भारत जैसे देश में, जहां क्रिकेट को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा होती है, वहां खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर भी अक्सर सवाल उठते रहते हैं। खासतौर पर यो-यो टेस्ट को लेकर यह बहस होती रही है कि क्या टीम में चयन के लिए इसे जरूरी मानना चाहिए।
क्रिकेट में फिटनेस जांचने के लिए कौन से टेस्ट होते हैं
भारत में इस टेस्ट का इस्तेमाल करीब एक दशक पहले शुरू हुआ था। 2017 में श्रीलंका दौरे से पहले तत्कालीन स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच शंकर बसु ने इसे अपनाया था। पूर्व कप्तान विराट कोहली और तत्कालीन कोच रवि शास्त्री ने भी फिटनेस पर काफी जोर दिया था। हालांकि, क्रिकेट जैसे खेल में तकनीक और मानसिक मजबूती भी महत्वपूर्ण होती है, इसलिए केवल फिटनेस टेस्ट के आधार पर खिलाड़ी का मूल्यांकन करने को लेकर हमेशा चर्चा रही है।
यो-यो टेस्ट देखने में आसान लगता है, लेकिन इसे पूरा करना काफी कठिन होता है। इसमें खिलाड़ी को जमीन पर 20 मीटर की दूरी पर लगाए गए दो कोन के बीच बार-बार दौड़ना होता है। दौड़ की शुरुआत बीप की आवाज के साथ होती है और खिलाड़ी को दूसरी तरफ मौजूद कोन तक अगली बीप से पहले पहुंचना होता है। इसके बाद वह वापस शुरुआती स्थान पर आता है। इस तरह आगे-पीछे दौड़ने को एक शटल माना जाता है। जैसे-जैसे स्तर बढ़ता जाता है, दौड़ने की रफ्तार भी बढ़ती जाती है। इस कारण खिलाड़ी को कम समय में ज्यादा तेजी से दिशा बदलनी पड़ती है।
यो-यो टेस्ट का इस्तेमाल कई खेलों में
यह टेस्ट केवल क्रिकेट में ही इस्तेमाल नहीं होता। बास्केटबॉल, टेनिस और फुटबॉल जैसे खेलों में भी इसका उपयोग खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता जांचने के लिए किया जाता है। अलग-अलग जगहों पर इसके कई रूप मौजूद हैं, लेकिन यो-यो इंटरमिटेंट रिकवरी टेस्ट लेवल 1 काफी जाना-पहचाना तरीका है। कई पेशेवर खेल टीमों ने भी इसे खिलाड़ियों की फिटनेस का अंदाजा लगाने के लिए अपनाया है।
🏃 फिटनेस टेस्ट की अहम बातें
- यो-यो टेस्ट: 20 मीटर के बीच बार-बार दौड़ना होता है
- ब्रोंको टेस्ट: 20, 40 और 60 मीटर की दौड़ के सेट पूरे किए जाते हैं
- 2 किलोमीटर दौड़: तय दूरी को कम समय में पूरा करने पर ध्यान
- विंगेट टेस्ट: स्थिर साइकिल पर 30 सेकंड तक पूरी ताकत से पैडल चलाना
- उद्देश्य: खिलाड़ियों की अलग-अलग शारीरिक क्षमताओं का आकलन
ब्रोंको टेस्ट बना दूसरा महत्वपूर्ण विकल्प
समय के साथ फिटनेस विज्ञान में काफी बदलाव आया है और अब खिलाड़ियों की क्षमता जांचने के लिए कई दूसरे तरीके भी मौजूद हैं। इनमें ब्रोंको टेस्ट एक महत्वपूर्ण विकल्प है। इसमें 20, 40 और 60 मीटर की दूरी पर निशान लगाए जाते हैं। खिलाड़ी पहले 20 मीटर तक दौड़कर वापस आता है, फिर 40 मीटर तक जाकर लौटता है और इसके बाद 60 मीटर तक दौड़कर शुरुआती जगह पर वापस आता है। इसे एक सेट माना जाता है। ऐसे पांच सेट बिना आराम के पूरे करने होते हैं, जिससे कुल 1200 मीटर की दौड़ पूरी होती है। अच्छे स्तर के खिलाड़ी इसे पांच मिनट से कम समय में पूरा कर सकते हैं, जबकि छह मिनट से कम समय भी अच्छी फिटनेस का संकेत माना जा सकता है।
ब्रोंको टेस्ट का इस्तेमाल पेशेवर टीमों में बढ़ रहा है, क्योंकि यह केवल फिटनेस मापने का तरीका नहीं है, बल्कि एक अच्छी कंडीशनिंग एक्सरसाइज भी बन सकता है। यो-यो टेस्ट के बाद शरीर को संभलने में अधिक समय लग सकता है, खासकर जब दो मुकाबलों के बीच आराम के लिए पर्याप्त समय न हो। ब्रोंको टेस्ट में गणना और तैयारी आसान होने के कारण कोच खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना आसानी से कर सकते हैं।
⚡ ब्रोंको और दूसरे फिटनेस टेस्ट
- दूरी: 20, 40 और 60 मीटर के निशान का इस्तेमाल
- कुल दौड़: पांच सेट में 1200 मीटर
- अच्छा स्तर: पांच मिनट से कम समय प्रभावशाली माना जा सकता है
- 2 किलोमीटर टेस्ट: कम समय में दूरी पूरी करने की क्षमता जांची जाती है
- विंगेट टेस्ट: साइकिल पर कम समय में अधिकतम ताकत लगाने की क्षमता देखी जाती है
2 किलोमीटर दौड़ से भी फिटनेस का अंदाजा
फिटनेस जांचने का एक सरल तरीका 2 किलोमीटर की दौड़ भी है। इसमें खिलाड़ी को तय दूरी कम से कम समय में पूरी करनी होती है। जितना कम समय लगेगा, सामान्य तौर पर उतनी बेहतर दौड़ने की क्षमता मानी जाती है। हालांकि, कठिन खेलों में खिलाड़ियों के लिए फिटनेस का स्तर भी ज्यादा ऊंचा होना जरूरी होता है।
एक अन्य प्रसिद्ध तरीका विंगेट टेस्ट है, जिसके लिए स्थिर साइकिल की जरूरत होती है। इसमें पहले करीब पांच मिनट तक कम प्रतिरोध के साथ वार्म-अप किया जाता है और बीच में कुछ तेज पैडल चलाने की कोशिश की जाती है। इसके बाद थोड़े आराम के बाद खिलाड़ी को अपने शरीर के वजन के हिसाब से तय प्रतिरोध पर 30 सेकंड तक पूरी ताकत से पैडल चलाना होता है। इससे कम समय में अधिकतम ताकत लगाने की क्षमता और शरीर की विशेष ऊर्जा क्षमता का आकलन किया जाता है।
सामान्य लोग भी देख सकते हैं अपनी फिटनेस
हालांकि ये सभी टेस्ट मुख्य रूप से पेशेवर खिलाड़ियों के लिए बनाए गए हैं, लेकिन सामान्य फिटनेस पसंद करने वाले लोग भी इन्हें अपनी क्षमता समझने के लिए आजमा सकते हैं। इन्हें करते समय अपनी वर्तमान फिटनेस और शरीर की क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है। किसी पेशेवर टीम में चयन का दबाव न होने के कारण इन परीक्षणों को अपनी प्रगति देखने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ महीनों के अंतर पर परिणाम दर्ज करने से यह समझने में मदद मिल सकती है कि आपकी फिटनेस में कितना सुधार हुआ है।
अस्वीकरण: फिटनेस परीक्षण क्षमता के अनुसार करें और जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित विशेषज्ञ की सलाह लें।
