माइनिंग सेक्टर को मिलेगा बड़ा बूस्ट, लॉजिस्टिक्स सुधार पर जोर

भारत के खनन और धातु उद्योग को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लॉजिस्टिक्स, परिवहन और आधुनिक तकनीक पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी और डिजिटल समाधान इस क्षेत्र की लागत कम करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

भारत के खनन और धातु (माइनिंग एंड मेटल्स) क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लॉजिस्टिक्स और परिवहन व्यवस्था में बड़े सुधार की जरूरत है। यह बात नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी. के. सारस्वत ने FICCI द्वारा आयोजित Enhancing Competitiveness of Mining and Metals सम्मेलन में कही। उन्होंने कहा कि भारत में लॉजिस्टिक्स लागत को अक्सर जीडीपी का 14% बताया जाता है, जबकि वास्तविक लागत लगभग 8% के करीब हो सकती है। इसके बावजूद परिवहन से जुड़ी कई चुनौतियां उद्योग की दक्षता को प्रभावित कर रही हैं।

खनन और धातु क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स सुधार पर जोर

डॉ. सारस्वत ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या दूरदराज के खनन क्षेत्रों तक बेहतर कनेक्टिविटी का अभाव और भारी मात्रा में खनिजों के परिवहन के लिए सड़कों पर अत्यधिक निर्भरता है। उन्होंने बताया कि रेल परिवहन की तुलना में सड़क मार्ग से माल ढुलाई काफी महंगी पड़ती है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ जाती है।

उन्होंने इस स्थिति को सुधारने के लिए 10 प्रमुख सुझाव दिए। इनमें खनिजों के लिए समर्पित फ्रेट कॉरिडोर, खदानों तक बेहतर रेल संपर्क, क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स पार्क, कन्वेयर सिस्टम और स्लरी पाइपलाइन का अधिक उपयोग, बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, कर सुधार और पूरी सप्लाई चेन का डिजिटलाइजेशन शामिल हैं।

🚆 लॉजिस्टिक्स सुधार के प्रमुख सुझाव

  • फ्रेट कॉरिडोर: खनिज परिवहन के लिए समर्पित रेल मार्ग
  • रेल कनेक्टिविटी: खदानों तक बेहतर संपर्क
  • लॉजिस्टिक्स पार्क: क्षेत्रीय परिवहन सुविधाओं का विस्तार
  • स्लरी पाइपलाइन: कम लागत में खनिज परिवहन
  • डिजिटल सप्लाई चेन: दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाना

AI और आधुनिक तकनीक से बढ़ेगी दक्षता

डॉ. सारस्वत ने यह भी कहा कि आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल माइनिंग क्षेत्र की कार्यक्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने स्वचालित हॉल ट्रक, ड्राइवरलेस ट्रेन, AI आधारित डिस्पैच सिस्टम, ड्रोन सर्वे, रोबोटिक्स, डिजिटल ट्विन तकनीक और 5G आधारित सैटेलाइट फ्लीट मॉनिटरिंग जैसी तकनीकों को भविष्य के लिए जरूरी बताया। उनके अनुसार, लॉजिस्टिक्स को केवल परिवहन नहीं बल्कि खनन और धातु उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का रणनीतिक आधार माना जाना चाहिए।

सम्मेलन में रेलवे बोर्ड के अतिरिक्त सदस्य (ट्रैफिक) देवेंद्र कुमार ने कहा कि भारतीय रेलवे कंटेनर सेवाओं, पार्सल ट्रेनों और लंबी मालगाड़ियों के जरिए एंड-टू-एंड लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने पर काम कर रहा है। उनका कहना था कि सरकार और उद्योग को मिलकर ऐसी नीतियां बनानी चाहिए, जिनसे आर्थिक विकास के साथ लोगों के जीवन स्तर में भी सुधार हो।

🤖 माइनिंग सेक्टर में भविष्य की तकनीक

  • AI सिस्टम: स्मार्ट डिस्पैच और संचालन
  • ड्रोन सर्वे: तेज और सटीक निगरानी
  • रोबोटिक्स: सुरक्षित और आधुनिक खनन
  • डिजिटल ट्विन: बेहतर योजना और विश्लेषण
  • 5G मॉनिटरिंग: रियल-टाइम फ्लीट प्रबंधन

रिपोर्ट में क्या कहा गया?

इस दौरान जारी FICCI-Deloitte की संयुक्त रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में माल ढुलाई की दरें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हैं, लेकिन मल्टीमॉडल परिवहन नेटवर्क की कमी और सड़क परिवहन पर अधिक निर्भरता खनन एवं धातु उद्योग की दक्षता को प्रभावित कर रही है। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी बेहतर लॉजिस्टिक्स, खदानों तक मजबूत कनेक्टिविटी और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था को भारत के दीर्घकालिक औद्योगिक विकास और विकसित भारत के लक्ष्य के लिए आवश्यक बताया।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। आधिकारिक नीतियों और रिपोर्टों में समय-समय पर बदलाव संभव है।

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I’m Gourav Kumar Singh, a graduate by education and a blogger by passion. Since starting my blogging journey in 2020, I have worked in digital marketing and content creation. Read more about me.

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