सोशल मीडिया पर झारखंड संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2025 को स्थगित किए जाने का दावा करने वाला एक नोटिस तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि झारखंड सरकार ने साफ कर दिया है कि यह नोटिस पूरी तरह फर्जी है। अभ्यर्थियों से अपील की गई है कि वे इस तरह के भ्रामक संदेशों पर भरोसा न करें और बिना पुष्टि किए उन्हें आगे साझा भी न करें।
यदि आप JPSC संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2025 की तैयारी कर रहे हैं, तो केवल आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें। सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी नोटिस की पुष्टि किए बिना उसे सही न मानें।
JPSC मुख्य परीक्षा 2025 स्थगित होने का वायरल दावा फर्जी
वायरल नोटिस में दावा किया गया था कि सरकारी निर्देशों और परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं के कारण JPSC संयुक्त सिविल सेवा मुख्य लिखित परीक्षा 2025 को अगले आदेश तक टाल दिया गया है। लेकिन आयोग की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। इसलिए परीक्षा की तारीख में फिलहाल किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।
📢 JPSC परीक्षा 2025 अपडेट
- परीक्षा: JPSC संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2025
- वायरल दावा: परीक्षा स्थगित होने की बात
- स्थिति: दावा पूरी तरह फर्जी
- आयोग का रुख: कोई आधिकारिक स्थगन आदेश जारी नहीं
- सलाह: केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें
- अभ्यर्थी: तैयारी पहले की तरह जारी रखें
आधिकारिक सूचना पर ही करें भरोसा
आयोग ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे केवल आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें। परीक्षा कार्यक्रम, प्रवेश पत्र और अन्य जरूरी जानकारी के लिए केवल Official वेबसाइट और आयोग के अधिकृत माध्यमों से जारी सूचना को ही सही माना जाए। जब तक आयोग नई सूचना जारी नहीं करता, उम्मीदवार अपनी तैयारी पहले की तरह जारी रखें।
पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं से पहले सोशल मीडिया पर फर्जी नोटिस और गलत दावे तेजी से फैलाए जाते हैं। ऐसे संदेश कई बार अभ्यर्थियों में भ्रम और चिंता पैदा कर देते हैं। इसलिए किसी भी सूचना को सही मानने से पहले उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी है।
⚖️ JPSC विवाद और प्रमुख आरोप
- आरोप: भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं का दावा
- कटऑफ: सार्वजनिक नहीं किए जाने का आरोप
- OMR: उत्तर पुस्तिकाओं के वायरल होने का दावा
- CBI जांच: निष्पक्ष जांच की मांग
- JMM का जवाब: आरोपों को राजनीतिक बताया
- मौजूदा स्थिति: परीक्षा स्थगित नहीं हुई है
JPSC को लेकर राजनीतिक बयानबाजी
इस बीच झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपाई सोरेन ने JPSC की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में कई अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी दिखाई दे रही है। उनके अनुसार कटऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए गए, कुछ परिणामों में आवश्यक हस्ताक्षर नहीं थे और कथित तौर पर OMR उत्तर पुस्तिकाएं सोशल मीडिया पर वायरल हुईं।
चंपाई सोरेन ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए CBI से जांच कराने की मांग भी की है। उनका कहना है कि स्वतंत्र जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार उम्मीदवारों की शिकायतों का समाधान करने के बजाय विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है।
वहीं सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इन आरोपों को राजनीतिक बताया है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रहा है। फिलहाल परीक्षा स्थगित होने की खबर पूरी तरह गलत है और आयोग की ओर से कोई नई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। ऐसे में अभ्यर्थियों को केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए और अफवाहों से बचना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और सार्वजनिक रिपोर्टों पर आधारित है। किसी भी नए अपडेट के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें।
