जुलाई में भारत के निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों की रफ्तार धीमी रही। हालांकि विनिर्माण और निर्यात से कुछ राहत मिली, लेकिन सेवा क्षेत्र और बढ़ती लागत ने कारोबार पर दबाव बनाए रखा।
जुलाई महीने में भारत के private sector की कारोबारी गतिविधियों की रफ्तार चार साल से भी अधिक समय के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। इसका मुख्य कारण सेवा क्षेत्र की धीमी होती गतिविधियां रहीं। हालांकि विनिर्माण क्षेत्र ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया, निर्यात मांग मजबूत बनी रही और कई उद्योगों में उत्पादन जारी रहा। एचएसबीसी की ताजा PMI रिपोर्ट से यह संकेत मिला है कि कारोबारी गतिविधियों की गति पहले की तुलना में कमजोर हुई है।
जुलाई में कारोबारी गतिविधियों की रफ्तार क्यों घटी
रिपोर्ट के अनुसार जुलाई में समग्र कारोबारी सूचकांक जून के मुकाबले नीचे आया। यह अभी भी 50 के स्तर से ऊपर है, जिसका मतलब है कि कारोबार में विस्तार जारी है, लेकिन इसकी रफ्तार पहले जैसी नहीं रही। इससे साफ है कि नए वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही की शुरुआत धीमी रही और कई क्षेत्रों में कारोबार की गति कम हुई।
सेवा क्षेत्र में सबसे अधिक असर देखने को मिला। इस क्षेत्र की गतिविधियां कई महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं। कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि बाजार की कठिन परिस्थितियां, बढ़ती प्रतिस्पर्धा, ग्राहकों की कम पूछताछ, ऑर्डर रद्द होना और जरूरी कच्चे माल की कमी जैसी वजहों से कारोबार प्रभावित हुआ है।
जुलाई PMI रिपोर्ट की मुख्य बातें
- मुख्य कारण: सेवा क्षेत्र की सुस्ती
- PMI स्थिति: 50 से ऊपर, लेकिन रफ्तार धीमी
- विनिर्माण: उत्पादन में बढ़ोतरी जारी
- निर्यात: विदेशी मांग मजबूत रही
- कारोबार: दूसरी तिमाही की शुरुआत धीमी
- फोकस: लागत और मांग पर नजर
विनिर्माण और निर्यात से मिली राहत
दूसरी ओर विनिर्माण क्षेत्र की स्थिति मिश्रित रही। कुल मिलाकर इस क्षेत्र में सुधार की गति थोड़ी धीमी हुई, लेकिन उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसका मतलब है कि फैक्ट्रियों में कामकाज जारी रहा, हालांकि नए ऑर्डर मिलने की रफ्तार पहले की तुलना में कुछ कमजोर रही।
घरेलू मांग में नरमी के कारण नए कारोबार की वृद्धि सीमित रही, लेकिन विदेशी बाजारों से अच्छी मांग मिली। खासकर सामान बनाने वाली कंपनियों को निर्यात के नए ऑर्डर अधिक मिले। कुल मिलाकर export से होने वाली बिक्री कई वर्षों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई, जिससे उद्योगों को कुछ राहत मिली।
आगे किन संकेतों पर रहेगी नजर
- महंगाई: लागत का दबाव जारी
- रोजगार: नई भर्तियां लगातार
- निर्यात: विदेशी मांग मजबूत
- इन्वेंटरी: कच्चे माल का भंडार बढ़ा
- उद्योग: भविष्य की तैयारी जारी
- बाजार: मांग में सुधार की उम्मीद
महंगाई, रोजगार और कारोबारी भरोसा
रिपोर्ट में महंगाई के दबाव बढ़ने की भी जानकारी दी गई है। ईंधन, मजदूरी, कच्चे माल और परिवहन की लागत बढ़ने से कंपनियों का खर्च बढ़ गया। इस अतिरिक्त बोझ को कम करने के लिए कई कंपनियों ने अपने उत्पादों और सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी की, ताकि मुनाफे पर अधिक असर न पड़े।
रोजगार के मोर्चे पर लगातार सातवें महीने नई भर्तियां देखने को मिलीं। हालांकि नियुक्तियों की गति बहुत तेज नहीं रही, लेकिन सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने विनिर्माण क्षेत्र की तुलना में अधिक लोगों को काम पर रखा। इसके बावजूद कुछ क्षेत्रों में अतिरिक्त क्षमता के संकेत भी मिले, क्योंकि लंबित काम में कमी दर्ज की गई।
जुलाई के दौरान कारोबारी भरोसा भी कमजोर हुआ और यह पिछले छह महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। विनिर्माण क्षेत्र में भविष्य को लेकर उम्मीदें बेहतर रहीं, जबकि सेवा क्षेत्र की कंपनियों का भरोसा कुछ कम हुआ। फिर भी अधिकांश कारोबारियों को अगले 12 महीनों में बाजार की स्थिति बेहतर होने और मांग बढ़ने की उम्मीद है।
लागत और आपूर्ति से जुड़े जोखिम
कई कंपनियों ने संभावित आपूर्ति बाधाओं को देखते हुए कच्चे माल की खरीद बढ़ाई और अपने inventory में भी इजाफा किया। तैयार माल का भंडार भी बढ़ाया गया ताकि भविष्य में किसी तरह की दिक्कत आने पर उत्पादन प्रभावित न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए कंपनियां पहले से तैयारी कर रही हैं, जिससे आपूर्ति से जुड़े जोखिम कम किए जा सकें। साथ ही उनका कहना है कि उत्पादन और निर्यात में सुधार के बावजूद लागत का दबाव बना हुआ है और कंपनियां अपने inflation से जुड़े जोखिमों को संभालने की कोशिश कर रही हैं।
Disclaimer: यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है। किसी भी आर्थिक निर्णय से पहले आधिकारिक स्रोतों की पुष्टि अवश्य करें।
