IBC के 10 साल में NCLT का रिकॉर्ड प्रदर्शन, 78 योजनाएं मंजूर

दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) लागू होने के दस साल पूरे होने के बीच राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही में अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। इस दौरान एनसीएलटी ने रिकॉर्ड 78 समाधान योजनाओं (रिजॉल्यूशन प्लान) को मंजूरी दी, जिनकी कुल स्वीकृत राशि 5,517.66 करोड़ रुपये रही। यह उपलब्धि ऐसे समय में मिली है जब न्यायाधिकरण अभी भी सदस्यों की कमी और लंबित मामलों के दबाव से जूझ रहा है।

एनसीएलटी ने समाधान योजनाओं में बनाया नया रिकॉर्ड

एनसीएलटी की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) की रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में मंजूर की गई 78 समाधान योजनाएं अप्रैल-जून 2024 के 73 योजनाओं के पिछले रिकॉर्ड से भी अधिक हैं। वहीं पिछले वर्ष की समान अवधि में केवल 58 योजनाओं को मंजूरी मिली थी। इससे साफ है कि दिवाला मामलों के निपटारे की रफ्तार में सुधार हुआ है।

इस तिमाही में जिन बड़े मामलों का समाधान हुआ, उनमें मोरारजी टेक्सटाइल्स लिमिटेड, राजेश बिजनेस एंड लीजर होटल्स प्राइवेट लिमिटेड, एडेल लैंडमार्क्स लिमिटेड, अवानी प्रोजेक्ट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और अमर प्रकाश डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इन मामलों में सैकड़ों करोड़ रुपये की समाधान योजनाओं को मंजूरी दी गई।

📊 एनसीएलटी प्रदर्शन की प्रमुख बातें

  • अवधि: अप्रैल-जून 2026
  • मंजूर समाधान योजनाएं: 78
  • कुल स्वीकृत राशि: 5,517.66 करोड़ रुपये
  • पिछला रिकॉर्ड: अप्रैल-जून 2024 में 73 योजनाएं
  • मुख्य उपलब्धि: अब तक का सर्वश्रेष्ठ तिमाही प्रदर्शन

दिवाला मामलों के निपटारे में आई तेजी

एनसीएलटी ने केवल समाधान योजनाओं को ही मंजूरी नहीं दी, बल्कि दिवाला प्रक्रिया से जुड़े 1,676 अंतरिम आवेदनों (आईए) का भी निपटारा किया। इसके अलावा 68 अन्य अंतरिम आवेदनों पर भी समाधान योजनाओं के साथ फैसला सुनाया गया। इससे लंबित प्रक्रियाओं को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिली है।

रिपोर्ट के अनुसार, आईबीसी लागू होने के बाद से अब तक एनसीएलटी कुल 1,628 समाधान योजनाओं को मंजूरी दे चुका है, जिनका कुल मूल्य 4.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। वित्त वर्ष 2018 में जहां केवल 19 योजनाओं को मंजूरी मिली थी, वहीं यह संख्या बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 288 तक पहुंच गई। वित्त वर्ष 2026 में 257 योजनाएं मंजूर हुईं और वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत भी मजबूत रही है।

हालांकि, लंबित मामलों की संख्या अब भी काफी अधिक है। 30 जून 2026 तक विभिन्न एनसीएलटी पीठों के सामने 349 समाधान योजनाएं मंजूरी का इंतजार कर रही थीं। इसके अलावा 38 मामलों की सुनवाई पूरी हो चुकी है और उन पर फैसला सुरक्षित रखा गया है। ऐसे में आने वाले महीनों में और कई मामलों के निपटने की संभावना है।

⚖️ एनसीएलटी की मौजूदा स्थिति

  • लंबित समाधान योजनाएं: 349
  • फैसला सुरक्षित: 38 मामले
  • सबसे आगे: मुंबई पीठ
  • रिक्त पद: 11 सदस्य
  • चुनौती: सदस्यों की कमी और लंबित मामले
  • उम्मीद: रिक्त पद भरने से निपटारे की रफ्तार बढ़ेगी

मुंबई पीठ सबसे आगे, लेकिन चुनौतियां अब भी बरकरार

क्षेत्रीय पीठों की बात करें तो मुंबई पीठ ने सबसे अधिक 18 समाधान योजनाओं को मंजूरी दी। इसके बाद कोलकाता पीठ ने 15 और प्रधान पीठ तथा नई दिल्ली पीठ ने मिलकर 13 योजनाओं को मंजूरी दी। चंडीगढ़, इलाहाबाद, अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, इंदौर, कटक और हैदराबाद की पीठों ने भी कई मामलों का निपटारा किया।

मूल्य के हिसाब से भी मुंबई पीठ सबसे आगे रही, जहां 2,528 करोड़ रुपये से अधिक की समाधान योजनाओं को मंजूरी मिली। इसके बाद प्रधान पीठ और नई दिल्ली पीठ का स्थान रहा, जहां 1,101 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की योजनाएं स्वीकृत हुईं।

बेहतर प्रदर्शन के बावजूद एनसीएलटी ने माना है कि संसाधनों की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। 13 जुलाई 2026 तक स्वीकृत 31 न्यायिक और 31 तकनीकी सदस्यों के मुकाबले केवल 26 न्यायिक और 25 तकनीकी सदस्य ही कार्यरत थे। यानी कुल 11 पद अभी भी खाली हैं। जनवरी 2025 के बाद से किसी नए न्यायिक या तकनीकी सदस्य की नियुक्ति नहीं हुई है। इस दौरान केवल न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल को एनसीएलटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

रिक्त पद भरने से और तेज हो सकता है निपटारा

गौरतलब है कि 29 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलटी में बढ़ती देरी और खाली पदों का स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार से जल्द आवश्यक कदम उठाने को कहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिक्त पदों को जल्द भरा जाता है और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाता है, तो दिवाला मामलों के निपटारे की रफ्तार और तेज हो सकती है।

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी कानूनी या व्यावसायिक निर्णय से पहले आधिकारिक जानकारी अवश्य देखें।

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