अमेरिका में मेमोरी चिप की घरेलू उपलब्धता को लेकर बड़ी चुनौती बनी हुई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के कारण इन चिप की मांग तेजी से बढ़ी है और उनकी कीमत भी ऊपर गई है। इसी बीच अमेरिकी सरकार विदेशों से आने वाली चिप पर टैरिफ लगाने की तैयारी कर रही है, जिसका उद्देश्य देश में उत्पादन बढ़ाने के लिए कंपनियों को निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है।
अमेरिका में मेमोरी चिप उत्पादन की स्थिति
अमेरिका में मेमोरी चिप बनाने की घरेलू क्षमता अभी काफी सीमित है। देश में फिलहाल वर्जीनिया में माइक्रोन की एक व्यावसायिक उत्पादन इकाई है, जहां मुख्य रूप से पुराने प्रकार की चिप बनाई जाती हैं। इनका इस्तेमाल वाहन, विमानन, रक्षा और औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है। दूसरी ओर, आधुनिक एआई सिस्टम के लिए जरूरी उन्नत मेमोरी का बड़ा हिस्सा एशिया में मौजूद कारखानों से आता है।
सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स, एसके हाइनिक्स और माइक्रोन जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मेमोरी चिप की कमी अगले 12 महीनों से लेकर कई वर्षों तक बनी रह सकती है। ऐसे में विदेशों से आने वाली चिप पर शुल्क बढ़ने से अमेरिकी कंपनियों के लिए लागत और बढ़ सकती है।
मेमोरी चिप को लेकर अहम बातें
- एआई के बढ़ते इस्तेमाल से उन्नत मेमोरी चिप की मांग बढ़ी है।
- अमेरिका की घरेलू मेमोरी चिप उत्पादन क्षमता अभी सीमित है।
- उन्नत मेमोरी की सप्लाई का बड़ा हिस्सा एशियाई कारखानों से आता है।
- टैरिफ बढ़ने पर अमेरिकी कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी सप्लाई पर निर्भरता
अमेरिका की विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसी कारण से विदेशी आपूर्ति बाधित होती है, तो इसका असर कारोबार, रक्षा क्षेत्र और एआई से जुड़ी तकनीकी क्षमता पर पड़ सकता है। अमेरिकी सरकार का एक प्रमुख उद्देश्य एआई के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखना है, खासकर चीन के साथ बढ़ती तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच।
मेमोरी चिप पर टैरिफ बढ़ाने की तैयारी
वाणिज्य विभाग की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जांच के बाद जनवरी में कुछ आयातित चिप पर शुल्क लगाया गया था। हालांकि, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाली कुछ चिप को इससे छूट दी गई थी। अब सरकार इन शुल्कों का दायरा बढ़ाने पर विचार कर रही है। अमेरिकी जमीन पर उत्पादन शुरू करने वाली विदेशी कंपनियों को कुछ राहत मिलने की संभावना भी बताई गई है।
माइक्रोन का अमेरिका में बड़ा निवेश
अमेरिका में मेमोरी चिप उत्पादन बढ़ाने की कोशिश पहले ही शुरू हो चुकी थी। माइक्रोन ने 2035 तक अमेरिका में नई उत्पादन इकाइयों और तकनीकी निवेश पर करीब 250 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बनाई है। कंपनी की इडाहो में बन रही दो नई इकाइयों में से एक में अगले साल के मध्य से उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ने की उम्मीद है। न्यूयॉर्क में कंपनी की बड़ी परियोजना से उत्पादन 2030 से शुरू होने की संभावना है।
हालांकि, केवल अमेरिका में चिप बनाना पर्याप्त नहीं है। माइक्रोन फिलहाल अमेरिका में बनाई गई चिप को अंतिम पैकेजिंग के लिए एशिया भेजता है। हाई-बैंडविड्थ मेमोरी यानी एचबीएम तैयार करने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है। एचबीएम का इस्तेमाल एआई मॉडल की ट्रेनिंग और संचालन में किया जाता है। माइक्रोन अमेरिका में भी ऐसी पैकेजिंग सुविधा शुरू करना चाहता है, लेकिन यह काम इडाहो की दूसरी इकाई के 2028 के अंत तक पूरा होने के बाद आगे बढ़ेगा।
अमेरिकी चिप निवेश की प्रमुख योजनाएं
- माइक्रोन ने 2035 तक अमेरिका में करीब 250 अरब डॉलर के निवेश की योजना बनाई है।
- इडाहो में नई उत्पादन इकाइयों पर काम चल रहा है।
- न्यूयॉर्क परियोजना से 2030 से उत्पादन शुरू होने की संभावना है।
- अमेरिका में एचबीएम पैकेजिंग क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
एसके हाइनिक्स और सैमसंग की अमेरिकी योजनाएं
एसके हाइनिक्स भी अमेरिका में एचबीएम पैकेजिंग की पहली सुविधा तैयार कर रही है। इसका निर्माण हाल में शुरू हुआ है और इसके 2028 में तैयार होने की उम्मीद है। बड़े स्तर पर उत्पादन इसके अगले साल शुरू होने की संभावना है। कंपनी एचबीएम बनाने के लिए जरूरी मेमोरी दक्षिण कोरिया से अमेरिका भेजेगी।
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि माइक्रोन और एसके हाइनिक्स की अमेरिकी निवेश योजनाओं के कारण उन्हें प्रस्तावित शुल्क से पूरी या आंशिक छूट मिलेगी या नहीं। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने भी अमेरिका में चिप उत्पादन के लिए अरबों डॉलर के निवेश की तैयारी की है, हालांकि उसकी मौजूदा योजना मुख्य रूप से मेमोरी चिप पर केंद्रित नहीं है।
टैरिफ बढ़ने से कीमतों और व्यापार पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, चिप पर अधिक शुल्क लगाए जाने से सेमीकंडक्टर की कीमत बढ़ सकती है और उन देशों के साथ व्यापारिक तनाव भी बढ़ सकता है, जिनकी मदद अमेरिका को एआई क्षेत्र में अपनी क्षमता बनाए रखने के लिए चाहिए। दूसरी ओर, अमेरिकी सरकार का कहना है कि उसकी रणनीति का उद्देश्य महत्वपूर्ण उत्पादन को देश में वापस लाना और उद्योग से बड़े निवेश आकर्षित करना है।
महंगे हो रहे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद
मेमोरी चिप की बढ़ती कीमत का असर आम उपभोक्ताओं पर भी दिखाई दे रहा है। इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली कंपनियों की लागत बढ़ने से कई उत्पाद महंगे हुए हैं। एप्पल ने भी मेमोरी की बढ़ी कीमतों का हवाला देते हुए अपने मैक कंप्यूटर और आईपैड की कीमतों में वृद्धि की है। इस साल के आईफोन 18 प्रो और प्रो मैक्स मॉडल की कीमत पिछले साल के मॉडल की तुलना में 100 डॉलर अधिक बताई गई है।
अमेरिका में चिप की कमी तुरंत दूर करना मुश्किल
नई सेमीकंडक्टर फैक्ट्री बनाने में करीब 20 अरब डॉलर या उससे भी अधिक खर्च हो सकता है और ऐसी इकाइयों को तैयार होने में कई साल लगते हैं। इसलिए अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने की योजनाओं के बावजूद, घरेलू मेमोरी चिप की कमी को तुरंत दूर करना आसान नहीं होगा।
5 FAQs
1. अमेरिका में मेमोरी चिप की मांग क्यों बढ़ रही है?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के कारण उन्नत मेमोरी चिप की मांग तेजी से बढ़ रही है। एआई मॉडल की ट्रेनिंग और संचालन में हाई-बैंडविड्थ मेमोरी का महत्वपूर्ण इस्तेमाल होता है।
2. अमेरिका मेमोरी चिप पर टैरिफ क्यों बढ़ाना चाहता है?
अमेरिकी सरकार का उद्देश्य घरेलू सेमीकंडक्टर उत्पादन बढ़ाना और कंपनियों को देश में नई उत्पादन इकाइयों तथा तकनीकी सुविधाओं में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है।
3. एचबीएम क्या है?
एचबीएम यानी हाई-बैंडविड्थ मेमोरी एक उन्नत प्रकार की मेमोरी है, जिसका इस्तेमाल एआई मॉडल की ट्रेनिंग और संचालन सहित कई आधुनिक कंप्यूटिंग कार्यों में किया जाता है।
4. माइक्रोन अमेरिका में कितना निवेश करने की योजना बना रही है?
माइक्रोन ने 2035 तक अमेरिका में नई उत्पादन इकाइयों और तकनीकी निवेश पर करीब 250 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बनाई है।
5. क्या अमेरिका में मेमोरी चिप की कमी जल्दी खत्म हो सकती है?
नई सेमीकंडक्टर फैक्ट्री बनाने में कई साल लग सकते हैं और इसके लिए बड़े निवेश की जरूरत होती है। इसलिए घरेलू उत्पादन बढ़ने के बावजूद कमी तुरंत खत्म होना आसान नहीं है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है। निवेश या कारोबारी निर्णय से पहले आधिकारिक स्रोतों की जानकारी जरूर जांचें।
