ICICI बैंक की विदेश से फंड जुटाने की तैयारी, बड़ा फैसला 18 जुलाई को

आईसीआईसीआई बैंक विदेशी बाजारों से धन जुटाने की अपनी क्षमता बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। बैंक ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि 18 जुलाई को होने वाली निदेशक मंडल की बैठक में विदेशी बाजारों में बॉन्ड, नोट्स और ऑफशोर सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (सीडी) जारी करके धन जुटाने की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।

आईसीआईसीआई बैंक विदेशी बाजार से पूंजी जुटाने की तैयारी में

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आईसीआईसीआई बैंक अंतरराष्ट्रीय बाजार से कम से कम 50 करोड़ डॉलर जुटाने की योजना बना रहा है। माना जा रहा है कि यह राशि करीब पांच साल की अवधि वाले बॉन्ड जारी करके जुटाई जा सकती है। हालांकि बैंक ने अभी जुटाई जाने वाली राशि का आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया है।

बैंक का यह कदम भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा हाल ही में विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों के बाद सामने आया है। 5 जून को आरबीआई ने बैंकों को तीन से पांच साल की अवधि के नए और मौजूदा एफसीएनआर (बी) जमा जुटाने और उन्हें रियायती दर पर केंद्रीय बैंक के साथ स्वैप करने की अनुमति दी थी। इस व्यवस्था के तहत पात्र विदेशी मुद्रा उधारी पर हेजिंग की लागत आरबीआई वहन करेगा, जिससे बैंकों के लिए विदेश से धन जुटाना सस्ता हो जाएगा। यह सुविधा 30 सितंबर तक उपलब्ध रहेगी।

💰 आईसीआईसीआई बैंक की विदेशी फंडिंग योजना

  • बोर्ड बैठक: 18 जुलाई
  • संभावित फंड जुटाने की राशि: कम से कम 50 करोड़ डॉलर
  • माध्यम: बॉन्ड, नोट्स और ऑफशोर सीडी
  • संभावित अवधि: करीब 5 साल
  • उद्देश्य: विदेशी बाजार से पूंजी जुटाना

आरबीआई की रियायतों से मिलेगा बैंकों को फायदा

आरबीआई की इन रियायतों का उद्देश्य विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाना, बैंकों की फंडिंग लागत कम करना और भारत के लिए विदेशी वित्तपोषण के नए विकल्प तैयार करना है। बैंक इस तरह जुटाई गई विदेशी मुद्रा का उपयोग एफसीएनआर (बी) जमा और अन्य विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में कर सकते हैं।

आरबीआई की घोषणा के बाद एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक पहले ही विदेशी बाजारों से धन जुटा चुके हैं। वहीं भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और बैंक ऑफ बड़ौदा ने वैश्विक स्तर पर उधारी महंगी होने के कारण अपनी विदेशी बॉन्ड जारी करने की योजना फिलहाल टाल दी है।

📌 आरबीआई की नई व्यवस्था

  • घोषणा: 5 जून
  • एफसीएनआर (बी): 3 से 5 साल की जमा पर सुविधा
  • हेजिंग लागत: पात्र उधारी पर आरबीआई वहन करेगा
  • सुविधा की अवधि: 30 सितंबर तक
  • उद्देश्य: विदेशी मुद्रा प्रवाह और सस्ती फंडिंग
  • लाभ: बैंकों के लिए विदेश से धन जुटाना आसान

वैश्विक बाजार की चुनौतियों के बीच बढ़ा कदम

हाल के सप्ताहों में अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड बढ़ने से डॉलर में कर्ज लेना महंगा हो गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के बाद वैश्विक बॉन्ड बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जिससे विदेशी बाजार से धन जुटाने की लागत बढ़ गई। ऐसे माहौल में आईसीआईसीआई बैंक का प्रस्ताव इस बात का संकेत है कि वह आरबीआई की रियायतों का लाभ उठाकर अंतरराष्ट्रीय बाजार से पूंजी जुटाने की संभावनाओं पर आगे बढ़ना चाहता है।

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। निवेश या वित्तीय निर्णय लेने से पहले आधिकारिक जानकारी अवश्य देखें।

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