भारत में 2027 से कार सुरक्षा नियम सख्त: नए क्रैश टेस्ट और EDR की पूरी जानकारी

भारत में कार सुरक्षा से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव अधिसूचित किए गए हैं, जिनका चरणबद्ध कार्यान्वयन अक्टूबर 2027 से शुरू होकर अक्टूबर 2032 तक चलेगा। इन बदलावों का उद्देश्य टक्कर के दौरान यात्रियों की सुरक्षा बेहतर करना, इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी से जुड़े जोखिमों की जांच करना और पैदल यात्रियों की सुरक्षा के परीक्षणों को मजबूत करना है। अलग-अलग नियमों की तारीखें अलग हैं, इसलिए सभी बदलाव एक ही दिन लागू होंगे, ऐसा समझना सही नहीं होगा।

क्रैश टेस्ट में क्या बदलेगा?

नए प्रावधानों में फ्रंटल और साइड-इम्पैक्ट परीक्षणों की शर्तों को अपडेट किया गया है। फ्रंटल क्रैश टेस्ट में शामिल वाहन वजन की ऊपरी सीमा बढ़ाई गई है, जिससे कुछ भारी यात्री वाहनों को भी दायरे में लाया जा सकेगा। कुछ परीक्षणों में छाती पर पड़ने वाले दबाव की स्वीकार्य सीमा भी अधिक सख्त की गई है। इसका अर्थ है कि वाहन निर्माताओं को डिजाइन, सीट बेल्ट और अन्य सुरक्षा प्रणालियों को लागू मानकों के अनुरूप रखना होगा।

साइड-इम्पैक्ट परीक्षणों में ऊंची सीटिंग पोजिशन वाले कुछ वाहनों को पहले मिलने वाली छूट हटाई जा रही है। यह SUV और ऊंचे बॉडी डिजाइन वाले वाहनों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि बाजार में मौजूद हर SUV असुरक्षित है; नए मानकों के तहत मॉडल की अनुपालना और लागू समय-सीमा अलग से देखी जाएगी। खरीदारों को वाहन की प्रमाणित सुरक्षा जानकारी और उपलब्ध क्रैश टेस्ट परिणामों पर ध्यान देना चाहिए।

इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी पर अतिरिक्त जांच

इलेक्ट्रिक वाहनों में टक्कर के बाद बैटरी का सुरक्षित रहना एक महत्वपूर्ण विषय है। अपडेटेड परीक्षणों में बैटरी की अपनी जगह पर बने रहने, इलेक्ट्रोलाइट के रिसाव और आग या विस्फोट के जोखिम से जुड़े पहलुओं पर अधिक ध्यान दिया गया है। कुछ परीक्षणों में रिसाव की जांच की अवधि बढ़ाई गई है। इसका उद्देश्य दुर्घटना के बाद संभावित खतरे पहचानना है, न कि यह दावा करना कि किसी EV में जोखिम पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

इलेक्ट्रिक कार खरीदने वाले ग्राहक बैटरी वारंटी, अधिकृत सर्विस, दुर्घटना के बाद निरीक्षण और चार्जिंग सुरक्षा की जानकारी भी देखें। बैटरी की क्षमता या रेंज अकेले सुरक्षा का पूरा माप नहीं है। वाहन की मरम्मत केवल प्रशिक्षित तकनीशियन और उपयुक्त उपकरणों वाले केंद्र से कराना महत्वपूर्ण है।

इम्मोबिलाइजर और पैदल यात्री सुरक्षा

नियमों के तहत M1 श्रेणी की यात्री कारों में 1 अक्टूबर 2027 से इम्मोबिलाइजर अनिवार्य करने का प्रावधान बताया गया है। इम्मोबिलाइजर ऐसा सिस्टम है जो सही चाबी या अधिकृत पहचान के बिना इंजन शुरू होने से रोकता है। इससे वाहन चोरी को कठिन बनाने में मदद मिल सकती है। कार खरीदते समय इस सुविधा की उपलब्धता और वाहन की सुरक्षा प्रणाली की जानकारी अधिकृत डीलर से लें।

पैदल यात्री सुरक्षा मानकों में भी अधिक वजन वाले वाहनों को शामिल करने और पैर पर लगने वाली चोट के परीक्षण के लिए बेहतर प्रतिनिधित्व वाले उपकरण का इस्तेमाल करने की बात है। इससे वाहन के अगले हिस्से के डिजाइन और दुर्घटना में पैदल चलने वाले व्यक्ति पर संभावित प्रभाव की जांच अधिक व्यवस्थित हो सकती है। सड़क सुरक्षा में वाहन डिजाइन के साथ गति नियंत्रण, सड़क की गुणवत्ता और ड्राइवर का व्यवहार भी उतने ही जरूरी हैं।

Event Data Recorder यानी EDR क्या करेगा?

Event Data Recorder दुर्घटना से ठीक पहले और उसके आसपास वाहन से जुड़ी निर्धारित जानकारी रिकॉर्ड करने वाला उपकरण होता है। इसमें नियमों के अनुसार गति, ब्रेक लगाने और कुछ अन्य वाहन स्थितियों से जुड़ा डेटा शामिल हो सकता है। नए मानक रिकॉर्ड किए जाने वाले डेटा, उसकी सुरक्षा, बिजली बंद होने पर व्यवहार और दुर्घटना में डिवाइस के टिके रहने जैसे पहलुओं को निर्धारित करते हैं। यह ब्लैक बॉक्स जैसा रिकॉर्डर है, लेकिन इसे हर स्थिति में दुर्घटना का पूरा कारण बताने वाला उपकरण नहीं मानना चाहिए।

EDR की जानकारी तक पहुंच और उसके उपयोग पर लागू नियम महत्वपूर्ण होंगे। वाहन मालिक को यह समझना चाहिए कि डेटा रिकॉर्डिंग, गोपनीयता और जांच प्रक्रिया संबंधित मानकों के अनुसार संचालित होगी। किसी भी तकनीकी फीचर का सही लाभ तभी मिलता है जब उसका इस्तेमाल स्पष्ट नियमों और जिम्मेदार प्रक्रिया के तहत हो।

कार खरीदारों को अभी क्या करना चाहिए?

नए नियमों के कारण तुरंत अपनी मौजूदा कार बदलने की जरूरत मान लेना सही नहीं है। नियम नए और मौजूदा मॉडलों पर अलग-अलग तारीखों से लागू हो सकते हैं। अगर आप नई कार खरीद रहे हैं, तो एयरबैग, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल, सीट बेल्ट रिमाइंडर, ISOFIX माउंट, क्रैश टेस्ट रेटिंग और ADAS जैसी सुविधाओं की जांच करें। केवल फीचर की संख्या के बजाय यह समझें कि वे आपके वास्तविक इस्तेमाल में कितनी मदद करेंगी।

नियमों की सटीक तारीख और तकनीकी शर्तों के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की अधिसूचना या वाहन निर्माता की आधिकारिक जानकारी देखें। नीचे दिया गया समाचार स्रोत नियमों का सार देता है; अंतिम कानूनी स्थिति के लिए आधिकारिक अधिसूचना को प्राथमिकता दें।

स्रोत: V3Cars की रिपोर्ट

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. भारत में नए कार सुरक्षा नियम कब से लागू होंगे?

नियमों का कार्यान्वयन चरणों में होगा। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार कुछ बदलाव अक्टूबर 2027 से शुरू होंगे और अलग-अलग प्रावधानों की समय-सीमा अक्टूबर 2032 तक जा सकती है। हर नियम की तारीख अलग से जांचें।

2. क्या नए नियमों से सभी कारों की कीमत बढ़ जाएगी?

इसका असर वाहन के डिजाइन, उपकरण और निर्माता की अनुपालना लागत पर निर्भर करेगा। सभी मॉडल की कीमत कितनी बदलेगी, इसका एक समान आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। कंपनी की आधिकारिक कीमत और फीचर सूची देखें।

3. EDR कार में क्या रिकॉर्ड करता है?

Event Data Recorder नियमों के अनुसार दुर्घटना के आसपास वाहन से जुड़ी कुछ जानकारी, जैसे गति या ब्रेकिंग डेटा, रिकॉर्ड कर सकता है। यह अपने आप हर दुर्घटना का पूरा कारण तय नहीं करता।

4. क्या इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी के लिए नए परीक्षण होंगे?

हाँ, अपडेटेड प्रावधानों में टक्कर के बाद बैटरी के सुरक्षित बने रहने, रिसाव और आग या विस्फोट के जोखिम से जुड़े परीक्षण शामिल हैं। संबंधित मानक और लागू तारीख मॉडल श्रेणी के अनुसार देखें।

5. नई कार खरीदते समय कौन-सी सुरक्षा जानकारी देखनी चाहिए?

क्रैश टेस्ट परिणाम, एयरबैग, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल, सीट बेल्ट रिमाइंडर, बच्चों की सीट के माउंट और सुरक्षा सुविधाओं की वेरिएंट-वार सूची देखें। फीचर की मौजूदगी की पुष्टि लिखित दस्तावेज से करें।

निष्कर्ष: नए सुरक्षा मानक क्रैश परीक्षण, EV बैटरी सुरक्षा, इम्मोबिलाइजर और दुर्घटना डेटा रिकॉर्डिंग को मजबूत करने की दिशा में हैं। खरीदारों को लागू तारीखों और आधिकारिक मानकों की पुष्टि कर सुरक्षा सुविधाओं के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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