भारत में सोना खरीदने का एक बड़ा हिस्सा गहनों के बजाय बार और सिक्कों के रूप में भी आता है। विश्व गोल्ड काउंसिल की 3 नवंबर 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार जुलाई से सितंबर के दौरान भारत में बार और सिक्कों की मांग 55 टन रही। यह जून तिमाही के 50.3 टन से 9 प्रतिशत अधिक है, लेकिन पिछले साल की तीसरी तिमाही के 91.6 टन से करीब 40 प्रतिशत कम है। मात्रा में गिरावट के बावजूद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बना रहा और वैश्विक मांग में इसकी हिस्सेदारी लगभग 21 प्रतिशत रही।
भारत की मांग में सालाना गिरावट क्यों आई?
पिछले साल की तीसरी तिमाही में खरीद काफी मजबूत थी। इसलिए इस साल उसी अवधि से तुलना करने पर गिरावट बड़ी दिखाई देती है। इसके अलावा सोने की ऊंची कीमतों ने छोटे निवेशकों की खरीद क्षमता को प्रभावित किया। मई 2026 में आयात शुल्क बढ़ने से भी घरेलू बाजार में सोना खरीदने की लागत पर असर पड़ा। जब कीमत और कर दोनों ऊंचे हों, तो कुछ ग्राहक खरीद टाल देते हैं या कम मात्रा लेते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार तीसरी तिमाही में बार और सिक्कों पर भारतीय ग्राहकों का खर्च 818.9 अरब रुपये रहा। यह पिछले साल की समान अवधि के 937.4 अरब रुपये से कम है। हालांकि जनवरी से सितंबर की अवधि में इस मद पर कुल खर्च 2,517.7 अरब रुपये रहा, जो पिछले साल से 43 प्रतिशत अधिक था। इससे पता चलता है कि सोने की कीमत बढ़ने पर कम मात्रा खरीदने के बावजूद कुल खर्च ऊंचा रह सकता है।
चीन के बाद भारत की मजबूत जगह
वैश्विक बाजार में चीन पहले स्थान पर रहा, जबकि भारत दूसरे स्थान पर रहा। तीसरी तिमाही में भारत की 55 टन मांग ने इसे दुनिया के प्रमुख निवेश बाजारों में बनाए रखा। भारतीय परिवारों में सोने के सिक्के और बार लंबे समय से बचत का एक तरीका रहे हैं। कुछ लोग इन्हें शादी, त्योहार या भविष्य की जरूरतों के लिए खरीदते हैं। यह मांग केवल कीमत से नहीं, बल्कि परिवारों की बचत की आदतों से भी जुड़ी है।
हालांकि निवेश के लिए सोना खरीदने से पहले यह समझना जरूरी है कि बार और सिक्के से नियमित ब्याज या किराया नहीं मिलता। लाभ तभी होगा जब भविष्य में बिक्री मूल्य कुल खरीद लागत से अधिक हो। खरीदते समय शुद्धता, बिल, वजन और वापस बेचने की शर्तें जांचना जरूरी है।
🪙 भारत में बार और सिक्कों की मांग
- तीसरी तिमाही: 55 टन
- पिछली तिमाही: 50.3 टन
- सालाना बदलाव: 40 प्रतिशत की गिरावट
- वैश्विक हिस्सेदारी: करीब 21 प्रतिशत
- कुल खर्च: 818.9 अरब रुपये
खरीदारों के लिए क्या मायने हैं ये आंकड़े?
ये आंकड़े बताते हैं कि ऊंची कीमतों के कारण ग्राहक खरीद की मात्रा घटा सकते हैं, लेकिन सोने में रुचि पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। तिमाही आधार पर मांग बढ़ना बाजार में कुछ सुधार का संकेत देता है। त्योहार और शादी का मौसम आने पर खरीद में और बदलाव हो सकता है, लेकिन यह तय नहीं है कि कीमतें किस दिशा में जाएंगी। ग्राहक को किसी एक अनुमान के आधार पर खरीद का फैसला नहीं करना चाहिए।
बार या सिक्का खरीदते समय अधिकृत विक्रेता से बिल लें। पैकिंग, शुद्धता और वजन की जानकारी सुरक्षित रखें। यदि सिक्का लंबे समय तक रखना है तो उसे खरोंच और नमी से बचाने के लिए उपयुक्त कैप्सूल या डिब्बे का उपयोग किया जा सकता है। सोने के सिक्कों के सुरक्षा कैप्सूल यहां देखें।
सोने की खरीद में केवल बाजार भाव देखना काफी नहीं है। विक्रेता का प्रीमियम, जीएसटी, बिक्री के समय मिलने वाला भाव और दोबारा खरीद की नीति भी कुल रिटर्न बदल सकती है। ग्राहक को अलग-अलग विक्रेताओं की शर्तों की तुलना करनी चाहिए।
निवेश और आभूषण खरीद में अंतर
गहनों में डिजाइन और बनाने का खर्च शामिल रहता है, जबकि बार और सिक्के आमतौर पर शुद्धता और वजन के आधार पर खरीदे जाते हैं। लेकिन दोनों में सोने की कीमत का जोखिम रहता है। यदि परिवार को गहने पहनने के लिए चाहिए, तो केवल निवेश लाभ के आधार पर फैसला नहीं करना चाहिए। यदि उद्देश्य बचत है, तो कुल लागत और बेचने की सुविधा पर ध्यान देना चाहिए।
आधिकारिक आंकड़े विश्व गोल्ड काउंसिल की भारत रिपोर्ट में उपलब्ध हैं। रिपोर्ट में मांग, खर्च और अलग-अलग निवेश माध्यमों का विवरण दिया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. भारत में तीसरी तिमाही में कितने सोने के बार और सिक्के खरीदे गए?
विश्व गोल्ड काउंसिल के अनुसार जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान भारत में बार और सिक्कों की मांग 55 टन रही। यह जून तिमाही के 50.3 टन से अधिक, लेकिन पिछले साल से 40 प्रतिशत कम थी।
2. भारत वैश्विक बाजार में किस स्थान पर रहा?
तीसरी तिमाही में चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बार और सिक्का बाजार रहा। वैश्विक मांग में भारत की हिस्सेदारी करीब 21 प्रतिशत बताई गई। इससे घरेलू निवेशकों की भूमिका का पता चलता है।
3. बार और सिक्कों की मांग में गिरावट क्यों आई?
ऊंची कीमतों, पिछले साल की मजबूत खरीद और आयात शुल्क में बढ़ोतरी ने मांग पर असर डाला। जब सोना महंगा होता है, तो कुछ ग्राहक खरीद टालते हैं या पहले की तुलना में कम वजन लेते हैं।
4. क्या सोने के सिक्के निवेश के लिए अच्छे हैं?
सिक्के सोने में बचत का एक तरीका हो सकते हैं, लेकिन इनमें कीमत घटने और खरीद-बिक्री के अंतर का जोखिम रहता है। शुद्धता, बिल, विक्रेता और वापस बेचने की शर्तें जांचकर ही खरीदना चाहिए।
5. सोने के सिक्के खरीदते समय क्या सावधानी रखें?
अधिकृत विक्रेता चुनें, वजन और शुद्धता की पुष्टि करें, पक्का बिल लें और पैकिंग सुरक्षित रखें। खरीदने से पहले प्रीमियम, कर और वापस खरीद की नीति समझना भी जरूरी है।
निष्कर्ष
भारत बार और सिक्कों के बाजार में दुनिया के प्रमुख देशों में बना हुआ है। तिमाही मांग में सुधार दिखा, लेकिन सालाना गिरावट भी महत्वपूर्ण है। खरीदारी से पहले कुल लागत, शुद्धता और भविष्य में बिक्री की सुविधा समझना जरूरी है।
अस्वीकरण: यह लेख जानकारी के लिए है, निवेश सलाह नहीं। सोना खरीदने से पहले कीमत, शुल्क और जोखिम जांचें।
