बैंक खाते में न्यूनतम औसत बैलेंस बनाए रखने के नियम अलग-अलग बैंकों में अलग हो सकते हैं। नई जानकारी के अनुसार निजी और सरकारी बैंकों के बीच इस शुल्क को लेकर बड़ा अंतर देखने को मिला है।
न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने पर निजी बैंकों ने वसूला बड़ा जुर्माना
वित्त वर्ष 2025-26 में निजी बैंकों ने ग्राहकों से न्यूनतम औसत बैलेंस नहीं रखने पर करीब ₹4,948.71 करोड़ का जुर्माना वसूला। यह राशि सरकारी बैंकों की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इसी अवधि में देश के 12 सरकारी बैंकों ने इस मद में कुल ₹2,137.92 करोड़ जुटाए। यह जानकारी संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सरकार की ओर से साझा की गई।
🏦 निजी बैंकों की जुर्माना वसूली
- कुल वसूली: ₹4,948.71 करोड़
- HDFC Bank: ₹1,798.14 करोड़
- Axis Bank: ₹1,081.33 करोड़
- ICICI Bank: ₹353.50 करोड़
- कोटक महिंद्रा बैंक: ₹290.65 करोड़
- यस, इंडसइंड और आईडीबीआई बैंक: ₹195.05 करोड़, ₹177.92 करोड़ और ₹175.15 करोड़
निजी बैंकों में सबसे अधिक राशि HDFC Bank ने वसूली, जिसने न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने वाले ग्राहकों से ₹1,798.14 करोड़ का जुर्माना लिया। इसके बाद Axis Bank ने ₹1,081.33 करोड़, ICICI Bank ने ₹353.50 करोड़, कोटक महिंद्रा बैंक ने ₹290.65 करोड़, यस बैंक ने ₹195.05 करोड़, इंडसइंड बैंक ने ₹177.92 करोड़ और आईडीबीआई बैंक ने ₹175.15 करोड़ की वसूली की। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार निजी बैंकों से जुड़े आंकड़े वर्ष 2022-23 से उपलब्ध हैं और वर्ष 2025-26 के आंकड़े अभी अस्थायी हैं।
सरकारी बैंकों की बात करें तो SBI ने सबसे अधिक ₹477.27 करोड़ जुटाए। हालांकि यह राशि केवल current account से संबंधित है, क्योंकि मार्च 2020 से बैंक ने बचत खातों में न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने पर जुर्माना समाप्त कर दिया था। इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा ने ₹394.10 करोड़, इंडियन बैंक ने ₹299.17 करोड़, केनरा बैंक ने ₹213.48 करोड़ और पंजाब नेशनल बैंक ने ₹206.68 करोड़ की वसूली की।
सरकारी बैंकों और जन धन खातों को राहत
सरकार ने बताया कि अधिकांश सरकारी बैंक अब ग्राहकों के हित में बचत खातों पर न्यूनतम बैलेंस से जुड़े जुर्माने को खत्म कर चुके हैं। 12 सरकारी बैंकों में से 10 ने इस तरह के शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिए हैं, जबकि बाकी दो बैंकों ने अपनी policy और व्यावसायिक जरूरतों के अनुसार इन शुल्कों को कम या संशोधित किया है। इसका उद्देश्य ग्राहकों को बेहतर बैंकिंग सेवाएं देना और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि Jan Dhan योजना सहित सभी बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट खातों में न्यूनतम बैलेंस रखना अनिवार्य नहीं है। ऐसे लगभग 73 करोड़ खातों पर किसी भी तरह का जुर्माना नहीं लगाया जाता। इससे कम आय वाले और पहली बार बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े लोगों को राहत मिलती है।
📌 ग्राहकों के लिए जरूरी जानकारी
- सरकारी बैंक: 12 में से 10 ने बचत खातों पर जुर्माना समाप्त किया
- जन धन खाते: न्यूनतम बैलेंस की कोई अनिवार्यता नहीं
- लाभार्थी: लगभग 73 करोड़ खाते
- RBI नियम: बोर्ड से मंजूर नीति के आधार पर शुल्क
- ग्राहकों को सूचना: SMS या अन्य माध्यम से पहले जानकारी देना जरूरी
- उद्देश्य: पारदर्शिता और अनावश्यक जुर्माने से बचाव
RBI के नियम और ग्राहकों के अधिकार
रिजर्व बैंक के मौजूदा नियमों के अनुसार बैंक अपनी board से मंजूर नीति के आधार पर न्यूनतम औसत बैलेंस नहीं रखने पर शुल्क लगा सकते हैं। हालांकि यह शुल्क उचित, पारदर्शी और बैंकिंग सेवा की वास्तविक लागत के अनुरूप होना चाहिए। साथ ही बैंकों को ग्राहकों को SMS या अन्य माध्यमों से पहले सूचना देना जरूरी है, ताकि उन्हें आवश्यक बैलेंस बनाए रखने का मौका मिल सके और अनावश्यक जुर्माने से बचाया जा सके।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सार्वजनिक सरकारी आंकड़ों पर आधारित है। बैंकिंग नियम समय-समय पर बदल सकते हैं, इसलिए आधिकारिक जानकारी अवश्य जांचें।