Inherited Shares Tax: 1980s के शेयरों पर 2026 में कितना Tax?

अगर आपके पिता या परिवार के किसी पुराने सदस्य ने 1980 के दशक में शेयर खरीदे थे और बाद में वे शेयर आपको विरासत में मिले हैं, तो 2026 में उन्हें बेचते समय उनकी खरीद कीमत तय करना थोड़ा अलग हो सकता है। खासकर पुराने कागजी शेयरों को बाद में डीमैट खाते में बदलकर बेचने पर कर की गणना करते समय कुछ विशेष नियम लागू होते हैं।

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विरासत में मिले पुराने शेयरों की खरीद कीमत कैसे तय होती है?

विरासत में मिली संपत्ति के मामले में आम तौर पर खरीद कीमत वही मानी जाती है, जिस कीमत पर मूल मालिक ने उस संपत्ति को खरीदा था। हालांकि, अगर मूल मालिक ने संपत्ति 1 अप्रैल 2001 से पहले खरीदी थी, तो लागू नियमों के अनुसार 1 अप्रैल 2001 की उचित बाजार कीमत को खरीद कीमत के स्थान पर लिया जा सकता है।

सूचीबद्ध शेयरों के लिए 1 फरवरी 2018 से पहले खरीदी गई संपत्तियों पर एक अलग विशेष व्यवस्था लागू होती है। इसके तहत खरीद कीमत तय करते समय वास्तविक खरीद कीमत और 31 जनवरी 2018 की उचित बाजार कीमत में से नियमों के अनुसार अधिक राशि को आधार बनाया जाता है। इस व्यवस्था को ग्रैंडफादरिंग नियम कहा जाता है।

अगर किसी व्यक्ति ने 1 फरवरी 2018 से पहले किसी सूचीबद्ध कंपनी के शेयर खरीदे थे और बाद में वे शेयर उसके परिवार के सदस्य को विरासत में मिले, तो इन विशेष नियमों का लाभ केवल इसलिए खत्म नहीं होता कि विरासत 31 जनवरी 2018 के बाद मिली है। इसमें मुख्य बात यह देखी जाती है कि मूल मालिक ने संबंधित शेयर या निवेश कब खरीदा था।

📊 पुराने विरासत वाले शेयरों के टैक्स नियम

  • मूल खरीद: आम तौर पर मूल मालिक की खरीद कीमत महत्वपूर्ण होती है
  • 1 अप्रैल 2001: कुछ पुराने मामलों में उचित बाजार कीमत लागू हो सकती है
  • 1 फरवरी 2018: इससे पहले खरीदे गए सूचीबद्ध शेयरों पर विशेष व्यवस्था लागू हो सकती है
  • 31 जनवरी 2018: उचित बाजार मूल्य कर लागत तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है
  • विरासत: केवल बाद में विरासत मिलने से विशेष नियम अपने आप खत्म नहीं होते

31 जनवरी 2018 का शेयर मूल्य क्यों महत्वपूर्ण है?

सूचीबद्ध शेयरों के मामले में 31 जनवरी 2018 को मान्य बाजार कीमत भी महत्वपूर्ण होती है। यदि निर्धारित शर्तें पूरी होती हैं, तो उस तारीख को मान्यता प्राप्त शेयर बाजार पर दर्ज सबसे ऊंची कीमत को उचित बाजार कीमत तय करने के लिए देखा जा सकता है। इसी आधार पर पुराने शेयरों की कर गणना में विशेष मूल्य लागू हो सकता है।

उदाहरण के तौर पर, अगर किसी पिता ने 1980 के दशक में किसी सूचीबद्ध कंपनी के शेयर खरीदे थे और बाद में वे शेयर बेटे या बेटी को विरासत में मिले, तो 2026 में बिक्री के समय केवल पुरानी खरीद कीमत को देखकर कर की गणना नहीं की जाएगी। संबंधित तारीखों और 31 जनवरी 2018 के मूल्य को भी ध्यान में रखना होगा।

हालांकि, इन सूचीबद्ध शेयरों और इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड इकाइयों पर इंडेक्सेशन का लाभ उपलब्ध नहीं है। ऐसे निवेश से होने वाले दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर लागू नियमों के अनुसार 12.5 प्रतिशत की दर से कर लगाया जाता है। इस व्यवस्था में ₹1.25 लाख तक के कुल वार्षिक दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर छूट की सीमा लागू होती है। यह सीमा हर निवेश के लिए अलग-अलग नहीं होती, बल्कि संबंधित सभी पात्र निवेशों से हुए कुल लाभ पर देखी जाती है।

⚠️ पुराने शेयर बेचने से पहले ये बातें जांचें

  • मूल खरीद तारीख: मूल मालिक ने शेयर कब खरीदे थे
  • मूल खरीद रिकॉर्ड: पुराने प्रमाण और दस्तावेज सुरक्षित रखें
  • 31 जनवरी 2018 मूल्य: लागू उचित बाजार मूल्य की जांच करें
  • विरासत दस्तावेज: स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड संभालकर रखें
  • डीमैट रिकॉर्ड: शेयरों के इलेक्ट्रॉनिक विवरण को सुरक्षित रखें
  • कर नियम: बिक्री के समय लागू नियमों के अनुसार गणना करें

कागजी शेयरों को डीमैट में बदलने का क्या असर होता है?

इसलिए पुराने विरासत में मिले शेयर बेचते समय मूल मालिक की खरीद तारीख, 31 जनवरी 2018 का मूल्य, विरासत से जुड़े नियम और बिक्री के समय लागू कर व्यवस्था को ध्यान में रखना जरूरी है। केवल कागजी शेयरों को बाद में डीमैट में बदलने से उनकी मूल खरीद का इतिहास नहीं बदलता। सही कर गणना के लिए संबंधित दस्तावेज और उस समय लागू नियमों की जांच करना जरूरी है।

5 FAQs

1. पुराने पारिवारिक शेयर बेचते समय किन तारीखों को देखना चाहिए?

पुराने शेयरों की टैक्स गणना में मूल खरीद की तारीख सबसे अहम जानकारी में शामिल होती है। इसके साथ 1 अप्रैल 2001 और 31 जनवरी 2018 जैसी निर्धारित तारीखों से जुड़े नियम भी देखे जा सकते हैं। इसलिए पुराने खरीद रिकॉर्ड संभालकर रखना जरूरी है।

2. पिता के शेयर बच्चों को मिलने पर टैक्स की लागत कैसे देखी जाती है?

विरासत में शेयर मिलने पर बच्चे के लिए लागत तय करने में आम तौर पर उस व्यक्ति की मूल लागत को आधार बनाया जाता है, जिससे संपत्ति मिली थी। पुराने शेयरों के लिए विशेष कर प्रावधान लागू हो सकते हैं, इसलिए केवल विरासत मिलने की तारीख देखना पर्याप्त नहीं है।

3. कागजी शेयरों को ऑनलाइन खाते में बदलने पर क्या फर्क पड़ता है?

फिजिकल शेयरों को डीमैट खाते में बदलना मुख्य रूप से उनकी इलेक्ट्रॉनिक होल्डिंग से जुड़ा बदलाव है। इससे पुराने निवेश की खरीद संबंधी जानकारी अपने आप नई नहीं हो जाती। बिक्री से पहले शेयर प्रमाणपत्र, पुराने रिकॉर्ड और विरासत से जुड़े दस्तावेजों को मिलाना उपयोगी रहता है।

4. 31 जनवरी 2018 का शेयर मूल्य टैक्स गणना में कैसे काम आता है?

कुछ पुराने सूचीबद्ध शेयरों के लिए 31 जनवरी 2018 का उचित बाजार मूल्य लागत निर्धारित करने में विशेष भूमिका निभा सकता है। लागू grandfathering व्यवस्था के अनुसार वास्तविक लागत और निर्धारित मूल्य के बीच नियमों के आधार पर लागत तय की जाती है।

5. विरासत में मिले शेयर बेचने से पहले कौन से दस्तावेज रखने चाहिए?

पुराने शेयर प्रमाणपत्र, मूल खरीद से संबंधित रिकॉर्ड, विरासत या उत्तराधिकार का प्रमाण, डीमैट विवरण और बिक्री से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखना बेहतर है। इन रिकॉर्ड से शेयरों की पुरानी लागत और स्वामित्व का इतिहास समझने में मदद मिल सकती है।

Conclusion

दशकों पुराने विरासत वाले शेयरों की बिक्री में केवल मौजूदा बाजार कीमत देखना पर्याप्त नहीं होता। मूल खरीद, निर्धारित तारीखों के मूल्य और विरासत से जुड़े दस्तावेज भी महत्वपूर्ण हैं। सही रिकॉर्ड रखने से बिक्री के समय लागत और संभावित कर की गणना अधिक स्पष्ट हो सकती है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य है, व्यक्तिगत कर सलाह नहीं है और लागू नियमों की विशेषज्ञ से पुष्टि करें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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