भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) बुधवार को बैंकों के कार्यकारी निदेशकों (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स) के साथ बैठक करेगा। यह बैठक मौद्रिक नीति (एमपीसी) की घोषणा से पहले होने वाली नियमित चर्चाओं का हिस्सा है। माना जा रहा है कि इस बार बैठक में विदेशी मुद्रा गैर-निवासी बैंक जमा यानी एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट जुटाने की रफ्तार बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा।
आरबीआई की बैठक में एफसीएनआर (बी) जमा बढ़ाने पर रहेगा फोकस
जानकारी के अनुसार, बैठक में आरबीआई के कार्यकारी निदेशक इंद्रनील भट्टाचार्य शामिल होंगे। इसके अलावा बैंकों द्वारा रेपो रेट में बदलाव का लाभ ग्राहकों तक कितनी तेजी से पहुंचाया जा रहा है, जमा और कर्ज की ब्याज दरों में बदलाव तथा अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों को पर्याप्त कर्ज उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी।
आरबीआई का खास फोकस एफसीएनआर (बी) जमा बढ़ाने पर रहेगा। जून में केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए इस योजना के तहत कई अस्थायी राहतें दी थीं। इसके बाद सरकार और आरबीआई दोनों ही बैंकों से इस योजना को तेजी से आगे बढ़ाने और अधिक से अधिक एनआरआई निवेश आकर्षित करने की अपील कर रहे हैं।
💰 एफसीएनआर (बी) योजना की मुख्य बातें
- मुख्य फोकस: विदेशी मुद्रा जमा बढ़ाना
- जमा अवधि: 3 से 5 वर्ष
- योजना लागू: 30 सितंबर तक
- उद्देश्य: विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाना
- लाभ: बैंकों के लिए कम लागत पर विदेशी मुद्रा जुटाना
सरकार और बैंक एनआरआई निवेश बढ़ाने में जुटे
13 जुलाई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ समीक्षा बैठक में बैंकों से कहा था कि वे एनआरआई ग्राहकों तक अधिक सक्रिय तरीके से पहुंचें, नए जमा उत्पाद पेश करें और विदेशी मुद्रा जुटाने के प्रयास तेज करें। बैंकों ने सरकार को बताया कि सिंगापुर, हांगकांग, पश्चिम एशिया, ब्रिटेन और अमेरिका में रहने वाले एनआरआई इस योजना में अच्छी रुचि दिखा रहे हैं। इसके लिए बैंक डिजिटल माध्यमों से भी विशेष अभियान चला रहे हैं।
हालांकि, विदेशी बाजार से धन जुटाने की लागत बढ़ने के कारण कई बैंक फिलहाल केवल उन एनआरआई ग्राहकों पर ध्यान दे रहे हैं जिनके पास 10 लाख डॉलर या उससे अधिक की जमा राशि है। इससे छोटे निवेशकों से बड़ी मात्रा में धन जुटाने की योजना प्रभावित हो सकती है। सरकार का लक्ष्य इस योजना के जरिए 30 से 40 अरब डॉलर तक का विदेशी मुद्रा प्रवाह आकर्षित करना है।
📊 एनआरआई जमा और विदेशी मुद्रा अपडेट
- सरकार का लक्ष्य: 30 से 40 अरब डॉलर
- अप्रैल 2026 में नई एफसीएनआर (बी) जमा: 16.6 करोड़ डॉलर
- कुल एफसीएनआर (बी) जमा: 33.92 अरब डॉलर
- कुल एनआरआई जमा: 165.59 अरब डॉलर
- मुख्य बाजार: सिंगापुर, हांगकांग, पश्चिम एशिया, ब्रिटेन और अमेरिका
- अभियान: डिजिटल माध्यमों से एनआरआई तक पहुंच
रुपये पर दबाव और विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने की कोशिश
5 जून को शुरू की गई यह योजना 30 सितंबर तक लागू रहेगी। इसके तहत बैंक तीन से पांच साल की अवधि के लिए एफसीएनआर (बी) जमा जुटा सकते हैं और इन डॉलर को रियायती दर पर आरबीआई के साथ स्वैप कर सकते हैं। इससे बैंकों के लिए विदेशी मुद्रा जुटाना आसान और कम खर्चीला हो जाता है।
आरबीआई और केंद्र सरकार ने जून में विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करने और रुपये को समर्थन देने के लिए एफसीएनआर (बी) जमा, बाहरी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) और विदेशी मुद्रा उधारी से जुड़े कई नियमों में राहत दी थी। इन कदमों का उद्देश्य भारत में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाना और बैंकों को विदेश से धन जुटाने में अधिक लचीलापन देना है।
हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के कारण रुपये पर भी दबाव बना है। चालू वित्त वर्ष में अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले 3 प्रतिशत से अधिक कमजोर हो चुका है। 20 मई को यह 96.82 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था। पिछले वित्त वर्ष में भी रुपये में करीब 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।
बैठक में बैंकों की प्रगति की होगी समीक्षा
आरबीआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में बैंकों ने 16.6 करोड़ डॉलर के नए एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट जुटाए। अप्रैल के अंत तक इन जमाओं का कुल आकार 33.92 अरब डॉलर था, जो एक महीने पहले 33.76 अरब डॉलर था। वहीं एफसीएनआर (बी), एनआरई और एनआरओ खातों सहित कुल एनआरआई जमा 165.59 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी बैठक में आरबीआई बैंकों की प्रगति की समीक्षा करेगा और 30 सितंबर की समयसीमा से पहले विदेशी मुद्रा जुटाने की गति और तेज करने पर जोर देगा।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले आधिकारिक जानकारी अवश्य जांचें।
