NEET Paper Leak: 55% वाला छात्र बना मेडिकल टॉपर, CBI जांच में खुला बीवाल परिवार का बड़ा राज

NEET पेपर लीक मामले के संबंध में, राजस्थान के बीवाल family के बारे में एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है। एक छात्र, जिसने 12वीं कक्षा में केवल 55% अंक प्राप्त किए थे, उसने NEET में 86% अंक हासिल कर लिए, लेकिन उसके बाद मेडिकल कॉलेज में उसे 30% अंक लाने में भी संघर्ष करना पड़ा। CBI की जाँच शुरू होने के बाद इस परिवार के कई छात्र गायब हो गए हैं।

बीवाल परिवार पर CBI की बड़ी कार्रवाई

जैसे-जैसे NEET-UG परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक मामले की परतें खुल रही हैं, बेहद चिंताजनक और दिलचस्प खुलासे सामने आ रहे हैं। CBI अब राजस्थान के सवाई माधोपुर के एक परिवार पर नज़र रख रही है, जिसके पाँच बच्चों ने इस बेहद कठिन परीक्षा में “असाधारण” अंक प्राप्त किए हैं। दिनेश बीवाल, मांगीलाल बीवाल और विकास बीवाल इस परिवार के तीन सदस्य हैं—जिसे “बीवाल परिवार” भी कहा जाता है—जिन्हें CBI ने पहले ही हिरासत में ले लिया है。

जाँच ​​के अनुसार, इस परिवार के बच्चे—जो अपने सामान्य स्कूल और कॉलेज की परीक्षाओं में मुश्किल से ही पास हो पाते थे—वे ऐसे अंक प्राप्त करने में सफल रहे, जो आमतौर पर NEET जैसी कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षा में शीर्ष स्थान पाने वाले students को मिलते हैं। CBI के सबूतों से पता चलता है कि यह उपलब्धि कड़ी मेहनत का नहीं, बल्कि पेपर लीक और एक “सॉल्वर गैंग” से जुड़ी एक सुनियोजित साज़िश का नतीजा थी। दिनेश और मांगीलाल बीवाल पर न केवल अपने परिवार के बच्चों को भारी रकम के बदले चोरी किए गए परीक्षा प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने का, बल्कि एक पूरे सिंडिकेट को चलाने का भी आरोप है।

🚨 NEET पेपर लीक केस

  • मुख्य एजेंसी: CBI
  • मुख्य आरोपी: दिनेश बीवाल, मांगीलाल बीवाल
  • आरोप: पेपर लीक और सॉल्वर गैंग संचालन
  • राज्य: राजस्थान
  • मामला: NEET-UG पेपर लीक
  • जाँच: बैंक खातों और पुराने रिकॉर्ड की जांच

छात्रों के गायब होने से बढ़ी चिंता

बीवाल परिवार के खुलासों के बाद, *हिंदुस्तान* में छपी एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जैसे ही जाँच की आंच उनके बच्चों तक पहुँची, परिवार के कई सदस्य और छात्र अचानक अपने-अलग-अलग मेडिकल संस्थानों और छात्रावासों से गायब हो गए। इस घटना के कारण परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

CBI की हिरासत में मौजूद परिवार के सदस्यों में से, विकास बीवाल नाम के एक युवक का शैक्षणिक रिकॉर्ड सबसे अधिक चौंकाने वाला है। 12वीं कक्षा में केवल 55% अंक प्राप्त करने वाले विकास का शैक्षणिक रिकॉर्ड औसत दर्जे का था। लेकिन जब NEET के परिणाम घोषित हुए, तो उसने अप्रत्याशित रूप से 86% अंक प्राप्त करके सभी को चौंका दिया, जिससे उसे सवाई माधोपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल गया।

मेडिकल कॉलेज में खुली पोल

विकास के मेडिकल संस्थान में पढ़ाई शुरू करने के बाद ही, उसके NEET के असाधारण अंकों के पीछे की सच्चाई सामने आई। कॉलेज एडमिनिस्ट्रेटर के मुताबिक, विकास को संस्थान के इंटरनल एग्ज़ाम में औसतन सिर्फ़ 30 प्रतिशत नंबर मिले, जिससे उसकी पढ़ाई में कमज़ोरी साफ़ ज़ाहिर होती है। विकास जनवरी से ही बिना किसी सूचना के मेडिकल कॉलेज से ग़ायब है; उसे डर है कि कहीं उसकी पोल न खुल जाए और उसके चाचा को जेल न हो जाए।

📚 विकास बीवाल का रिकॉर्ड

  • 12वीं के अंक: 55%
  • NEET स्कोर: 86%
  • कॉलेज: सरकारी मेडिकल कॉलेज, सवाई माधोपुर
  • इंटरनल एग्जाम: लगभग 30% अंक
  • स्थिति: जनवरी से लापता
  • CBI शक: पेपर लीक का लाभ

इस साज़िश में विकास के अलावा और भी कई लोग शामिल थे। दिनेश बिवाल की भतीजी, पलक का NEET परसेंटाइल 98.61 था, जो कि बहुत ही शानदार था। जयपुर के मशहूर SMS मेडिकल कॉलेज में उसे दाखिला भी मिल गया था। स्कूल के दिनों में हमेशा एक होशियार छात्रा रही पलक, मेडिकल कॉलेज के एग्ज़ाम में एक आम छात्रा जैसी ही थी। जैसे ही CBI ने उसके परिवार पर शिकंजा कसना शुरू किया, पलक भी अचानक अपना हॉस्टल छोड़कर भाग गई।

इसी तरह, मंगिलाल की बेटी प्रगति—जिसे NEET में 89% नंबर मिले थे—अपने पिता की गिरफ़्तारी के दिन से ही कॉलेज से छुट्टी पर है।

ग्रेस मार्क्स वाले छात्रों पर भी शक

इस परिवार की धोखेबाज़ी यहीं नहीं रुकी। परिवार के दो और सदस्य—ऋषि और अमन—जिन्होंने इस साल NEET का एग्ज़ाम दिया था, उनका पढ़ाई-लिखाई का रिकॉर्ड तो और भी ज़्यादा खराब है। इनमें से, ऋषि को तो 12वीं क्लास के एग्ज़ाम पास करने के लिए काफ़ी हद तक ‘ग्रेस मार्क्स’ (अतिरिक्त अंकों) का सहारा लेना पड़ा था, और उसे सिर्फ़ 50% नंबर ही मिले थे। CBI का मानना ​​है कि ये दोनों भी एग्ज़ाम पास करने के लिए उन्हीं लीक हुए प्रश्न-पत्रों और ‘शॉर्टकट’ तरीकों का इस्तेमाल कर रहे थे।

CBI की मौजूदा जाँच से यह बात अब और भी ज़्यादा साफ़ होती जा रही है कि दिनेश और मंगिलाल बिवाल सिर्फ़ अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की कोशिश ही नहीं कर रहे थे, बल्कि वे इस ‘पेपर-लीक’ नेटवर्क में अहम बिचौलिए की भूमिका भी निभा रहे थे। एग्ज़ाम से पहले, वे पढ़ाई में औसत या कमज़ोर छात्रों के माता-पिता से संपर्क करते थे और लाखों रुपये के बदले उन्हें प्रश्न-पत्र और ‘सॉल्यूशन गैंग’ के कोड मुहैया कराते थे।

पुराने रिकॉर्ड और बैंक खातों की जांच

यह पता लगाने के लिए कि यह रैकेट कितने समय से चल रहा है, जाँच एजेंसियाँ अब इस परिवार के पुराने दस्तावेज़ों और बैंक खातों की बारीकी से जाँच कर रही हैं।

Disclaimer: यह रिपोर्ट विभिन्न मीडिया स्रोतों और चल रही जाँच के आधार पर तैयार की गई है। मामले में अंतिम फैसला अदालत और जाँच एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही माना जाएगा।

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I’m Gourav Kumar Singh, a graduate by education and a blogger by passion. Since starting my blogging journey in 2020, I have worked in digital marketing and content creation. Read more about me.

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