“नौतपा” के दौरान देशभर में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। कहीं भीषण गर्मी पड़ रही है तो कहीं भारी बारिश और आंधी-तूफान का दौर जारी है। IMD ने कई राज्यों के लिए हीटवेव, भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है।
“नौतपा” के दौरान देश का मौसम पूरी तरह से बदल गया है। जहाँ राजस्थान, दिल्ली, विदर्भ और उत्तर प्रदेश में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है, वहीं केरल, असम, मेघालय और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश हो रही है।
नौतपा के दौरान बदला मौसम का मिजाज
IMD (भारतीय मौसम विज्ञान विभाग) की रिपोर्ट के अनुसार, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रहे पश्चिमी विक्षोभ और बारिश ने मौसम को बेहद अप्रत्याशित बना दिया है। 28-29 मई के बाद, उत्तर भारत में आंधी-तूफान, बारिश और तापमान में गिरावट देखने को मिल सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह ग्लोबल वार्मिंग और बदलते जलवायु रुझानों का एक प्रमुख प्रमाण है।
इस समय, देश अपने सबसे अनोखे और खतरनाक मौसमी दौर में से एक से गुज़र रहा है। इस बार बारिश, तेज़ हवाओं और बिजली कड़कने से देश के कई हिस्सों का मौसम पूरी तरह बदल गया है; जबकि आमतौर पर मई के अंत में, विशेष रूप से “नौतपा” के दौरान, भीषण गर्मी पड़ती है और ऐसा लगता है जैसे आसमान से आग बरस रही हो।
🌡️ देशभर में हीटवेव और बारिश अलर्ट
- अधिकतम तापमान: 47°C तक दर्ज
- प्रभावित राज्य: दिल्ली, राजस्थान, यूपी, विदर्भ
- भारी बारिश: केरल, असम, मेघालय, दक्षिण भारत
- IMD चेतावनी: आंधी, ओलावृष्टि और तेज हवाओं का अलर्ट
- हवाओं की रफ्तार: 50-80 किमी/घंटा तक
- मुख्य वजह: पश्चिमी विक्षोभ और मॉनसून गतिविधियां
मॉनसून की तेज़ गतिविधियों से बदला मौसम
अगले दो से तीन दिनों के भीतर, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर का एक बड़ा हिस्सा दक्षिण-पश्चिम मॉनसून से प्रभावित होने की संभावना है, जो तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। केरल, तमिलनाडु, असम, मेघालय और सिक्किम जैसे राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश हुई है।
दूसरी ओर, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, विदर्भ और उत्तर प्रदेश में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, तीन अलग-अलग घटनाएँ—लू (हीटवेव), मॉनसून-पूर्व बारिश और पश्चिमी विक्षोभ—इस समय एक साथ देश को प्रभावित कर रही हैं, जिससे मौसम के मिजाज में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
कई इलाकों में एक अजीब स्थिति बनी हुई है, जहाँ दिन में भीषण गर्मी पड़ती है, वहीं रात में आंधी-तूफान और बारिश होती है। इस बीच, उत्तर भारत, विशेष रूप से दिल्ली-NCR क्षेत्र, अभी भी एक बेहद गंभीर स्थिति का सामना कर रहा है। देश की राजधानी दिल्ली में अधिकतम तापमान बढ़कर 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है, लेकिन रात का तापमान अभी भी 30 से 32 डिग्री के बीच बना हुआ है।
उत्तर भारत में हीटवेव और आंधी-तूफान का खतरा
मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भीषण लू (हीटवेव) की चेतावनी जारी की गई है। हालाँकि, इस समय धूल भरी आँधियाँ, बिजली कड़कने के साथ तूफ़ान और हल्की बारिश होने की संभावना है। IMD का अनुमान है कि 28 और 29 मई को उत्तरी भारत के कई इलाकों में 50 से 70 किमी/घंटा की रफ़्तार से तेज़ हवाएँ चल सकती हैं, और कुछ जगहों पर ओले भी पड़ सकते हैं।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, “नौतपा” से जुड़ा सामान्य मौसम का मिज़ाज इस साल कुछ अलग दिख रहा है। इसकी वजह पश्चिमी विक्षोभ, अरब सागर से आने वाली नमी और बंगाल की खाड़ी में बन रहा एक मौसम तंत्र है। इसी वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम तेज़ी से और एक साथ बदलता हुआ दिख रहा है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 25 मई 2026 तक दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की उत्तरी सीमा 7°N/60°E से बढ़कर 17°N/95°E तक पहुँच जाएगी। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो से तीन दिनों में मॉनसून दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर, कोमोरिन क्षेत्र, बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के और भी हिस्सों में फैल जाएगा।
🌧️ मॉनसून और मौसम बदलाव की बड़ी बातें
- मॉनसून गतिविधि: सामान्य से तेज़
- प्रमुख क्षेत्र: अरब सागर, बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर
- भारी बारिश: केरल, तमिलनाडु, पूर्वोत्तर भारत
- संभावित खतरे: जलभराव, भूस्खलन, ओलावृष्टि
- विशेष चेतावनी: किसानों और मछुआरों को सतर्क रहने की सलाह
- मौसम कारण: पश्चिमी विक्षोभ और समुद्री नमी
दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर में भारी बारिश
मई के आखिरी हफ़्ते में आमतौर पर मॉनसून इतनी तेज़ी से सक्रिय नहीं होता, लेकिन इस बार समुद्री नमी और मॉनसून से पहले की तेज़ गतिविधियों की वजह से इसकी रफ़्तार काफ़ी बढ़ गई है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नमी की वजह से मॉनसून तंत्र को और भी ज़्यादा ताक़त मिली है। यही वजह है कि दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के इलाकों में लगातार बारिश का दौर जारी है।
दक्षिण भारत में इस समय मौसम की सबसे ज़्यादा हलचल देखने को मिल रही है। केरल और माहे में 11 से 20 सेंटीमीटर तक की भारी से बहुत भारी बारिश की खबरें आई हैं। तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भी लगातार बारिश, बिजली कड़कने और तेज़ हवाओं का दौर जारी है।
मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार, तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से तेज़ हवाएँ चल सकती हैं। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और यातायात में रुकावट की आशंका है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मई के आखिरी हफ़्ते में ही मॉनसून जैसे हालात बनने से यह संकेत मिलता है कि इस साल दक्षिण भारत में बारिश सामान्य से पहले आ सकती है और इसका असर भी ज़्यादा हो सकता है।
दिल्ली, राजस्थान और विदर्भ में भीषण गर्मी
दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में अभी भी भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। मौसम विभाग ने इन राज्यों के लिए 25 मई से 28 मई के बीच ‘लू’ (हीटवेव) का अलर्ट जारी किया है, और कुछ इलाकों में इसे बढ़ाकर ‘भीषण लू’ की चेतावनी में बदल दिया है।
दिल्ली में अधिकतम तापमान अभी भी लगभग 45 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है, लेकिन राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य इलाकों में यह काफ़ी ज़्यादा बढ़ गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर भारत की ज़मीन अभी भी काफ़ी गर्म है, इसलिए कभी-कभार हल्की बारिश होने पर भी गर्मी कम होती नहीं दिख रही है। मौसम विभाग ने आम लोगों को चेतावनी दी है कि वे दोपहर के समय घर के अंदर ही रहें और शरीर में पानी की कमी न होने देने के लिए खूब पानी पिएँ। ‘हीटस्ट्रोक’ (लू लगने) के बढ़ते मामलों ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता भी बढ़ा दी है।
महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र इस समय देश का सबसे गर्म इलाका बना हुआ है। ब्रह्मपुरी में देश का सबसे ज़्यादा तापमान 47.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के कई इलाकों में भी तापमान 45 डिग्री से ऊपर रहा है।
विदर्भ और पूर्वी मध्य प्रदेश के लिए मौसम विभाग ने भीषण लू की चेतावनी जारी की है। कई जगहों पर रात का तापमान भी सामान्य से काफ़ी ज़्यादा बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, ज़मीन की गर्मी और सूखी हवाओं के मेल से हालात और भी ज़्यादा बिगड़ते जा रहे हैं।
हालाँकि, 29 मई के बाद इन इलाकों में तापमान में दो से चार डिग्री की गिरावट आने की उम्मीद है। दिल्ली-NCR के लोग अब भीषण गर्मी और उमस से जूझ रहे हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि 28 मई से मौसम के मिजाज में बदलाव आना शुरू हो जाएगा। इस दौरान धूल भरी आंधी, गरज-चमक के साथ बारिश और हल्की फुहारें पड़ने की संभावना है। 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवाएँ चल सकती हैं। कुछ जगहों पर ओले भी पड़ सकते हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, 29 मई के बाद तापमान में चार से छह डिग्री की गिरावट आने की संभावना है। लेकिन उससे पहले, दिल्ली में भीषण गर्मी का दौर जारी रहने का अनुमान है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी विक्षोभ और अरब सागर से आने वाली नमी के मिले-जुले असर के कारण राजधानी का मौसम तेज़ी से बदल सकता है।
पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा—इन सभी राज्यों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। विशेष रूप से, 25 मई से 27 मई के बीच असम और मेघालय में बहुत भारी बारिश का अनुमान है।
लगातार हो रही बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका बढ़ गई है। मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और नदियों तथा नालों से दूर रहें। विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में नमी का भारी जमाव और एक सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण (cyclonic circulation) के कारण पूर्वोत्तर भारत में लंबे समय तक मौसम खराब रह सकता है।
पूर्वी भारत के कई राज्यों में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में तेज हवाओं, गरज-चमक के साथ बारिश और आंधी-तूफान की संभावना है। मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, इन राज्यों में हवाओं की गति 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
कई स्थानों पर बिजली गिरने और पेड़ उखड़ने की आशंका को लेकर भी चेतावनी जारी की गई है। ओडिशा और बंगाल में तेज हवाओं का प्रभाव अधिक हो सकता है, जबकि बिहार और झारखंड में भारी बारिश का अनुमान है। विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से लगातार आ रही नमी के कारण पूर्वी भारत में मॉनसून-पूर्व गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।
पश्चिमी विक्षोभ और ओलावृष्टि का खतरा
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तरी भारत का मौसम एक सक्रिय ‘पश्चिमी विक्षोभ’ (Western Disturbance) से प्रभावित हो रहा है, जो इस समय जम्मू-कश्मीर और उसके आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय है। 28 मई से एक और नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिमी भारत को प्रभावित कर सकता है। इसका असर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान पर पड़ सकता है, जिससे धूल भरी आंधी, बारिश और तेज हवाओं की घटनाओं में वृद्धि हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह विशिष्ट मौसम प्रणाली इस वर्ष के “नौतपा” काल के दौरान असाधारण परिस्थितियां उत्पन्न कर रही है। यही कारण है कि दिन के समय भीषण गर्मी पड़ रही है, जबकि रात में धूल भरी आंधी और हल्की बारिश हो रही है। इसी मौसम प्रणाली के प्रभाव से आने वाले दिनों में तापमान में भारी गिरावट आने का भी अनुमान है।
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि होने का अनुमान है। इसके अतिरिक्त, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में भी ओलावृष्टि हो सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इन परिस्थितियों का कारण ऊपरी वायुमंडल में मौजूद भारी मात्रा में नमी और वायुमंडलीय अस्थिरता है।
इन ओलावृष्टि से किसानों और बागवानी उद्योग को सबसे ज़्यादा खतरा है। कुछ इलाकों में, फलों के बागों और खड़ी फसलों को नुकसान पहुँचने का जोखिम हो सकता है। मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे समय से पहले ही तैयारी कर लें और मौसम से जुड़े अपडेट्स पर लगातार नज़र रखें।
गर्म रातें और स्वास्थ्य पर असर
इस बार लोग न केवल दिन की गर्मी से, बल्कि रात की गर्मी से भी परेशान हैं। दिल्ली, मध्य प्रदेश, विदर्भ, तेलंगाना और ओडिशा—इन सभी जगहों पर न्यूनतम तापमान औसत से काफी ज़्यादा रहा है। कई जगहों पर रात का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर जा रहा है।
गर्म शामें हीटस्ट्रोक का खतरा बढ़ा देती हैं, क्योंकि वे शरीर को कोई राहत नहीं देतीं। अस्पतालों में गर्मी से जुड़ी बीमारियों और डिहाइड्रेशन के मरीज़ों की संख्या बढ़ने लगी है। डॉक्टरों ने युवाओं, बुज़ुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए ज़्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी है।
तमिलनाडु, कोंकण-गोवा और सौराष्ट्र-कच्छ के कई इलाकों में मौसम विभाग ने गर्म और उमस भरे मौसम की चेतावनी जारी की है। समुद्र से आने वाली नमी और ज़्यादा तापमान की वजह से लोग चिपचिपी और असहज गर्मी का सामना कर रहे हैं।
जानकारों के मुताबिक, उमस भरे मौसम में शरीर के लिए अपने अंदरूनी तापमान को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। इससे थकान, बेचैनी और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं तेज़ी से बढ़ सकती हैं। मौसम विभाग ने लोगों को ज़्यादा से ज़्यादा पानी पीने और हल्के कपड़े पहनने की सलाह दी है।
तेज़ हवाओं और परिवहन पर असर की आशंका
मौसम विभाग ने कई राज्यों के लिए 50 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से तेज़ हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है। ऐसी स्थिति में, पेड़ गिरने, बिजली के खंभे टूटने और संचार सेवाओं में रुकावट आने की आशंका बढ़ जाती है। अनुमान है कि तेज़ हवाओं और धूल भरी आंधियों का असर उत्तरी और पूर्वी भारत में ज़्यादा देखने को मिलेगा।
मौसम विभाग ने लोगों को पेड़ों के नीचे या खुले मैदानों में खड़े न होने की सलाह दी है। जानकारों के मुताबिक, हवा के ये तेज़ झोंके हवाई, रेल और सड़क परिवहन सेवाओं को भी प्रभावित कर सकते हैं।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी मौसम का मिज़ाज तेज़ी से बदल रहा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 29 मई से 31 मई के बीच भारी बारिश हो सकती है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाओं और सक्रिय नमी के कारण इस क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां भी बढ़ने का अनुमान है। जानकारों के मुताबिक, अंडमान क्षेत्र में मानसून की बढ़ती सक्रियता इस बात का संकेत है कि मानसून अब तेज़ी से भारतीय मुख्य भूमि की ओर बढ़ रहा है। मछुआरों को समुद्र में जाते समय सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
ग्लोबल वार्मिंग और बदलते मौसम के संकेत
जानकारों का कहना है कि इस साल मानसून से पहले की गतिविधियां काफ़ी तेज़ हैं, जिसकी मुख्य वजह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में लगातार बढ़ती नमी का स्तर है। समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज़्यादा होने के कारण वातावरण में नमी काफ़ी बढ़ गई है।
इसी नमी के कारण तेज़ हवाएं, बिजली कड़कना और बारिश जैसी घटनाएं हो रही हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव के कारण भारत में मौसम के पारंपरिक मिज़ाज में तेज़ी से बदलाव आ रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रही मॉनसून से पहले की बारिश को लेकर किसान राहत और चिंता, दोनों महसूस कर रहे हैं। जिन इलाकों में लंबे समय से सूखा और भीषण गर्मी पड़ रही थी, वहाँ बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ेगी, जिससे खरीफ की फसलों की तैयारी करना आसान हो जाएगा। इसका नतीजा यह हो सकता है कि सिंचाई का खर्च कम हो जाए।
हालाँकि, खड़ी फसलों को ओलावृष्टि, भारी बारिश और तेज़ हवाओं से नुकसान पहुँचने की संभावना है। कई जगहों पर जलभराव का खतरा भी बढ़ गया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि मानसून संतुलित तरीके से आगे बढ़ता है, तो कृषि को लाभ होगा।
हालाँकि “नौतपा” के दौरान देखी गई बारिश की मात्रा, तेज़ हवाएँ और तूफ़ान निस्संदेह बदलते जलवायु रुझानों के संकेत हैं, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस दौरान होने वाली बारिश कोई पूरी तरह से नई घटना नहीं है।
“नौतपा” को पहले लगातार धूप और भीषण गर्मी से जोड़ा जाता था, लेकिन अब बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आने वाली अधिक बारिश के कारण मौसम बदल रहा है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्र का तापमान बढ़ रहा है, और ठीक इसी वजह से मौसम अप्रत्याशित होता जा रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आने वाले वर्षों में ऐसी विनाशकारी मौसमी घटनाएँ और भी अधिक बार हो सकती हैं।
बारिश से राहत और किसानों की चिंता
लगातार बारिश के कारण, दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के कई शहरों में तापमान में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। केरल, बेंगलुरु, चेन्नई, गुवाहाटी, शिलांग और पूर्वोत्तर के अन्य शहरों में अधिकतम तापमान 45 डिग्री से काफी नीचे गिर गया है।
बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई इलाकों के निवासियों को भी बारिश और तेज़ हवाओं से राहत मिली है। इसके बावजूद, विदर्भ, राजस्थान, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे इलाकों में अभी भी भीषण गर्मी पड़ रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 29 मई से उत्तरी भारत में भी तापमान में तेज़ी से गिरावट आएगी।
मानसून की गतिविधियों की जल्दी शुरुआत से किसान राहत और चिंता, दोनों महसूस कर रहे हैं। जिन इलाकों में लंबे समय से सूखा और भीषण गर्मी पड़ रही थी, वहाँ बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ेगी, जिससे खरीफ फसलों की तैयारी करना आसान हो जाएगा। इससे सिंचाई की लागत भी कम हो सकती है।
दूसरी ओर, ओलावृष्टि, तेज़ हवाएँ और भारी बारिश फसलों को नुकसान भी पहुँचा सकती हैं। लगातार बारिश के कारण खेतों में जलभराव की संभावना भी बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, संतुलित मानसून से कृषि को लाभ होगा; लेकिन, यदि भारी बारिश और गंभीर मौसमी घटनाएँ और बिगड़ती हैं, तो किसानों को अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
Disclaimer: यह लेख मौसम रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के अनुमानों पर आधारित है। स्थानीय प्रशासन और IMD की आधिकारिक सलाह का पालन करें।