पिता से विरासत में मिली कृषि भूमि को बेचने पर मिलने वाली रकम पर कर देना पड़ सकता है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि जमीन किस क्षेत्र में स्थित है। यदि कृषि भूमि नगर पालिका या छावनी बोर्ड की तय सीमा के अंदर आती है और उसे शहरी कृषि भूमि माना जाता है, तो उसकी बिक्री से होने वाले लाभ पर पूंजीगत लाभ कर लग सकता है। वहीं, यदि जमीन इन निर्धारित सीमाओं से बाहर है, तो उसकी बिक्री से होने वाला लाभ आम तौर पर कर के दायरे में नहीं आता।
विरासत में मिली कृषि भूमि बेचने पर कैसे लगता है कर
मान लीजिए किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी तीन संतानों को कृषि भूमि विरासत में मिली है और तीनों उसे बेचकर रकम आपस में बांटना चाहते हैं। ऐसी स्थिति में हर हिस्सेदार अपने हिस्से पर मिलने वाले लाभ की गणना कर सकता है। यदि जमीन को बेचने के बाद कर की देनदारी बनती है, तो कुछ परिस्थितियों में कानून के तहत राहत पाने के विकल्प भी मौजूद हैं।
कृषि भूमि बेचने के बाद प्राप्त रकम को आवासीय मकान में लगाने पर धारा 54F के तहत कर में छूट मिल सकती है। इसके लिए कुछ जरूरी शर्तों को पूरा करना होता है। तीनों भाई-बहनों के लिए एक ही मकान में मिलकर पैसा लगाना जरूरी नहीं है। हर व्यक्ति अपने हिस्से की रकम से अलग-अलग मकान खरीद सकता है। हालांकि, इस छूट के लिए प्रत्येक व्यक्ति को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।
मकान खरीदने पर धारा 54F की छूट
मकान खरीदने की स्थिति में निवेश जमीन बेचने से एक साल पहले या बिक्री के दो साल के भीतर किया जा सकता है। यदि नया मकान बनवाया जाता है, तो उसका निर्माण जमीन बेचने की तारीख से तीन साल के भीतर पूरा करना जरूरी होता है। इस तरह मिलने वाली छूट की अधिकतम सीमा ₹10 करोड़ तक हो सकती है। साथ ही, बिक्री के समय व्यक्ति के पास नए मकान के अलावा एक से अधिक आवासीय मकान नहीं होना चाहिए।
🏠 जमीन बेचने पर कर बचाने के विकल्प
- धारा 54F: आवासीय मकान में निवेश करने पर छूट का विकल्प
- धारा 54B: दूसरी कृषि भूमि खरीदने पर राहत का विकल्प
- धारा 54EC: तय बांड में निवेश पर छूट का विकल्प
- मकान खरीदने की अवधि: बिक्री से एक साल पहले या दो साल के भीतर
- मकान निर्माण: बिक्री के तीन साल के भीतर पूरा करना जरूरी
दूसरी कृषि भूमि खरीदने पर भी मिल सकती है राहत
अगर विरासत में मिली कृषि भूमि पर पिता खेती करते थे, तो दूसरी कृषि भूमि खरीदने पर धारा 54B के तहत भी कर में छूट का लाभ मिल सकता है। इसके लिए नई कृषि भूमि बिक्री के दो साल के भीतर खरीदनी होगी। खरीदी गई जमीन को कम से कम तीन साल तक अपने पास रखना जरूरी होगा।
इसके अलावा, पूंजीगत लाभ को कुछ तय किए गए बांड में लगाने पर धारा 54EC के तहत भी राहत मिल सकती है। इस विकल्प के तहत अधिकतम ₹50 लाख तक के निवेश पर छूट का लाभ मिल सकता है। इसलिए जमीन बेचने से पहले उपलब्ध सभी विकल्पों को समझना जरूरी है।
💰 पूंजीगत लाभ की गणना में जरूरी बातें
- कर दर: लागू नियमों के अनुसार 12.5 प्रतिशत या 20 प्रतिशत
- महंगाई समायोजन: कुछ मामलों में इसकी गणना की जा सकती है
- विरासत की अवधि: पिता के स्वामित्व की अवधि भी गणना में शामिल हो सकती है
- लागत: पिता द्वारा जमीन खरीदने में खर्च की गई रकम सामान्य तौर पर लागत मानी जा सकती है
- पुरानी जमीन: 1 अप्रैल 2001 से पहले खरीदी गई जमीन पर उचित बाजार मूल्य के नियम लागू हो सकते हैं
विरासत वाली जमीन की लागत कैसे तय होती है
यदि छूट लेने के बाद भी कुछ पूंजीगत लाभ कर योग्य बचता है, तो उस पर लागू नियमों के अनुसार 12.5 प्रतिशत कर बिना महंगाई समायोजन के या 20 प्रतिशत कर महंगाई समायोजन के बाद गणना किए गए लाभ पर लगाया जा सकता है। विरासत में मिली जमीन के मामले में जमीन को पिता ने जितने समय तक रखा था, उस अवधि को भी गणना में शामिल किया जा सकता है। जमीन खरीदने में पिता ने जो रकम खर्च की थी, वह सामान्य तौर पर लागत मानी जाएगी। यदि जमीन 1 अप्रैल 2001 से पहले खरीदी गई थी, तो लागू नियमों के अनुसार उस तारीख का उचित बाजार मूल्य भी लागत के रूप में लिया जा सकता है।
अस्वीकरण: कर नियम जटिल हो सकते हैं, इसलिए जमीन बेचने से पहले योग्य कर विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।
