भारत में हवाई यात्रा के प्रदूषण को कम करने और घरेलू हरित ईंधन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए विमानन मंत्रालय ने नई नीति का मसौदा तैयार किया है। 5 नवंबर 2026 को सामने आई जानकारी के अनुसार अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में पारंपरिक विमान ईंधन के साथ शुरुआत में 1 प्रतिशत हरित ईंधन मिलाने का प्रस्ताव है। यह लक्ष्य 2027 से लागू करने की तैयारी है और आगे इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जा सकता है। अभी यह मसौदा है, अंतिम नियम नहीं।
सरकार की नई नीति में क्या प्रस्ताव रखा गया है?
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने राष्ट्रीय विमानन ईंधन नीति का मसौदा तैयार किया है। इसमें अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए विमान ईंधन में हरित ईंधन मिलाने की अनिवार्यता का सुझाव दिया गया है। पहले चरण में 2027 में 1 प्रतिशत, 2028 में 2 प्रतिशत, 2029 में 3 प्रतिशत और 2030 में 5 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य रखा गया है। 2031 से 2040 के बीच लक्ष्य बढ़ाने की बात भी है, लेकिन 2030 के बाद के कई लक्ष्य अभी संकेतात्मक हैं और उन्हें अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।
मसौदे में घरेलू स्तर पर बने ईंधन को प्राथमिकता दी गई है। इसका मतलब है कि विमान ईंधन आपूर्तिकर्ताओं को निर्धारित मात्रा में देश में तैयार हरित ईंधन मिलाकर हवाई अड्डों तक पहुंचाना होगा। सरकार का उद्देश्य केवल उत्सर्जन घटाना नहीं, बल्कि भारत में उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण और आपूर्ति की पूरी व्यवस्था तैयार करना भी है।
✈️ हरित विमान ईंधन के प्रस्तावित लक्ष्य
- 2027: 1 प्रतिशत मिश्रण
- 2028: 2 प्रतिशत मिश्रण
- 2029: 3 प्रतिशत मिश्रण
- 2030: 5 प्रतिशत मिश्रण
- 2040: 20 प्रतिशत तक का प्रस्तावित लक्ष्य, आगे की समीक्षा के अधीन
हरित विमान ईंधन क्या होता है?
Sustainable Aviation Fuel ऐसा विमान ईंधन है जिसे पेट्रोलियम के अलावा दूसरे स्रोतों से बनाया जा सकता है। इसके लिए खेती के बचे हुए अवशेष, इस्तेमाल किया हुआ खाना पकाने का तेल, नगरों का जैविक कचरा, कुछ औद्योगिक अपशिष्ट और अन्य नवीकरणीय स्रोत इस्तेमाल किए जा सकते हैं। कुछ तकनीकों में हरित हाइड्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड की मदद से भी ईंधन तैयार किया जा सकता है।
इस ईंधन को पारंपरिक विमान ईंधन यानी ATF के साथ तय अनुपात में मिलाया जा सकता है। इसे मौजूदा विमानों और इंजनों के अनुकूल बनाया जाता है, इसलिए हरित ईंधन के उपयोग के लिए पूरी विमान व्यवस्था को बदलना जरूरी नहीं होता। हालांकि, ईंधन को निर्धारित गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर खरा उतरना होगा। केवल किसी जैविक पदार्थ से बना ईंधन विमान में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
भारत घरेलू उत्पादन पर जोर क्यों दे रहा है?
यदि विमान कंपनियों को हरित ईंधन मिलाना है, तो देश में पर्याप्त मात्रा में इसका उत्पादन भी होना चाहिए। भारत में कृषि अवशेष, इस्तेमाल किया हुआ खाना पकाने का तेल और नगरों से निकलने वाला कचरा संभावित कच्चा माल बन सकते हैं। इन स्रोतों का सही संग्रह और प्रसंस्करण होने पर किसानों, कचरा प्रबंधन कंपनियों और ईंधन उद्योग को नए अवसर मिल सकते हैं।
सरकार का मसौदा घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की बात करता है। इससे आयात पर निर्भरता कम रखने और देश में नई औद्योगिक क्षमता विकसित करने में मदद मिल सकती है। रिफाइनरियों को मौजूदा संयंत्रों में बदलाव करने, अलग उत्पादन इकाइयां लगाने और गुणवत्ता जांच की सुविधा विकसित करने की जरूरत पड़ सकती है। हवाई अड्डों पर भंडारण और ईंधन पहुंचाने की व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी।
🏭 उत्पादन के लिए संभावित कच्चा माल
- कृषि: फसल कटाई के बाद बचने वाले अवशेष
- खाद्य कारोबार: इस्तेमाल किया हुआ खाना पकाने का तेल
- शहर: चुना हुआ नगर और जैविक कचरा
- उद्योग: कुछ औद्योगिक अपशिष्ट और पुनर्चक्रित सामग्री
- नई तकनीक: नवीकरणीय बिजली से बना हाइड्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड
विमान कंपनियों की लागत कितनी बढ़ सकती है?
मसौदे से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार हरित विमान ईंधन की कीमत सामान्य विमान ईंधन से लगभग दो से तीन गुना तक हो सकती है। इसलिए शुरुआती दौर में इसे मिलाने से ईंधन की कुल लागत बढ़ने की आशंका है। हालांकि, मिश्रण का शुरुआती अनुपात कम रखा गया है। इसका उद्देश्य उद्योग को उत्पादन बढ़ाने और आपूर्ति व्यवस्था तैयार करने का समय देना है।
विमान कंपनियों के लिए ईंधन सबसे बड़े संचालन खर्चों में से एक है। यदि मिश्रित ईंधन महंगा रहता है, तो उड़ान संचालन की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। कंपनियां इस अतिरिक्त खर्च को अपने मुनाफे से सहन करेंगी या टिकट कीमतों में कुछ हिस्सा जोड़ेंगी, यह बाजार की स्थिति और प्रतिस्पर्धा पर निर्भर करेगा। अभी यह कहना सही नहीं होगा कि सभी हवाई टिकट तुरंत महंगे हो जाएंगे।
सरकार के मसौदे में उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए कर में राहत, वित्तीय सहायता, हरित वित्त और रिफाइनरी में बदलाव के लिए मदद जैसे विकल्पों पर विचार किया गया है। इन उपायों की अंतिम मंजूरी अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के निर्णय पर निर्भर करेगी। यदि उत्पादन लागत कम होती है, तो समय के साथ विमान कंपनियों पर पड़ने वाला दबाव भी घट सकता है।
ईंधन आपूर्ति और हवाई अड्डों की जिम्मेदारी
नई व्यवस्था में तेल कंपनियों और ईंधन आपूर्तिकर्ताओं को तय मात्रा में मिश्रित ईंधन उपलब्ध कराना होगा। हवाई अड्डों को सुरक्षित भंडारण, अलग-अलग ईंधन की पहचान, गुणवत्ता जांच और विमान तक आपूर्ति के लिए जरूरी व्यवस्था करनी होगी। ईंधन के हर लेनदेन और उसके पर्यावरणीय लाभ का रिकॉर्ड रखने के लिए SAF Registry बनाने का प्रस्ताव है।
वैश्विक नियमों से भारत को क्या संबंध है?
अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन की CORSIA व्यवस्था का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय विमानन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करना है। भारत 2027 से इसके अनिवार्य चरण में शामिल होने की तैयारी कर रहा है। इस व्यवस्था में विमान कंपनियों को तय आधार स्तर से अधिक उत्सर्जन की भरपाई करनी पड़ सकती है। मान्य हरित ईंधन का उपयोग कुछ परिस्थितियों में इस जिम्मेदारी को कम करने में मदद कर सकता है।
इस पृष्ठभूमि और सरकारी कदमों की जानकारी पत्र सूचना कार्यालय की आधिकारिक विज्ञप्ति में देखी जा सकती है। नया मसौदा अंतिम रूप लेने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-से लक्ष्य अनिवार्य होंगे और किन उड़ानों पर लागू होंगे।
इस नीति से किन कारोबारों को अवसर मिल सकता है?
हरित विमान ईंधन की मांग बढ़ने पर कृषि अवशेष एकत्र करने वाली इकाइयों, इस्तेमाल किए हुए तेल को सुरक्षित तरीके से जमा करने वाली कंपनियों, कचरा प्रबंधन कारोबार, जैव ईंधन संयंत्रों और रिफाइनरी तकनीक से जुड़ी कंपनियों को अवसर मिल सकते हैं। ईंधन की जांच, प्रमाणन, भंडारण और परिवहन के लिए भी नई सेवाओं की जरूरत होगी। इससे छोटे और मध्यम कारोबारों को बड़ी आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने का अवसर मिल सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. भारत में विमान ईंधन में हरित ईंधन मिलाने का प्रस्ताव कब से है?
मसौदे के अनुसार अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 2027 से 1 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद 2028 में 2 प्रतिशत, 2029 में 3 प्रतिशत और 2030 में 5 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। अंतिम नियम सरकारी मंजूरी के बाद लागू होंगे।
2. क्या यह नियम घरेलू उड़ानों पर भी लागू होगा?
शुरुआती मसौदा मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए मिश्रण लक्ष्य रखता है। घरेलू उड़ानों और कुछ विशेष गैर-नियमित या आपातकालीन सेवाओं को शुरुआती चरण में छूट देने की बात है। अंतिम नीति में लागू उड़ानों और छूट की स्पष्ट सूची जारी की जाएगी।
3. क्या हरित विमान ईंधन से टिकट महंगे हो सकते हैं?
हरित ईंधन की उत्पादन लागत सामान्य विमान ईंधन से अधिक बताई गई है। इससे विमान कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है। टिकट पर इसका कितना असर होगा, यह ईंधन की कीमत, मिश्रण की मात्रा, सरकारी सहायता और विमान कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा पर निर्भर करेगा।
4. हरित विमान ईंधन किन चीजों से बनाया जा सकता है?
इसे कृषि अवशेष, इस्तेमाल किए हुए खाना पकाने के तेल, नगरों के जैविक कचरे और कुछ औद्योगिक अपशिष्ट से बनाया जा सकता है। कुछ नई तकनीकों में नवीकरणीय बिजली से बने हाइड्रोजन का भी उपयोग होता है। हर स्रोत को गुणवत्ता और स्थिरता मानकों पर खरा उतरना होगा।
5. क्या मौजूदा विमानों में इस ईंधन का उपयोग हो सकता है?
निर्धारित गुणवत्ता और मानकों के अनुसार तैयार मिश्रित ईंधन मौजूदा विमान इंजनों के अनुकूल बनाया जाता है। इसके लिए विमान बदलने की जरूरत नहीं होती, लेकिन ईंधन का सही अनुपात, प्रमाणन और सुरक्षित भंडारण जरूरी है। हर प्रकार का वैकल्पिक ईंधन सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
उपयोगी पुस्तक: विमानन के हरित ईंधन पर पुस्तक यहां देखें। इस लिंक से खरीदारी करने पर वेबसाइट को कमीशन मिल सकता है।
निष्कर्ष
हरित विमान ईंधन की प्रस्तावित नीति भारत के विमानन क्षेत्र को कम उत्सर्जन की दिशा में ले जा सकती है। घरेलू उत्पादन, उचित कीमत और सुरक्षित आपूर्ति इसकी सफलता तय करेंगे। अंतिम मंजूरी के बाद ही विमान कंपनियों पर लागू नियम स्पष्ट होंगे।
अस्वीकरण: यह लेख मसौदे और उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है। अंतिम नीति के लिए सरकारी अधिसूचना देखें।