करीब 20 वर्षों से दुनिया के central bank interest दरों की दिशा को लेकर पहले से संकेत देने की नीति अपनाते रहे हैं। लेकिन मई में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन बनने के बाद केविन वॉर्श ने अपनी सोच और भविष्य की योजनाओं के बारे में कम बोलने का तरीका अपनाया। हालांकि 28 अगस्त को जैक्सन होल में आयोजित फेड की वार्षिक बैठक में उन्हें अपनी नीतिगत सोच के बारे में कुछ विस्तार से बताना पड़ा।
वॉर्श ने ब्याज दरों को लेकर क्या कहा
अपने भाषण के शुरुआती हिस्से में वॉर्श ने अर्थव्यवस्था और केंद्रीय बैंक के सामने मौजूद चुनौतियों पर बात की। उन्होंने ब्याज दरों के भविष्य को लेकर स्पष्ट संकेत देने वाली नीति से दूरी बनाए रखने की बात कही। उनका मानना है कि केंद्रीय बैंक को भविष्य के फैसलों को लेकर बहुत ज्यादा वादा नहीं करना चाहिए, क्योंकि आर्थिक परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं। उन्होंने artificial intelligence से जुड़े कई सवालों का भी उल्लेख किया और बताया कि फेड इसके आर्थिक प्रभावों को समझने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि, भविष्य के फैसलों के बारे में कम बोलने की उनकी नीति के बावजूद इस बार उनके भाषण से उनकी सोच काफी हद तक साफ हो गई। उन्होंने कहा कि US economy मजबूत दिखाई दे रही है। कारोबार में निवेश बढ़ रहा है और कर्ज तथा ऋण बाजारों पर मौजूदा नीतियों का बहुत ज्यादा दबाव नजर नहीं आ रहा है। उनके अनुसार व्यापक वित्तीय परिस्थितियों को बहुत ज्यादा सख्त बताना मुश्किल होगा।
महंगाई को लेकर वॉर्श की सबसे बड़ी चिंता
इसके बाद Warsh Fed के दो प्रमुख लक्ष्यों पर चर्चा की। इनमें कीमतों में स्थिरता बनाए रखना और रोजगार को मजबूत रखना शामिल है। उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में रोजगार बढ़ने की धीमी रफ्तार का एक कारण काम करने वाली आबादी की कम वृद्धि भी हो सकती है। उनके मुताबिक रोजगार बाजार अभी भी लगभग पूर्ण रोजगार की स्थिति के अनुरूप है। उनकी सबसे बड़ी चिंता महंगाई को लेकर बनी हुई है।
वॉर्श ने संकेत दिया कि महंगाई में वह सुधार नहीं हुआ है जिसकी उम्मीद की जा रही थी। जब तक महंगाई फेड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य की तरफ पर्याप्त तेजी से नहीं बढ़ती, तब तक केंद्रीय बैंक के सामने काम बाकी रहेगा। उनके इस बयान से यह संकेत मिला कि आने वाले समय में ब्याज दरों को बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।
📊 वॉर्श के भाषण की अहम बातें
- अर्थव्यवस्था: US economy को मजबूत बताया गया
- महंगाई: 2 प्रतिशत लक्ष्य की ओर पर्याप्त तेजी से सुधार नहीं
- रोजगार: रोजगार बाजार लगभग पूर्ण रोजगार के अनुरूप
- ब्याज दर: आगे बढ़ाने पर विचार की संभावना का संकेत
- AI: इसके आर्थिक प्रभावों को समझने पर ध्यान
- नीति: भविष्य के फैसलों पर कम स्पष्ट संकेत देने का रुख
बाजार पर भाषण का क्या असर पड़ा
उनके इस स्पष्ट रुख का बाजार पर भी असर पड़ा। भाषण के बाद दो साल की अमेरिकी सरकारी प्रतिभूतियों की दर में करीब 0.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं 10 साल की दर लगभग स्थिर रही। इसका मतलब यह निकाला गया कि निवेशकों ने निकट भविष्य में ब्याज दरों के बढ़ने की संभावना को ज्यादा महत्व दिया, लेकिन लंबी अवधि के कर्ज को लेकर उनकी चिंता बहुत ज्यादा नहीं बढ़ी।
हालांकि, वॉर्श की Reliability को जुलाई में हुए एक प्रेस सम्मेलन के बाद झटका लगा था। उस समय उनकी बातों से ऐसा लगा था कि वह ब्याज दरों में कटौती की तरफ अधिक झुक सकते हैं। उन्होंने भविष्य में महंगाई को मापने के मौजूदा तरीके को लेकर भी सवाल उठाए थे। इससे बाजार के लिए उनकी नीतिगत सोच को समझना मुश्किल हो गया था।
19 अगस्त को ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट द्वारा लंबी अवधि के सरकारी कर्ज की वापस खरीद की घोषणा के बाद स्थिति और जटिल हो गई। इस कदम का एक उद्देश्य लंबी अवधि की दरों को नीचे लाना भी था। इससे वॉर्श की उस सोच पर भी सवाल उठे जिसमें वह बाजार को बिना ज्यादा संकेत दिए खुद दिशा तय करने देने की बात कर रहे थे।
💡 फेड की नीति में मुख्य संकेत
- बाजार संकेत: निवेशकों ने निकट अवधि की दरों पर ज्यादा ध्यान दिया
- महंगाई माप: PCE को आधार बनाए रखने की बात स्पष्ट की गई
- ब्याज दर: फेड के प्रमुख नीतिगत साधनों में बनी हुई है
- बाजार स्वतंत्रता: निवेशकों के अनुमान को पूरी तरह स्वतंत्र नहीं माना गया
- पारदर्शिता: आगे नीतिगत सोच को स्पष्ट रखना महत्वपूर्ण होगा
जैक्सन होल में वॉर्श ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की
जैक्सन होल के भाषण में वॉर्श ने पहले पैदा हुई कुछ उलझनों को दूर करने की कोशिश की। उन्होंने माना कि बाजार से मिलने वाला संकेत पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हो सकता, क्योंकि निवेशक हमेशा यह अनुमान लगाने की कोशिश करते हैं कि फेड अगला कदम क्या उठाएगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि फेड महंगाई मापने के लिए पीसीई को ही आधार बनाए रखेगा। साथ ही उन्होंने बताया कि ब्याज दरें अभी भी फेड के मुख्य साधनों में शामिल हैं।
कुल मिलाकर, वॉर्श ने इस भाषण के जरिए बाजार को अपनी सोच पहले की तुलना में ज्यादा स्पष्ट तरीके से समझाई। इससे यह भी पता चलता है कि केंद्रीय बैंक प्रमुख के लिए बहुत कम बोलना हमेशा आसान नहीं होता। अगर वॉर्श आगे भी बाजार का भरोसा बनाए रखना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी नीतिगत सोच में अधिक पारदर्शिता रखनी पड़ सकती है।
अस्वीकरण: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है और इसे निवेश या वित्तीय सलाह नहीं माना जाना चाहिए।
