दिल्ली हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है, जिसमें ऐसे लोगों को बिना ITR दाखिल किए TDS का रिफंड देने की मांग की गई है, जिन पर कोई आयकर देनदारी नहीं बनती। फिलहाल आयकर कानून के तहत टैक्स रिफंड पाने के लिए रिटर्न दाखिल करना जरूरी है। याचिका में कहा गया है कि जिन लोगों की कुल कर देनदारी शून्य है, उन्हें केवल अपना कटा हुआ टैक्स वापस लेने के लिए रिटर्न भरने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है।
ITR के बिना TDS Refund की मांग पर दिल्ली हाईकोर्ट का नोटिस
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर 2026 को करेगी। याचिकाकर्ता का कहना है कि हर साल कई कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और बैंक ग्राहकों की आय से पहले ही टैक्स काट लिया जाता है, लेकिन बाद में छूट और कटौतियों को जोड़ने पर उनकी कर देनदारी नहीं बचती। इसके बावजूद उन्हें अपना पैसा वापस पाने के लिए रिटर्न दाखिल करना पड़ता है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि सरकार के पास पहले से ही पैन, आधार, फॉर्म 26एएस और टैक्स कटौती से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध रहती है। ऐसे में जिन लोगों पर कोई टैक्स नहीं बनता, उनका रिफंड अपने आप जारी किया जा सकता है। इससे आम लोगों पर अनुपालन का बोझ कम होगा और उन्हें समय पर उनका पैसा मिल सकेगा।
📑 ITR के बिना TDS Refund याचिका की मुख्य बातें
- मामला: ITR दाखिल किए बिना TDS रिफंड की मांग
- अदालत: दिल्ली हाईकोर्ट
- नोटिस: केंद्र सरकार से जवाब तलब
- अगली सुनवाई: 6 नवंबर 2026
- दलील: शून्य टैक्स देनदारी वालों को स्वतः रिफंड मिले
याचिका में क्या कहा गया है?
याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि सरकार और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ऐसी व्यवस्था लागू करें, जिसमें पात्र लोगों को बिना अलग से आवेदन या रिटर्न दाखिल किए उनका कटा हुआ टैक्स वापस मिल सके। उनका कहना है कि इससे अनावश्यक प्रक्रिया कम होगी और लोगों को राहत मिलेगी।
याचिका के अनुसार मौजूदा व्यवस्था का सबसे ज्यादा असर वरिष्ठ नागरिकों, कम आय वाले कर्मचारियों और ऐसे लोगों पर पड़ता है, जिन्हें ऑनलाइन प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं होती। कई लोग केवल छोटे से रिफंड के लिए रिटर्न दाखिल नहीं कर पाते और उनका पैसा सरकार के पास ही रह जाता है।
💰 HRA और TDS से जुड़े अहम अपडेट
- TDS डेटा: विभाग के पास पहले से उपलब्ध
- तकनीक: Data Matching और Digital Verification
- HRA नियम: एक ही सरकारी आवास पर दूसरे कर्मचारी को HRA नहीं
- सरकार का रुख: मौजूदा नियम में बदलाव का प्रस्ताव नहीं
- उद्देश्य: मौजूदा नियमों का पालन
HRA नियम पर सरकार ने दोहराया रुख
याचिका में आयकर विभाग के उपलब्ध आंकड़ों का भी हवाला दिया गया है। इसमें दावा किया गया है कि करोड़ों लोगों के खाते में TDS तो दर्ज है लेकिन उन्होंने ITR दाखिल नहीं किया, जबकि उनमें से बड़ी संख्या ऐसे लोगों की हो सकती है जिन पर कोई टैक्स देनदारी नहीं थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि विभाग के पास टैक्स चोरी पकड़ने और रिटर्न नहीं भरने वालों की पहचान करने के लिए आधुनिक तकनीक मौजूद है, इसलिए अतिरिक्त टैक्स लौटाने के लिए भी ऐसी तकनीक का उपयोग किया जा सकता है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि संसद की एक चयन समिति ने आयकर विधेयक पर विचार करते समय रिफंड के लिए रिटर्न दाखिल करने की अनिवार्यता हटाने की सिफारिश की थी। हालांकि अंतिम कानून में इस सुझाव को शामिल नहीं किया गया। अब इस मामले में हाईकोर्ट केंद्र सरकार का पक्ष सुनने के बाद आगे का फैसला करेगा।
इसी बीच केंद्र सरकार ने HRA को लेकर भी अपनी मौजूदा नीति दोहराई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि पति-पत्नी दोनों केंद्रीय कर्मचारी हैं और एक ही स्थान पर तैनात हैं, तथा उनमें से किसी एक को सरकारी आवास मिल चुका है, तो दूसरे कर्मचारी को मकान किराया भत्ता नहीं मिलेगा। सरकार का कहना है कि जब परिवार को पहले से सरकारी आवास उपलब्ध है, तब अलग से किराया खर्च नहीं माना जाएगा। सरकार ने यह भी साफ किया कि इस नियम में बदलाव का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।
Disclaimer: यह जानकारी सार्वजनिक रिपोर्टों और न्यायालय में लंबित मामले पर आधारित है। अंतिम निर्णय अदालत के आदेश और सरकारी अधिसूचना के अनुसार होगा।
