भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) केवल टैरिफ कम करने या व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के भविष्य के व्यापार समझौतों के लिए एक नया मॉडल पेश कर सकता है। इस समझौते के लागू होने के बाद ज्यादातर चर्चा व्हिस्की, कारों और वीजा जैसे मुद्दों पर हो रही है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत श्रम अधिकार, पर्यावरण संरक्षण, लैंगिक समानता और भ्रष्टाचार रोकने जैसे विषयों को सीधे समझौते का हिस्सा बनाना है।
भारत-ब्रिटेन CETA में आर्थिक लाभ के साथ सामाजिक मुद्दों पर भी जोर
इस समझौते के तहत भारत के करीब 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क मुक्त पहुंच मिलेगी। ब्रिटेन से आने वाली स्कॉच व्हिस्की पर भी शुल्क में बड़ी कटौती की गई है। इसके अलावा भारतीय पेशेवरों के लिए हर साल 20 हजार तक ब्रिटिश सेवा वीजा का रास्ता आसान होगा। हालांकि, इस समझौते का असली महत्व इन आर्थिक लाभों से आगे जाता है।
पहली बार किसी भारतीय व्यापार समझौते में श्रम अधिकार, पर्यावरण सुरक्षा, लैंगिक समानता और भ्रष्टाचार विरोधी प्रावधानों को अलग-अलग अध्यायों के रूप में शामिल किया गया है। पहले ऐसे विषयों को अक्सर अलग घोषणाओं या साइड लेटर तक सीमित रखा जाता था, जिनकी निगरानी और जवाबदेही कम होती थी। अब इन्हें मुख्य समझौते का हिस्सा बनाया गया है, जिससे इन पर नियमित समीक्षा और चर्चा जरूरी होगी।
🌍 CETA की प्रमुख विशेषताएं
- समझौता: भारत-ब्रिटेन CETA
- टैरिफ लाभ: करीब 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क मुक्त पहुंच
- मुख्य विषय: श्रम, पर्यावरण, लैंगिक समानता और भ्रष्टाचार विरोध
- कुल अध्याय: 30
- उद्देश्य: व्यापार के साथ वैश्विक मानकों को बढ़ावा देना
पहली बार मुख्य समझौते में शामिल हुए नए प्रावधान
भारत-ब्रिटेन CETA में कुल 30 अध्याय हैं। इसमें श्रम से जुड़े प्रावधान अध्याय 20, पर्यावरण अध्याय 21, व्यापार और लैंगिक समानता अध्याय 23 तथा भ्रष्टाचार विरोधी उपाय अध्याय 26 में शामिल किए गए हैं। इन मुद्दों को केवल अलग दस्तावेज में रखने के बजाय मुख्य समझौते में शामिल करना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
भारत ने इस दिशा में धीरे-धीरे कदम बढ़ाए हैं। 2024 में यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के साथ हुए समझौते में भी श्रम, लैंगिक समानता और पर्यावरण को शामिल किया गया था। हालांकि ब्रिटेन के साथ हुए समझौते में इन विषयों को अलग-अलग अध्यायों में जगह दी गई है और भ्रष्टाचार विरोधी प्रावधान को पहली बार किसी भारतीय व्यापार समझौते में शामिल किया गया है।
हालांकि इन चारों अध्यायों को विवाद निपटान प्रक्रिया के तहत नहीं रखा गया है। इसका मतलब है कि इनके उल्लंघन पर सीधे जुर्माना या कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। लेकिन दोनों देशों को इन विषयों पर रिपोर्टिंग, कार्य समूहों और समीक्षा प्रक्रिया के जरिए जवाबदेही निभानी होगी। यानी ये प्रावधान कानूनी विवाद का आधार नहीं बनेंगे, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।
श्रम और पर्यावरण मानकों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता
श्रम अध्याय में भारत और ब्रिटेन ने अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के मानकों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है। दोनों देशों ने यह भी सहमति जताई है कि व्यापार बढ़ाने के लिए श्रम कानूनों को कमजोर नहीं किया जाएगा।
पर्यावरण अध्याय में दोनों देशों ने उच्च पर्यावरण मानकों को बनाए रखने की बात कही है। हालांकि कार्बन टैक्स जैसे मुद्दे अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। ब्रिटेन 2027 से कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म लागू करने की योजना बना रहा है, जिसका असर भारतीय निर्यातकों पर पड़ सकता है।
🤝 CETA में शामिल अहम क्षेत्र
- श्रम: ILO मानकों को बढ़ावा देना
- पर्यावरण: बेहतर पर्यावरण मानकों की प्रतिबद्धता
- लैंगिक समानता: महिलाओं की व्यापार में भागीदारी बढ़ाना
- भ्रष्टाचार विरोध: पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना
- व्यापार नीति: आर्थिक हितों के साथ वैश्विक मानकों पर ध्यान
लैंगिक समानता और भ्रष्टाचार विरोधी प्रावधानों का महत्व
लैंगिक समानता से जुड़े अध्याय को “ट्रेड एंड जेंडर इक्वालिटी” नाम दिया गया है। इसमें महिलाओं की व्यापार में भागीदारी बढ़ाने और बिना भुगतान वाले घरेलू काम को एक चुनौती के रूप में पहचानने की बात कही गई है। यह भारत के किसी मुक्त व्यापार समझौते में पहली बार इस तरह शामिल किया गया है।
भ्रष्टाचार विरोधी अध्याय भी इस समझौते की बड़ी विशेषता है। इसके तहत दोनों देशों ने विदेशी अधिकारियों को रिश्वत देने जैसी गतिविधियों को रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है।
भारत ने नीतिगत स्वतंत्रता बनाए रखते हुए बढ़ाए कदम
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने इन प्रावधानों को शामिल करते हुए अपनी नीतिगत स्वतंत्रता को भी बनाए रखा है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि इन विषयों पर प्रतिबद्धताएं हों, लेकिन वे ऐसी न हों जिनसे भारत की घरेलू नीतियों पर सीधा कानूनी दबाव आए।
कुल मिलाकर, भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता केवल व्यापारिक आंकड़ों और शुल्क कटौती तक सीमित नहीं है। यह दिखाता है कि भारत अब अपने व्यापार समझौतों में आर्थिक हितों के साथ-साथ श्रम, पर्यावरण, समानता और पारदर्शिता जैसे वैश्विक मुद्दों को भी शामिल कर रहा है। लंबे समय बाद जब टैरिफ कटौती की चर्चा कम हो जाएगी, तब भी CETA को भारत की नई व्यापार नीति के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में याद किया जा सकता है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। व्यापार समझौतों से जुड़े निर्णय आधिकारिक जानकारी के आधार पर लें।
