भारत सरकार खाना पकाने के लिए बिजली से चलने वाले इंडक्शन चूल्हों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सरकार सब्सिडी देने, जरूरी सामान पर सीमा शुल्क कम करने और बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत करने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य खाना पकाने के लिए आयातित गैस पर देश की निर्भरता को कम करना है।
इंडक्शन चूल्हों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की तैयारी
इस योजना को लेकर बिजली मंत्रालय, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, नीति आयोग, उद्योग विभाग, बिजली वितरण कंपनियों और उद्योग से जुड़े लोगों के बीच चर्चा हुई है। अभी बातचीत शुरुआती स्तर पर है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण आयातित गैस की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ने के बाद इस योजना पर दोबारा जोर दिया गया है।
भारत दुनिया में एलपीजी का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है। देश में हर साल करीब 3.3 करोड़ टन एलपीजी की जरूरत होती है, जिसमें लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आता है। इसमें करीब 90 प्रतिशत गैस पश्चिम एशिया से आती है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर आपूर्ति प्रभावित होने पर भारत पर इसका असर पड़ सकता है।
गैस पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है इंडक्शन
नीति बनाने वाले अधिकारियों का मानना है कि इंडक्शन चूल्हों को बढ़ावा देने से गैस पर निर्भरता कम की जा सकती है। सरकार के अनुमान के अनुसार, इंडक्शन से खाना पकाने की लागत पारंपरिक तरीकों की तुलना में करीब एक तिहाई तक कम हो सकती है। हालांकि इसके लिए घरों में पर्याप्त बिजली और सही तरह की वायरिंग होना जरूरी होगा।
बिजली वितरण कंपनियों का कहना है कि अगर बड़ी संख्या में लोग इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल करने लगते हैं तो घरों में बिजली की मांग बढ़ सकती है। इसलिए बिजली के लोड का आकलन, घरेलू वायरिंग में बदलाव और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत होगी।
इंडक्शन चूल्हों को बढ़ावा देने की योजना
- मुख्य उद्देश्य: आयातित गैस पर निर्भरता कम करना
- सरकारी विकल्प: सब्सिडी और सीमा शुल्क में कमी
- बिजली व्यवस्था: वितरण व्यवस्था को मजबूत करना
- घरेलू जरूरत: पर्याप्त बिजली और बेहतर वायरिंग
- उत्पादन: घरेलू स्तर पर इंडक्शन चूल्हों का उत्पादन बढ़ाना
- लक्ष्य: बिजली से खाना पकाने के विकल्प को बढ़ावा देना
इंडक्शन चूल्हे में इस्तेमाल होने वाले कई प्रमुख सामान अभी विदेशों से मंगाए जाते हैं। इनमें कांच, कॉइल, सर्किट बोर्ड और डीसी पंखे जैसे हिस्से शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर सामान China से आता है। इन हिस्सों की लागत चूल्हे की कुल कीमत का बड़ा हिस्सा होती है। ऐसे में सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना चाहती है।
उद्योग की ओर से पहले ही इन सामान पर सीमा शुल्क घटाने और जीएसटी की दर कम करने की मांग की जा चुकी है। सरकार की नई योजना में घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाने और स्थानीय कंपनियों को प्रोत्साहन देने पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
कम आय वाले परिवारों के लिए भी योजना पर काम
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बीच इंडक्शन चूल्हों को बढ़ावा देने के लिए पहले से एक अलग योजना पर भी काम चल रहा है। ऊर्जा दक्षता से जुड़ी सरकारी संस्था कम आय वाले लोगों को आसान वित्तीय सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा परिवारों को बिजली से खाना पकाने के विकल्प से जोड़ना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल subsidy देने से इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल तेजी से नहीं बढ़ेगा। इसके लिए लोगों की आदतों में बदलाव, बाजार में सस्ते और अच्छे उपकरणों की उपलब्धता और पर्याप्त electricity आपूर्ति भी जरूरी होगी।
इंडक्शन चूल्हों के सामने प्रमुख चुनौतियां
- बिजली की मांग: बड़ी संख्या में इस्तेमाल से घरेलू बिजली की मांग बढ़ सकती है
- वायरिंग: पुराने घरों में वायरिंग की क्षमता की जांच जरूरी होगी
- उपकरणों की कीमत: सस्ते और अच्छे उपकरण उपलब्ध कराना जरूरी होगा
- आयात निर्भरता: कई प्रमुख सामान विदेशों से आते हैं
- आपूर्ति: खाना पकाने के समय लगातार बिजली मिलना जरूरी होगा
- जागरूकता: लोगों की आदतों में बदलाव के लिए जागरूकता जरूरी होगी
बिजली की उपलब्धता और वायरिंग भी बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार, बिजली व्यवस्था इतनी मजबूत होनी चाहिए कि जब लोगों को खाना बनाना हो, तब उन्हें लगातार बिजली मिल सके। इसके साथ ही पुराने घरों में वायरिंग की क्षमता भी जांचनी होगी, क्योंकि ज्यादा बिजली खपत वाले उपकरणों के लिए मौजूदा व्यवस्था हमेशा पर्याप्त नहीं हो सकती।
सरकार ने इन चूल्हों के इस्तेमाल को लेकर देशभर में जागरूकता अभियान भी शुरू किया है। निर्माताओं को उपकरणों की ऊर्जा दक्षता से जुड़े नियमों का पालन करने के लिए कहा गया है। हालांकि आपूर्ति से जुड़ी परेशानियों को देखते हुए नियम लागू करने की समयसीमा में कुछ अतिरिक्त समय दिया गया है।
देश में इस समय हर साल करीब एक करोड़ इंडक्शन चूल्हों का उत्पादन होता है। उद्योग अब इसकी क्षमता बढ़ाकर करीब दो करोड़ चूल्हे सालाना करने की तैयारी कर रहा है। अगर बिजली की उपलब्धता, कीमत और घरेलू उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों को दूर किया जाता है, तो आने वाले समय में इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल बढ़ सकता है।
Disclaimer: यह जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है। सरकारी योजना और नियमों में बदलाव संभव है।
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