जून 2026 में भारत ने कच्चे तेल के आयात का नया रिकॉर्ड बनाया। रूस से रिकॉर्ड खरीद, विविध आयात रणनीति और मजबूत वैश्विक आपूर्ति के कारण देश की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूती मिली है।
India Crude Oil Imports June 2026: जून में भारत ने रिकॉर्ड 49.3 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया, रूस बना सबसे बड़ा सप्लायर भारत ने जून 2026 में कच्चे तेल (Crude Oil) के आयात का नया रिकॉर्ड बनाया है।
India Crude Oil Imports June 2026: रिकॉर्ड आयात, रूस बना सबसे बड़ा सप्लायर
कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म Kpler के आंकड़ों के अनुसार, देश ने जून के दौरान औसतन 49.3 लाख बैरल प्रतिदिन (4.93 Million Barrels Per Day) कच्चे तेल का आयात किया, जो इस महीने के लिए अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह रूस से रिकॉर्ड स्तर पर हुई खरीद रही, क्योंकि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय रिफाइनरियों ने सस्ती और उपलब्ध आपूर्ति का फायदा उठाया।
जून में भारत ने रूस से 26 लाख बैरल प्रतिदिन (2.6 Million Barrels Per Day) कच्चा तेल खरीदा, जो मई के 19 लाख बैरल प्रतिदिन की तुलना में करीब 37 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिफाइनरियों ने अलग-अलग देशों से तेल खरीदने की रणनीति अपनाकर न केवल आपूर्ति को सुरक्षित रखा, बल्कि लागत को भी नियंत्रित करने में सफलता हासिल की।
🛢️ जून 2026 Crude Oil Import: प्रमुख आंकड़े
- कुल आयात: 49.3 लाख बैरल प्रतिदिन
- रिकॉर्ड स्तर: जून महीने का अब तक का सबसे ऊंचा आयात
- रूस से आयात: 26 लाख बैरल प्रतिदिन
- मई की तुलना में वृद्धि: लगभग 37%
- मुख्य कारण: सस्ती और उपलब्ध रूसी आपूर्ति
- लाभ: ऊर्जा सुरक्षा और लागत नियंत्रण
रूस से रिकॉर्ड खरीद और ऊर्जा सुरक्षा
उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भारत के पास अगस्त 2026 तक कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के दोबारा खुलने के बाद खाड़ी देशों से ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने लगी है, जिससे घरेलू बाजार में किसी तरह की कमी की आशंका फिलहाल नहीं है। चूंकि रिफाइनरियां आमतौर पर एक से दो महीने पहले ही तेल की खरीद तय कर लेती हैं, इसलिए अगस्त तक की जरूरतों के लिए पर्याप्त व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में भी वैश्विक तेल आपूर्ति मजबूत बनी रह सकती है। अफ्रीका, रूस, वेनेजुएला और अन्य उत्पादक देशों से निर्यात बढ़ने, OPEC+ द्वारा उत्पादन में इजाफा करने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से लगातार तेल आपूर्ति जारी रहने के कारण बाजार में पर्याप्त विकल्प उपलब्ध हैं। हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट भी इस बात का संकेत है कि फिलहाल वैश्विक बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता कम हुई है, हालांकि भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।
🌍 भारत की तेल आयात रणनीति
- प्रमुख सप्लायर: रूस
- अन्य स्रोत: अमेरिका, ब्राजील, वेनेजुएला, ओमान, अंगोला
- रणनीति: आयात स्रोतों में विविधता
- वैश्विक समर्थन: OPEC+ उत्पादन वृद्धि
- आपूर्ति: अगस्त 2026 तक पर्याप्त व्यवस्था
- उद्देश्य: ऊर्जा सुरक्षा और स्थिर आपूर्ति
विविध आयात रणनीति से बढ़ी मजबूती
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाई है। अब देश रूस के अलावा अमेरिका, ब्राजील, वेनेजुएला, ओमान, अंगोला, पश्चिम अफ्रीकी देशों और दक्षिण अमेरिकी उत्पादकों से भी बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है। इस रणनीति का उद्देश्य किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम करना और वैश्विक संकट के दौरान भी ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना है।
हालांकि, ईरान से कच्चे तेल के आयात में फिलहाल बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जुलाई या अगस्त में कुछ सीमित खेप आती भी है, तो वह केवल अवसर आधारित खरीद होगी। इसके अलावा, ईरान से जुड़े मौजूदा प्रतिबंधों में मिलने वाली छूट अगस्त के तीसरे सप्ताह तक ही प्रभावी है, इसलिए किसी बड़े स्तर पर आयात बढ़ाने का फैसला भविष्य की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
आगे कैसी रहेगी कच्चे तेल की स्थिति?
कुल मिलाकर, भारत का कच्चे तेल का आयात पोर्टफोलियो पहले की तुलना में अधिक संतुलित और विविध हो गया है। जब तक वैश्विक आपूर्ति में कोई बड़ा व्यवधान नहीं आता, तब तक भारतीय रिफाइनरियां देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और बेहतर कीमतों पर तेल खरीदने की स्थिति में बनी रहेंगी।
Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों और बाजार आंकड़ों पर आधारित है। ऊर्जा बाजार की स्थिति समय के साथ बदल सकती है।

