इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कमजोर प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी को अप्रैल-जून तिमाही में 1,141.09 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में कंपनी ने 6,808.12 करोड़ रुपये का लाभ कमाया था। कंपनी के अनुसार, पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से मिलने वाले मार्जिन में कमी आने के कारण यह नुकसान हुआ है।
IOCL को पहली तिमाही में घाटा
हालांकि कंपनी की कुल आय में बढ़ोतरी देखने को मिली है। अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का Revenue बढ़कर 2.82 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल की समान तिमाही के 2.21 लाख करोड़ रुपये से करीब 27 प्रतिशत अधिक है। कंपनी की कुल आय में भी सालाना आधार पर 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
आईओसीएल ने बताया कि तिमाही के दौरान रिफाइनरी उत्पादन में भी सुधार हुआ। कंपनी का रिफाइनरी थ्रूपुट 19.165 मिलियन टन रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के 18.683 मिलियन टन से करीब 3 प्रतिशत अधिक है। घरेलू बिक्री में भी हल्की बढ़ोतरी हुई और यह 25.252 मिलियन टन पर पहुंच गई, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 24.973 मिलियन टन था।
IOCL जून 2026 तिमाही के प्रमुख आंकड़े
- शुद्ध घाटा: 1,141.09 करोड़ रुपये
- पिछले साल लाभ: 6,808.12 करोड़ रुपये
- Revenue: 2.82 लाख करोड़ रुपये
- Revenue वृद्धि: 27 प्रतिशत
- रिफाइनरी उत्पादन: 19.165 मिलियन टन
- घरेलू बिक्री: 25.252 मिलियन टन
निर्यात और मार्जिन पर दबाव
दूसरी ओर, कंपनी के निर्यात कारोबार पर दबाव देखने को मिला। पहली तिमाही में निर्यात 29 प्रतिशत घटकर 0.959 मिलियन टन रह गया। कंपनी ने बताया कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का असर कारोबार पर पड़ा है।
आईओसीएल के अनुसार, मौजूदा तिमाही में नुकसान का मुख्य कारण कुछ पेट्रोलियम उत्पादों पर कम Margin रहना रहा। हालांकि बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन से कुछ राहत मिली, लेकिन बिक्री से होने वाली कमाई में आई कमी की भरपाई नहीं हो सकी।
तेल कंपनियों को अप्रैल और मई महीने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, महंगा परिवहन खर्च, कमजोर रुपये और खुदरा कीमतों में देरी से बदलाव जैसे कारणों ने कंपनियों के मुनाफे को प्रभावित किया। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण वैश्विक तेल बाजार में भी काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
IOCL के सामने प्रमुख चुनौतियां
- कम Margin: पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से कम कमाई
- कच्चा तेल: कीमतों में उतार-चढ़ाव
- वैश्विक तनाव: तेल बाजार पर दबाव
- निर्यात: 29 प्रतिशत की गिरावट
- सरकारी सहायता: LPG नुकसान की भरपाई के लिए 3,621.51 करोड़ रुपये शामिल
कच्चे तेल की कीमतों का असर
कच्चे तेल की कीमतों में इस दौरान काफी तेजी और गिरावट देखने को मिली। अप्रैल में अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 90 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई थी, लेकिन तनाव बढ़ने की आशंका के कारण यह अप्रैल के अंत में 126.41 डॉलर प्रति बैरल के चार साल के उच्च स्तर तक पहुंच गई। इसके बाद मई और जून में कीमतों में फिर गिरावट दर्ज की गई।
कंपनी को घरेलू एलपीजी बिक्री पर हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार की ओर से सहायता भी मिली है। तेल मंत्रालय ने पहले 14,486 करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूरी दी थी। इसमें अप्रैल 2026 से जून 2026 तक की अवधि के लिए 3,621.51 करोड़ रुपये की राशि को कंपनी ने अपनी आय में शामिल किया है।
आगे कंपनी के प्रदर्शन पर नजर
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर से अस्थिरता बढ़ गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़े तनाव के कारण तेल बाजार पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक घटनाक्रम सरकारी तेल कंपनियों के प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाएंगे।
