ईरान संकट के बाद भारत का बड़ा कदम! ONGC बनाएगी नया तेल भंडार

ONGC ने बढ़ाई रणनीतिक तेल भंडार बढ़ाने की तैयारी, ईरान युद्ध के बाद ऊर्जा सुरक्षा पर जोर देश की सबसे बड़ी तेल और गैस कंपनी Oil and Natural Gas Corporation (ONGC) ने भारत के रणनीतिक कच्चे तेल भंडार को बढ़ाने की योजना को मंजूरी दे दी है।

यह कदम ईरान युद्ध के बाद ऊर्जा आपूर्ति में आई चुनौतियों को देखते हुए देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए रणनीतिक तेल भंडार बढ़ाने की योजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ONGC बनाएगी 17.5 लाख टन क्षमता वाला नया तेल भंडार

ONGC के बोर्ड ने कर्नाटक के मंगलुरु में 17.5 लाख टन क्षमता वाले नए रणनीतिक तेल भंडार विकसित करने को मंजूरी दी है। कंपनी ने एक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि यह परियोजना राष्ट्रीय महत्व की है। हालांकि, इसके लिए कितनी लागत आएगी और इसे कब तक पूरा किया जाएगा, इसकी जानकारी अभी नहीं दी गई है।

🛢️ ONGC रणनीतिक तेल भंडार योजना

  • कंपनी: Oil and Natural Gas Corporation (ONGC)
  • स्थान: मंगलुरु, कर्नाटक
  • नई क्षमता: 17.5 लाख टन
  • उद्देश्य: ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना
  • महत्व: राष्ट्रीय स्तर की परियोजना
  • फायदा: आपूर्ति संकट के समय मदद

इस परियोजना के पूरा होने के बाद देश के रणनीतिक तेल भंडार की क्षमता बढ़ जाएगी, जिसे Indian Strategic Petroleum Reserves Limited (ISPRL) संभालता है। फिलहाल ISPRL के पास देश के तीन स्थानों पर भूमिगत तेल भंडार हैं, जिनकी कुल क्षमता 53.3 लाख टन है। इसके अलावा दो नए स्थानों पर भी भंडार बनाए जा रहे हैं, जिनसे करीब 65 लाख टन अतिरिक्त क्षमता जुड़ेगी।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है, खासकर पश्चिम एशिया क्षेत्र से। ईरान युद्ध के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा था और भारत सहित कई देशों को वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़े थे। इसके बाद सरकार रणनीतिक तेल भंडार बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दे रही है।

ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत की बड़ी तैयारी

ONGC अपनी खुद की राशि से रणनीतिक तेल भंडार बनाने वाली पहली सरकारी कंपनी बन गई है। इससे पहले सरकारी तेल कंपनियां और रिफाइनरी कंपनियां मुख्य रूप से व्यावसायिक भंडारण क्षमता विकसित करती थीं।

🌍 भारत के रणनीतिक तेल भंडार की स्थिति

  • वर्तमान क्षमता: 53.3 लाख टन
  • नए भंडार: करीब 65 लाख टन अतिरिक्त क्षमता
  • प्रबंधन: Indian Strategic Petroleum Reserves Limited (ISPRL)
  • लक्ष्य: करीब एक महीने की ऊर्जा जरूरत पूरी करना
  • साझेदारी: सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा
  • फोकस: कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और LPG सुरक्षा

सरकार का लक्ष्य कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और एलपीजी के ऐसे भंडार तैयार करना है, जिससे देश की करीब एक महीने की ऊर्जा जरूरत पूरी की जा सके। इसके लिए सरकार सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा दे रही है और सरकारी कंपनियों को भी भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

ONGC की सहायक कंपनी Mangalore Refinery and Petrochemicals Limited (MRPL) कर्नाटक में 3 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली रिफाइनरी चलाती है। संभावना है कि नए भूमिगत भंडार का इस्तेमाल MRPL के साथ मिलकर किया जा सकता है।

मंगलुरु तेल भंडार में विदेशी कंपनियों की भागीदारी

मंगलुरु के मौजूदा रणनीतिक भंडार में Abu Dhabi National Oil Company (ADNOC) जैसी विदेशी कंपनियां भी भंडारण क्षमता लीज पर ले चुकी हैं। नई परियोजना से भारत की तेल आपूर्ति सुरक्षा को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

Disclaimer: यह जानकारी ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से दी गई है।

Gourav Kumar Singh

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