आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। ऐसे में भारत और फ्रांस बड़े टेक निवेश आकर्षित करने के लिए शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर सक्रिय कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं।
artifical Intelligence (AI) के क्षेत्र में दुनिया भर में तेजी से प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। इसी बीच भारत और फ्रांस बड़े वैश्विक टेक निवेश आकर्षित करने के लिए अपने शीर्ष नेतृत्व का सक्रिय उपयोग कर रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron लगातार दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियों के प्रमुखों से मुलाकात कर रहे हैं, ताकि उनके देशों में AI डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य तकनीकी परियोजनाओं में बड़े निवेश आएं।
भारत और फ्रांस की AI निवेश रणनीति
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेज़न के सीईओ एंडी जैसी से मुलाकात की। इस दौरान अमेज़न ने भारत में 48 अरब डॉलर के निवेश की अपनी योजना दोहराई, जिसमें 21 अरब डॉलर AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किए जाएंगे। पिछले एक वर्ष में मोदी ने माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन एवं सीईओ सत्य नडेला, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई और इंटेल के सीईओ लिप-बू टैन से भी मुलाकात की है। इन कंपनियों ने भारत में AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में सहयोग की इच्छा जताई है।
दूसरी ओर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी AI निवेश को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय पहल की है। उन्होंने जापान की SoftBank के संस्थापक और सीईओ मासायोशी सोन से कई दौर की बातचीत की, जिसके बाद कंपनी ने फ्रांस में 2031 तक 3.1 गीगावाट क्षमता वाले AI डेटा सेंटर विकसित करने की घोषणा की। यह परियोजना 75 अरब यूरो के बड़े AI इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यक्रम का हिस्सा है। बताया गया कि मैक्रों ने फ्रांस की पर्याप्त बिजली उपलब्धता और सरकारी सहयोग का भरोसा देकर इस निवेश को आकर्षक बनाया।
🤖 भारत और फ्रांस के प्रमुख AI निवेश
- भारत: Amazon का 48 अरब डॉलर निवेश
- AI एवं क्लाउड: 21 अरब डॉलर
- फ्रांस: SoftBank का AI डेटा सेंटर
- क्षमता: 3.1 गीगावाट
- कार्यक्रम: 75 अरब यूरो AI इंफ्रास्ट्रक्चर योजना
भारत में AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
भारत सरकार भी AI क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ने के लिए कई कदम उठा रही है। इस साल आयोजित ग्लोबल AI समिट में प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों से भारत में निवेश बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत AI को डर नहीं बल्कि भविष्य और अवसर के रूप में देखता है और कंपनियों से “डिजाइन एंड डेवलप इन India” का आह्वान किया।
सरकार AI डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर निर्माण में निवेश बढ़ाने के लिए टैक्स प्रोत्साहन भी दे रही है। इसके अलावा, भारत घरेलू सेमीकंडक्टर उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी काम कर रहा है ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके। इसी दिशा में नीदरलैंड की कंपनी ASML टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की सेमीकंडक्टर फैक्ट्री के लिए उन्नत लिथोग्राफी सिस्टम उपलब्ध कराएगी, जबकि इंटेल ने भविष्य में वहां बनने वाली चिप्स का संभावित ग्राहक बनने में रुचि दिखाई है।
📊 भारत की AI रणनीति की मुख्य बातें
- फोकस: AI डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर
- प्रोत्साहन: टैक्स इंसेंटिव
- सेमीकंडक्टर: घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर
- साझेदारी: वैश्विक टेक कंपनियों के साथ सहयोग
- लक्ष्य: AI और चिप निर्माण में आत्मनिर्भरता
आत्मनिर्भर AI इकोसिस्टम की दिशा में प्रयास
हालांकि भारत ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और AI निवेश के क्षेत्र में अच्छी प्रगति की है, लेकिन अभी भी अत्याधुनिक AI मॉडल और उन्नत चिप तकनीक के लिए उसे विदेशी कंपनियों पर काफी हद तक निर्भर रहना पड़ता है। इसलिए सरकार का लक्ष्य वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी बढ़ाकर देश को AI और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाना है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी निवेश या व्यावसायिक निर्णय से पहले आधिकारिक जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

