विप्रो 16 जुलाई 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी करेगी। कंपनी अंतरिम डिविडेंड पर भी विचार करेगी। जानिए शेयर, मुनाफे और निवेशकों की उम्मीदों से जुड़ी पूरी जानकारी।
देश की प्रमुख आईटी कंपनियों में शामिल विप्रो लिमिटेड ने घोषणा की है कि उसकी बोर्ड बैठक 16 जुलाई 2026 को होगी। इस बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) के Audited Standalone और Consolidated वित्तीय नतीजों को मंजूरी दी जाएगी। कंपनी बाजार बंद होने के बाद अपने नतीजे जारी करेगी। इसके बाद वरिष्ठ प्रबंधन निवेशकों और विश्लेषकों के साथ कंपनी के प्रदर्शन और भविष्य की रणनीति पर चर्चा करेगा।
विप्रो 16 जुलाई को जारी करेगी पहली तिमाही के नतीजे
पहली तिमाही के नतीजों के साथ ही कंपनी का बोर्ड वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अंतरिम डिविडेंड (Interim Dividend) देने के प्रस्ताव पर भी विचार करेगा। यदि बोर्ड इसकी मंजूरी देता है, तो शेयरधारकों को डिविडेंड का लाभ मिलेगा। इससे पहले पिछली तिमाही में कंपनी ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा ₹15,000 करोड़ का शेयर बायबैक घोषित किया था।
📊 विप्रो Q1FY27 अपडेट
- बोर्ड बैठक: 16 जुलाई 2026
- नतीजे: अप्रैल-जून 2026 तिमाही
- डिविडेंड: अंतरिम डिविडेंड पर विचार
- पिछला बायबैक: ₹15,000 करोड़
- नतीजे जारी: बाजार बंद होने के बाद
- चर्चा: निवेशकों और विश्लेषकों के साथ
कंपनी ने यह भी बताया है कि इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों के तहत नामित कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए ट्रेडिंग विंडो 16 जून 2026 से बंद है और यह 18 जुलाई 2026 को कारोबार समाप्त होने तक बंद रहेगी।
पिछली तिमाही में विप्रो का प्रदर्शन कैसा रहा?
पिछली तिमाही के नतीजों पर नजर डालें तो मार्च 2026 तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ (Net Profit) ₹3,502 करोड़ रहा, जो एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में लगभग 1.85% कम था। हालांकि, दिसंबर तिमाही की तुलना में इसमें करीब 12% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं कंपनी का राजस्व बढ़कर ₹24,236 करोड़ हो गया, जो सालाना आधार पर लगभग 9.8% अधिक था।
📈 निवेशकों की नजर किन बातों पर?
- Q1FY27 नतीजे
- अंतरिम डिविडेंड का फैसला
- भविष्य का कारोबारी अनुमान
- AI का प्रभाव
- वैश्विक आर्थिक स्थिति
- शेयर में रिकवरी की संभावना
विप्रो के राजस्व और ग्रोथ पर दबाव
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में विप्रो ने ₹13,197 करोड़ से अधिक का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जबकि कुल राजस्व बढ़कर ₹92,624 करोड़ पहुंच गया। हालांकि कंपनी ने पहली तिमाही के लिए पहले ही संकेत दिया था कि स्थिर मुद्रा (Constant Currency) के आधार पर राजस्व में कोई खास बढ़ोतरी नहीं होगी और इसमें 2% तक की गिरावट भी आ सकती है। कंपनी के अनुसार, एक बड़े ग्राहक के प्रोजेक्ट में देरी और बैंकिंग क्षेत्र के एक प्रमुख ग्राहक से धीमी वृद्धि इसकी प्रमुख वजहें हैं।
विप्रो शेयर में लगातार गिरावट क्यों?
इस साल विप्रो के शेयरों पर लगातार दबाव बना हुआ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बनी चिंताओं के कारण निवेशकों का रुख कमजोर रहा है। बीच-बीच में शेयर में रिकवरी देखने को मिली, लेकिन हर बार ऊंचे स्तर पर बिकवाली बढ़ गई।
साल 2026 में अब तक wipro का शेयर करीब 34% तक गिर चुका है और इसका बाजार पूंजीकरण भी ₹2 लाख करोड़ से नीचे आ गया है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब 16 जुलाई को आने वाले तिमाही नतीजों, कंपनी के भविष्य के अनुमान और अंतरिम डिविडेंड के फैसले पर रहेगी। यदि कंपनी उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करती है या मजबूत कारोबारी संकेत देती है, तो शेयर में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। निवेश से पहले अपनी वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।

