भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) बुधवार से लागू हो गया है। केंद्र सरकार का मानना है कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2030 तक बढ़कर 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इस समझौते से इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, परिधान, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, रसायन, समुद्री उत्पाद और सेवा क्षेत्र को सबसे अधिक फायदा मिलने की उम्मीद है।
भारत-यूके सीईटीए से व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार यह भारत के सबसे व्यापक व्यापार समझौतों में से एक है। इसमें केवल आयात-निर्यात शुल्क में कमी ही नहीं, बल्कि डिजिटल व्यापार, सरकारी खरीद, नवाचार, श्रम, पर्यावरण और अन्य कई क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। साथ ही भारत के संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है।
इस समझौते के तहत भारत के लगभग 99.5 प्रतिशत निर्यात मूल्य को ब्रिटेन में शुल्क मुक्त प्रवेश मिलेगा, जिससे भारतीय उत्पाद वहां अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। वहीं भारत ने भी ब्रिटेन के करीब 89.4 प्रतिशत निर्यात मूल्य को प्राथमिकता के आधार पर बाजार तक पहुंच देने पर सहमति जताई है। कुछ संवेदनशील उत्पादों पर शुल्क में कमी चरणबद्ध तरीके से लागू होगी।
🇮🇳🤝🇬🇧 भारत-यूके व्यापार समझौते की मुख्य बातें
- समझौता: व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए)
- लक्ष्य: 2030 तक 100 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार
- भारत को लाभ: 99.5% निर्यात पर शुल्क मुक्त पहुंच
- ब्रिटेन को लाभ: 89.4% निर्यात मूल्य को प्राथमिकता
- प्रमुख क्षेत्र: इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, सेवा, रत्न एवं आभूषण
इंजीनियरिंग और टेक्सटाइल उद्योग को होगा सबसे अधिक फायदा
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और ब्रिटेन के बीच वस्तु व्यापार 25.12 अरब डॉलर रहा। इसमें भारत का निर्यात 13.44 अरब डॉलर और आयात 11.68 अरब डॉलर था। वहीं दोनों देशों के बीच सेवा क्षेत्र का व्यापार 2024 में 35.44 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत को 7.88 अरब डॉलर का अधिशेष मिला।
इंजीनियरिंग क्षेत्र को इस समझौते का सबसे बड़ा लाभार्थी माना जा रहा है। ब्रिटेन हर साल लगभग 193.5 अरब डॉलर के इंजीनियरिंग उत्पाद आयात करता है, जबकि भारत का निर्यात अभी केवल 4.28 अरब डॉलर के आसपास है। शुल्क खत्म होने से ऑटोमोबाइल, ऑटो पार्ट्स, मोटरसाइकिल, औद्योगिक मशीनरी, स्टील, एल्युमिनियम और अन्य इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात में तेजी आने की उम्मीद है। इससे तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों के औद्योगिक केंद्रों को लाभ मिल सकता है।
कपड़ा और परिधान उद्योग को भी बड़ा फायदा मिलने की संभावना है। ब्रिटेन ने इस क्षेत्र की 1,143 टैरिफ लाइनों पर लगने वाले 12 प्रतिशत तक के शुल्क को समाप्त कर दिया है। इससे भारतीय उत्पाद बांग्लादेश, चीन, पाकिस्तान, वियतनाम, कंबोडिया और तुर्किये जैसे देशों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। तिरुपुर, सूरत, लुधियाना, पानीपत, भदोही और मुरादाबाद जैसे निर्यात केंद्रों को इससे नई गति मिलने की उम्मीद है।
📈 किन क्षेत्रों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ?
- इंजीनियरिंग: ऑटोमोबाइल, मशीनरी, स्टील और एल्युमिनियम
- टेक्सटाइल: 12% तक का शुल्क समाप्त
- चमड़ा उद्योग: 16% तक का शुल्क हटाया गया
- समुद्री उत्पाद: 4.9 अरब डॉलर के बाजार तक बेहतर पहुंच
- रत्न एवं आभूषण: शुल्क मुक्त निर्यात का लाभ
- सेवा क्षेत्र: आईटी, शिक्षा, वित्तीय और पेशेवर सेवाओं को अवसर
भारतीय पेशेवरों और कंपनियों को भी मिलेगी बड़ी राहत
चमड़ा और फुटवियर उद्योग पर लगने वाला 16 प्रतिशत तक का शुल्क भी हटाया गया है। इसके अलावा रत्न एवं आभूषण, रसायन, प्लास्टिक, रबर उत्पाद, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, समुद्री उत्पाद और कई कृषि उत्पादों को भी शुल्क मुक्त पहुंच मिलेगी। समुद्री उत्पाद निर्यातकों को करीब 4.9 अरब डॉलर के ब्रिटिश बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी, जबकि कृषि और प्रोसेस्ड फूड क्षेत्र के लिए भी नए अवसर खुलेंगे।
सेवा क्षेत्र के लिए भी यह समझौता काफी अहम माना जा रहा है। ब्रिटेन ने सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं, दूरसंचार, शिक्षा, पेशेवर सेवाओं और अन्य क्षेत्रों सहित 137 सेवा उप-क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों को बेहतर बाजार पहुंच देने का वादा किया है। साथ ही व्यापारिक यात्राओं, पेशेवरों और निवेशकों की आवाजाही को भी आसान बनाया गया है।
समझौते के साथ लागू डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (डीसीसी) भारतीय पेशेवरों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। इसके तहत ब्रिटेन में पांच साल तक अस्थायी रूप से काम करने वाले पात्र भारतीय पेशेवरों को वहां नेशनल इंश्योरेंस योगदान नहीं देना होगा। वे भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में ही योगदान जारी रख सकेंगे। सरकार का अनुमान है कि इससे 75,000 से अधिक भारतीय पेशेवरों और करीब 900 कंपनियों को हर साल 60 करोड़ डॉलर से ज्यादा की बचत होगी।
सरकारी खरीद और निर्यात के लिए खुलेंगे नए अवसर
इसके अलावा भारतीय कंपनियों को ब्रिटेन के करीब 90 अरब पाउंड के सरकारी खरीद बाजार तक भी पहुंच मिलेगी। हालांकि डेयरी, चावल, चीनी और ऑटोमोबाइल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को विशेष सुरक्षा दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, व्यापार लागत कम करने और वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। हालांकि इसका पूरा लाभ तभी मिलेगा जब उद्योग नियमों का पालन करेंगे, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाएंगे और नए व्यापार मानकों के अनुसार खुद को तैयार करेंगे। सरकार का कहना है कि अब उसका पूरा ध्यान इस समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करने पर रहेगा ताकि भारतीय निर्यातकों को पहले दिन से ही इसका लाभ मिलना शुरू हो सके।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी व्यावसायिक या निवेश निर्णय से पहले आधिकारिक जानकारी अवश्य जांच लें।
