भारतीय रेलवे का 99.6% नेटवर्क हुआ इलेक्ट्रिफाइड, अब सिर्फ 269 किलोमीटर का काम बाकी
भारतीय रेलवे अपने सबसे बड़े विद्युतीकरण अभियान को पूरा करने के बेहद करीब पहुंच गया है। रेलवे के ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत हिस्सा अब बिजली से चलने लगा है। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, 31 मई 2026 तक देश के 70,271 रूट किलोमीटर लंबे ब्रॉड गेज नेटवर्क में से 70,002 किलोमीटर ट्रैक का विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। अब केवल 269 किलोमीटर रेलवे लाइन पर काम बाकी है।
भारतीय रेलवे विद्युतीकरण अभियान अंतिम चरण में
रेलवे को उम्मीद है कि बचा हुआ विद्युतीकरण कार्य इसी वित्त वर्ष में पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए वित्त वर्ष 2026-27 में रेलवे ने करीब 5,000 करोड़ रुपये का बजट भी रखा है। हालांकि, कुछ इलाकों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अंतिम चरण का काम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
बचे हुए विद्युतीकरण कार्य का बड़ा हिस्सा कुछ राज्यों में है। इसमें कर्नाटक में 120 किलोमीटर, तमिलनाडु में 68 किलोमीटर, असम में 55 किलोमीटर, गोवा में 16 किलोमीटर और राजस्थान में 10 किलोमीटर रेलवे लाइन शामिल है।
🚆 रेलवे विद्युतीकरण की बड़ी उपलब्धि
- कुल ब्रॉड गेज नेटवर्क: 70,271 रूट किलोमीटर
- विद्युतीकृत नेटवर्क: 70,002 किलोमीटर
- पूरा हुआ कार्य: 99.6 प्रतिशत
- बाकी काम: केवल 269 किलोमीटर
- लक्ष्य: इसी वित्त वर्ष में पूरा विद्युतीकरण
इलेक्ट्रिक ट्रेनों से रेलवे को मिलेंगे कई फायदे
रेलवे का कहना है कि पूरी तरह इलेक्ट्रिक नेटवर्क बनने से डीजल पर निर्भरता कम होगी और ईंधन खर्च में बड़ी बचत होगी। इलेक्ट्रिक इंजन डीजल इंजन की तुलना में कम लागत पर चलते हैं और ज्यादा क्षमता के साथ मालगाड़ियों को खींच सकते हैं। इससे माल ढुलाई की गति बढ़ेगी और ट्रेनों के संचालन में सुधार आएगा।
भारतीय रेलवे का लक्ष्य साल 2030 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन हासिल करना है। विद्युतीकरण इस लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। बिजली से चलने वाली ट्रेनें प्रदूषण कम करने में मदद करती हैं और भविष्य में इन्हें नवीकरणीय ऊर्जा से भी जोड़ा जा सकता है।
2014 के बाद रेलवे विद्युतीकरण की रफ्तार हुई तेज
पिछले कुछ वर्षों में रेलवे ने विद्युतीकरण की रफ्तार काफी तेज की है। साल 1948 से 2014 तक करीब 21,400 रूट किलोमीटर रेलवे लाइन का विद्युतीकरण हुआ था। वहीं, 2014 के बाद अब तक 48,000 किलोमीटर से ज्यादा रेलवे नेटवर्क को इलेक्ट्रिक बनाया जा चुका है।
रेलवे के अनुसार, देश के 25 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश पूरी तरह इलेक्ट्रिफाइड हो चुके हैं। वहीं रेलवे के 18 जोन में से 14 जोन के ब्रॉड गेज नेटवर्क का विद्युतीकरण पूरा हो गया है।
🌱 इलेक्ट्रिक रेलवे नेटवर्क के फायदे
- ईंधन बचत: डीजल पर निर्भरता कम होगी
- पर्यावरण लाभ: कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी
- माल ढुलाई: भारी मालगाड़ियों की क्षमता बढ़ेगी
- संचालन सुधार: ट्रेन संचालन ज्यादा बेहतर होगा
- भविष्य का लक्ष्य: नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन की दिशा में कदम
विशेषज्ञों ने बताए इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन के फायदे और चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन से रेलवे को कई फायदे मिलेंगे। इससे तेज गति वाली ट्रेनें चलाने, भारी मालगाड़ियों की क्षमता बढ़ाने और ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा इंजन बदलने की जरूरत कम होगी, जिससे समय और रखरखाव खर्च दोनों बचेंगे।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ रेलवे को इलेक्ट्रिक बनाने से पूरी तरह हरित परिवहन का लक्ष्य हासिल नहीं होगा, क्योंकि देश में बनने वाली बिजली का बड़ा हिस्सा अभी भी कोयले से आता है। उनके अनुसार, रेलवे को वास्तव में पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए बिजली उत्पादन में भी स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ानी होगी।
भारतीय रेलवे के इलेक्ट्रिक नेटवर्क का भविष्य
फिर भी, भारतीय रेलवे का लगभग पूरा नेटवर्क इलेक्ट्रिक बनना देश के परिवहन क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे रेलवे की कार्यक्षमता बढ़ेगी, ईंधन आयात पर निर्भरता कम होगी और आने वाले समय में भारत का रेलवे नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक रेलवे नेटवर्क में शामिल हो जाएगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। आंकड़ों में बदलाव संभव है।