झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर चल रहे छात्रों के विरोध के बीच राज्य सरकार ने प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों से बातचीत तेज कर दी है। शनिवार को सरकार के प्रतिनिधियों ने अलग-अलग छात्र संगठनों और प्रदर्शनकारियों के साथ लगातार बैठकें कीं। बैठक के बाद राज्य के मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि छात्रों की सभी मांगें जायज हैं और उनकी समस्याओं को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने रखा जाएगा।
झारखंड में छात्रों से सरकार की बातचीत तेज
रांची के स्टेट गेस्ट हाउस में सरकार के पांच सदस्यीय दल ने छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत की। इस दल में तीन मंत्री भी शामिल थे। सबसे पहले जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले छात्रों के समूह से चर्चा हुई। इसके बाद कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन NSUI, एसीएस और झारखंड छात्र मोर्चा के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक की गई।
छात्रों का विरोध भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं को लेकर है। देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले समूह ने 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग परीक्षा को रद्द करने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी सभी प्रमुख मांगों पर फैसला नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
📋 छात्रों की प्रमुख मांगें
- 14वीं जेपीएससी परीक्षा: परीक्षा रद्द करने की मांग
- परीक्षाओं की जांच: संदिग्ध JPSC और JSSC परीक्षाओं की जांच
- पारदर्शिता: परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग
- भर्ती कैलेंडर: परीक्षाओं के लिए तय कैलेंडर जारी करने की मांग
- जवाबदेही: अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग
छात्र संगठनों ने रखीं अलग-अलग मांगें
झारखंड छात्र मोर्चा ने भी सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने की मांग प्रमुख है। वहीं NSUI ने संदेह के घेरे में आई सभी JPSC और JSSC परीक्षाओं की 90 दिनों के भीतर जांच कराने और राज्य में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा एजेंसी की तरह अलग परीक्षा संस्था बनाने की मांग की है।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों की अन्य मांगों में 2019 के बाद हुई विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की जांच, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और परीक्षा प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता शामिल है। छात्र वर्गवार कटऑफ, ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिका से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग भी कर रहा है।
अभ्यर्थियों ने भर्ती परीक्षाओं के लिए एक तय कैलेंडर जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे छात्रों को परीक्षा और भर्ती की तैयारी पहले से करने में मदद मिलेगी। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि भर्ती व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया जाए।
सरकार ने सुझाव देने के लिए जारी किया Email
सरकार ने छात्रों और दूसरे संबंधित लोगों से सुझाव लेने के लिए एक अलग Email भी जारी किया है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि छात्र, आम लोग और अन्य संबंधित पक्ष अपनी राय इस माध्यम से सरकार तक पहुंचा सकते हैं। सरकार इन सुझावों के आधार पर भर्ती प्रक्रिया में सुधार की नीति तैयार करने की बात कह रही है।
🧑🎓 आंदोलन और सरकार की बातचीत
- आंदोलन की शुरुआत: 5 जुलाई से विरोध प्रदर्शन जारी
- मुख्य मुद्दा: 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताएं
- सरकारी पहल: छात्र संगठनों के साथ लगातार बैठकें
- सुझाव: छात्रों और संबंधित पक्षों से राय लेने की व्यवस्था
- वर्तमान स्थिति: मांगों पर ठोस फैसला होने तक आंदोलन जारी रखने की बात
सरकार ने सामूहिक समाधान की बात कही
सरकार का कहना है कि वह अलग-अलग छात्र संगठनों और अन्य पक्षों से बातचीत जारी रखेगी। सरकार सभी समूहों की बात सुनकर किसी सामूहिक समाधान तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
यह आंदोलन 5 जुलाई से लगातार जारी है। छात्रों का आरोप है कि 2 जुलाई को हुई 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कई तरह की अनियमितताएं सामने आई थीं। इसके बाद अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। अब यह आंदोलन कई दिनों से चल रहा है और कुछ छात्र भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं।
प्रदर्शन स्थल पर छात्रों की स्वास्थ्य जांच
शनिवार को प्रदर्शन स्थल पर मौजूद छात्रों के स्वास्थ्य की भी जांच की गई। इस बीच सरकार और छात्रों के बीच बातचीत शुरू होने से विवाद के समाधान की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने साफ किया है कि उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला होने तक आंदोलन जारी रहेगा।