कर्नाटक में करीब 2,459 करोड़ रुपये की कथित निवेश धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने पांच व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ अदालत में शिकायत दर्ज कराई है। इस मामले में 35 हजार से अधिक निवेशकों के प्रभावित होने का आरोप है।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस योजना के जरिए लोगों को हर महीने तीन प्रतिशत निश्चित लाभ देने का वादा किया गया था। मामले के कथित मुख्य आरोपी शिवानंद सिद्धप्पा नीलन्नावर को 13 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। यह शिकायत 9 अक्टूबर को मंगलुरु की तृतीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत में दाखिल की गई।
निवेशकों को हर महीने तीन प्रतिशत लाभ का वादा
जांच एजेंसी का आरोप है कि शिवानंद नीलन्नावर और उसके सहयोगियों ने निवेशकों से कुल 2,459.49 करोड़ रुपये जुटाए थे। लोगों को निवेश पर हर महीने तीन प्रतिशत लाभ देने के साथ नए निवेशक जोड़ने पर 0.5 प्रतिशत अतिरिक्त कमीशन देने का लालच दिया गया था। इस व्यवस्था के तहत जुड़े लोगों को दूसरे निवेशकों को लाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था। एजेंसी के मुताबिक, इस तरह अधिक लोगों को योजना से जोड़कर बड़ी रकम एकत्र की गई।
मामले की मुख्य बातें
कथित निवेश योजना में 35 हजार से अधिक निवेशकों के प्रभावित होने का आरोप है। जांच एजेंसी के अनुसार, हर महीने तीन प्रतिशत लाभ और नए निवेशक जोड़ने पर अतिरिक्त कमीशन का वादा किया गया था।
नए निवेशकों की रकम से पुराने निवेशकों को भुगतान का आरोप
जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि नए निवेशकों से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा पहले निवेश करने वाले लोगों को भुगतान करने में इस्तेमाल किया जाता था। इससे योजना लंबे समय तक चलती रही और लोगों का भरोसा बना रहा। हालांकि, बाकी रकम का कथित तौर पर निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया। एजेंसी का अनुमान है कि निवेशकों की मूल जमा राशि में से लगभग 2,125.60 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया गया। इस मामले में धन के उपयोग और उसके अलग-अलग खातों तक पहुंचने के तरीकों की जांच की जा रही है।
शेयर बाजार और संपत्तियों में रकम लगाने का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, निवेशकों से जुटाई गई रकम का कुछ हिस्सा शेयर बाजार में जोखिम भरे कारोबार, जमीन-जायदाद और फिल्म निर्माण में लगाया गया था। शेयर बाजार में किए गए कारोबार से कथित तौर पर 185.95 करोड़ रुपये का शुद्ध नुकसान हुआ। जांच एजेंसी ने यह भी पता लगाया कि करीब 25 करोड़ रुपये दो सहकारी ऋण संस्थाओं में जमा कराए गए थे। इनमें श्रीमाता को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड और धनश्री मल्टीपर्पज को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड शामिल हैं। आरोप है कि इन संस्थाओं में जमा रकम के आधार पर सावधि जमा तैयार की गई और बाद में उन्हें गिरवी रखकर सहयोगियों के नाम पर कर्ज लिया गया। इस कर्ज का इस्तेमाल जमीन खरीदने में किए जाने का संदेह है।
जांच में सामने आई वित्तीय गतिविधियां
एजेंसी के आरोपों के अनुसार, रकम का इस्तेमाल शेयर बाजार, जमीन-जायदाद और फिल्म निर्माण में किया गया। शेयर बाजार में कथित तौर पर 185.95 करोड़ रुपये का शुद्ध नुकसान हुआ, जबकि कुछ रकम सहकारी संस्थाओं में जमा कराई गई थी।
परिवार के खातों और कारोबारी संस्थाओं की जांच
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि योजना से प्राप्त धन को आरोपी की पत्नी संगीता और नाबालिग बेटे सिद्धांत के बैंक खातों में भी भेजा गया। इसके अलावा, संबंधित कारोबार में भी रकम लगाए जाने की बात सामने आई है। जांच में शिवम सेवा (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड का नाम सामने आया, जिसे कथित तौर पर 19 करोड़ रुपये मिले थे। शिवम लाइफलाइन प्राइवेट लिमिटेड और शिवम फूड्स का नाम भी आरोपी से जुड़ी कारोबारी संस्थाओं के रूप में दर्ज किया गया है। एजेंसी का यह भी आरोप है कि लोगों से जमा के रूप में जुटाए गए पांच करोड़ रुपये कन्नड़ फिल्म चैंपियन के निर्माण में लगाए गए।
आठ ठिकानों पर तलाशी और रकम रोकने की कार्रवाई
अगस्त 2026 में जांच एजेंसी ने बेलगावी, चिक्कोडी और निप्पानी में आरोपियों तथा उनसे जुड़े लोगों के आठ ठिकानों पर तलाशी ली थी। इस दौरान वित्तीय दस्तावेज, हाथ से लिखे हिसाब-किताब के रिकॉर्ड, मोबाइल फोन और लेनदेन से जुड़ा डिजिटल विवरण बरामद किया गया। इन दस्तावेजों के आधार पर कथित रूप से जुटाई गई रकम के लेनदेन का पता लगाने में मदद मिली। आगे की जांच में आरोपियों, उनके रिश्तेदारों और कई कारोबारी संस्थाओं के बीच वित्तीय संबंधों की भी पड़ताल की गई। इसके बाद प्रमुख सहयोगियों के बैंक खातों और सावधि जमाओं में मौजूद लगभग 2.02 करोड़ रुपये की रकम को रोक दिया गया।
पुलिस प्राथमिकी से शुरू हुई जांच
यह जांच बेलगावी के मालामारुति पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी से शुरू हुई थी। इसमें भारतीय न्याय संहिता, 2023, अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून, 2019 और कर्नाटक के वित्तीय संस्थानों में जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा से जुड़े कानून, 2004 के प्रावधान शामिल हैं। फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया जारी है। आरोपियों के खिलाफ दर्ज आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है।
निवेश और जमा योजनाओं से जुड़े नियमों की जानकारी के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. कर्नाटक में कथित निवेश धोखाधड़ी का मामला कितना बड़ा है?
प्रवर्तन निदेशालय के आरोपों के अनुसार, इस योजना में करीब 2,459.49 करोड़ रुपये जुटाए गए थे और 35 हजार से अधिक निवेशकों के प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, मामले से जुड़े आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है।
2. निवेशकों को कितना लाभ देने का वादा किया गया था?
जांच एजेंसी के मुताबिक, निवेशकों को हर महीने तीन प्रतिशत निश्चित लाभ देने का वादा किया गया था। इसके अलावा, नए निवेशकों को जोड़ने पर 0.5 प्रतिशत अतिरिक्त कमीशन देने का भी कथित तौर पर लालच दिया गया था।
3. निवेशकों की कितनी रकम का भुगतान नहीं हुआ?
प्रवर्तन निदेशालय का अनुमान है कि निवेशकों की मूल जमा राशि में से लगभग 2,125.60 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया गया। यह जांच एजेंसी का दावा है और मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
4. जांच के दौरान किन जगहों पर तलाशी ली गई?
अगस्त 2026 में बेलगावी, चिक्कोडी और निप्पानी में आरोपियों तथा उनसे जुड़े लोगों के आठ ठिकानों पर तलाशी ली गई थी। एजेंसी के अनुसार, वहां से वित्तीय दस्तावेज, हाथ से लिखे रिकॉर्ड, मोबाइल फोन और डिजिटल लेनदेन का विवरण मिला।
5. क्या आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित हो चुके हैं?
नहीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत में शिकायत दर्ज कराई है और मामले की न्यायिक प्रक्रिया जारी है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित किया जाना अभी बाकी है।
निष्कर्ष
कर्नाटक का यह मामला कथित निवेश धोखाधड़ी और हजारों निवेशकों की रकम से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय वित्तीय लेनदेन, कारोबारी संस्थाओं और संपत्तियों की जांच कर रहा है। मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही और उपलब्ध सबूतों के आधार पर सामने आएगा।
अस्वीकरण
यह समाचार जांच एजेंसी के कथित आरोपों पर आधारित है। आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है। इसे निवेश संबंधी सलाह न मानें।
