ITR भरने के बाद 30 दिन में करें वेरिफाई, नहीं तो नुकसान

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने के बाद उसका समय पर वेरिफिकेशन करना उतना ही जरूरी है जितना रिटर्न भरना। अगर 30 दिनों के भीतर ITR वेरिफाई नहीं किया जाता, तो रिटर्न अमान्य माना जा सकता है, जिससे रिफंड, जुर्माना और अन्य टैक्स संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।

अगर आपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल कर दिया है, तो सिर्फ रिटर्न भरना ही काफी नहीं है। रिटर्न जमा करने के बाद उसे 30 दिनों के भीतर वेरिफाई करना भी जरूरी होता है। अगर तय समय के अंदर वेरिफिकेशन नहीं किया जाता, तो आयकर विभाग उस ITR को अमान्य (Invalid) मान सकता है। ऐसे में रिफंड मिलने में देरी हो सकती है और कुछ मामलों में जुर्माना भी देना पड़ सकता है।

ITR वेरिफिकेशन क्यों जरूरी है

ITR वेरिफिकेशन वह अंतिम प्रक्रिया है, जिसके जरिए करदाता यह पुष्टि करता है कि रिटर्न में दी गई जानकारी सही और पूरी है। वेरिफिकेशन के बाद ही आयकर विभाग रिटर्न को प्रोसेस करता है, रिफंड जारी करता है और अन्य जरूरी कार्रवाई आगे बढ़ती है।

आयकर कानून के अनुसार, अगर ITR समय पर वेरिफाई नहीं किया जाता और बाद में वेरिफिकेशन होता है, तो रिटर्न की तारीख वेरिफिकेशन की तारीख मानी जा सकती है। ऐसी स्थिति में यदि रिटर्न निर्धारित समय सीमा के बाद माना जाता है, तो धारा 234F के तहत जुर्माना लग सकता है। जिन करदाताओं की कुल आय ₹5 लाख से अधिक है, उन्हें ₹5,000 तक का शुल्क देना पड़ सकता है। वहीं, ₹5 लाख तक की आय वाले लोगों के लिए यह शुल्क ₹1,000 तक हो सकता है।

📄 ITR वेरिफिकेशन एक नजर में

  • समय सीमा: ITR दाखिल करने के 30 दिनों के भीतर
  • जरूरी क्यों: रिटर्न प्रोसेस और रिफंड के लिए
  • वेरिफिकेशन नहीं होने पर: ITR अमान्य माना जा सकता है
  • संभावित जुर्माना: धारा 234F के तहत
  • रिफंड: वेरिफिकेशन के बाद ही जारी होता है
  • स्थिति: समय पर वेरिफिकेशन करना जरूरी

कई लोग यह समझ लेते हैं कि ऑनलाइन ITR जमा करने के बाद प्रक्रिया पूरी हो गई है, जबकि वेरिफिकेशन अलग और अनिवार्य चरण है। आधार से मोबाइल नंबर लिंक न होना, OTP न मिलना, ई-फाइलिंग पोर्टल पर तकनीकी दिक्कत या भूल जाना भी वेरिफिकेशन में देरी की वजह बन सकता है।

अगर 30 दिन की समय सीमा निकल जाती है, तो करदाता देरी माफ करने (Condonation of Delay) के लिए आयकर विभाग से अनुरोध कर सकता है और देरी का सही कारण बता सकता है। यदि विभाग अनुरोध स्वीकार कर लेता है, तो वेरिफिकेशन मान्य हो सकता है। इसके अलावा, हस्ताक्षर किया हुआ ITR-V फॉर्म केंद्रीय प्रोसेसिंग केंद्र (CPC) भेजकर भी वेरिफिकेशन किया जा सकता है।

 

✅ वेरिफिकेशन के विकल्प

  • आधार OTP: ऑनलाइन ई-वेरिफिकेशन
  • नेट बैंकिंग: ई-वेरिफिकेशन सुविधा
  • EVC: इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड
  • ITR-V: CPC को हस्ताक्षरित फॉर्म भेजकर
  • देरी होने पर: Condonation of Delay का अनुरोध
  • उद्देश्य: ITR को वैध बनाए रखना

समय पर वेरिफिकेशन से क्या फायदा होगा

बिना वेरिफाई किए गए ITR पर आयकर विभाग रिफंड जारी नहीं करता। साथ ही, कारोबार या पूंजीगत लाभ से जुड़े कुछ नुकसान (Losses) को अगले वर्षों में आगे ले जाने का लाभ भी नहीं मिल सकता। यदि कोई टैक्स बकाया है, तो उस पर ब्याज भी बढ़ता रह सकता है।

इसलिए ITR जमा करने के तुरंत बाद आधार OTP, नेट बैंकिंग, इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) या अन्य उपलब्ध माध्यमों से वेरिफिकेशन कर लेना बेहतर है। समय पर वेरिफिकेशन करने से रिफंड जल्दी मिलता है और जुर्माने या अन्य कानूनी परेशानियों से भी बचा जा सकता है।

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I’m Gourav Kumar Singh, a graduate by education and a blogger by passion. Since starting my blogging journey in 2020, I have worked in digital marketing and content creation. Read more about me.

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