के उद्घाटन के दौरान नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के महानिदेशक अनुराग गर्ग ने कहा कि आधुनिक तकनीक और नए तरीकों के कारण नशे की तस्करी अब केवल किसी एक देश की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। उन्होंने कहा कि ड्रग तस्कर किसी सीमा या संप्रभुता का सम्मान नहीं करते, इसलिए उनसे मुकाबला करने के लिए सभी देशों को मिलकर तेज और प्रभावी कार्रवाई करनी होगी।

🌍 भारत के प्रस्ताव की मुख्य बातें

  • प्रस्ताव: BRICS वर्चुअल वर्किंग ग्रुप
  • उद्देश्य: ड्रग तस्करी पर संयुक्त कार्रवाई
  • मुख्य फोकस: रियल-टाइम खुफिया जानकारी साझा करना
  • सहयोग: सदस्य देशों के बीच समन्वय
  • रणनीति: नए तस्करी तरीकों की निगरानी
  • स्थान: नई दिल्ली

भारत ने सुझाव दिया कि BRICS देशों के बीच एक स्थायी वर्चुअल प्लेटफॉर्म बनाया जाए, जहां सदस्य देश नियमित रूप से बैठक कर सकें, रियल-टाइम खुफिया जानकारी साझा करें, तस्करी के नए तरीकों का विश्लेषण करें और जरूरत पड़ने पर संयुक्त अभियान चला सकें। भारत का मानना है कि इस तरह का सहयोग अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई करने में मदद करेगा।

वर्चुअल वर्किंग ग्रुप से क्या होगा फायदा?

बैठक में सिंथेटिक ड्रग्स, उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की अवैध आपूर्ति, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और अधिकारियों के प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हो रही है। इसके अलावा डार्कनेट, डिजिटल तकनीक और नए प्रकार के साइकोएक्टिव पदार्थों (NPS) के बढ़ते इस्तेमाल से पैदा हो रही चुनौतियों पर भी विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

🛡️ बैठक के प्रमुख मुद्दे

  • सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण
  • रसायनों की अवैध आपूर्ति रोकना
  • खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान
  • कानून प्रवर्तन एजेंसियों का समन्वय
  • डार्कनेट और डिजिटल तकनीक की चुनौतियां
  • अधिकारियों का प्रशिक्षण

भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर जोर

एनसीबी प्रमुख ने कहा कि भारत ने नशे के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई है। इसके तहत केवल तस्करों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क को खत्म करना, उनकी अवैध संपत्तियां जब्त करना और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना भी प्राथमिकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि नशे की लत से प्रभावित लोगों को केवल अपराधी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। भारत पुनर्वास और इलाज पर भी समान रूप से जोर दे रहा है, ताकि ऐसे लोगों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाया जा सके और युवाओं का भविष्य सुरक्षित बनाया जा सके।

BRICS की बढ़ती भूमिका और भारत का लक्ष्य

BRICS समूह में शुरुआत में ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। बाद में इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया जैसे नए सदस्य भी जुड़े। आज यह समूह दुनिया की लगभग आधी आबादी, वैश्विक अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में भारत का यह प्रस्ताव वैश्विक स्तर पर नशा तस्करी के खिलाफ सहयोग को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। अंतरराष्ट्रीय नीतियों और सरकारी निर्णयों से संबंधित अंतिम जानकारी आधिकारिक स्रोतों से ही मान्य होगी।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

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