ब्रिटेन की पूर्व गृह मंत्री प्रीति पटेल ने दावा किया है कि भारत ने ब्रिटेन में अवैध रूप से रह रहे भारतीय नागरिकों को वापस लेने से इनकार किया था। उनका कहना है कि इसका एक कारण भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी का प्रत्यर्पण मामला है, जो अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।
प्रीति पटेल ने नीरव मोदी मामले पर क्या कहा
प्रीति पटेल ने यह बात नीरव मोदी पर आधारित एक पॉडकास्ट में कही। यह पॉडकास्ट “Diamond King” नाम से तैयार किया गया है, जिसमें नीरव मोदी से जुड़े मामले और उसकी ब्रिटेन में मौजूदगी पर चर्चा की गई है। प्रीति पटेल वर्ष 2019 से 2022 तक ब्रिटेन की गृह मंत्री रही थीं और उन्होंने 2021 में नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी।
उन्होंने कहा कि नीरव मोदी का अब तक ब्रिटेन में रहना काफी निराशाजनक है। उनके अनुसार, भारत सरकार इस बात से काफी नाराज थी कि ब्रिटेन ने अभी तक नीरव मोदी को भारत नहीं भेजा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी वजह से भारत ने ब्रिटेन में अवैध रूप से रह रहे कुछ लोगों को वापस लेने के मामले में सहयोग करने से पीछे कदम खींचे।
नीरव मोदी प्रत्यर्पण मामले की मुख्य बातें
- आरोप: पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े कथित घोटाले का मामला
- राशि: करीब 2 अरब डॉलर का कथित घोटाला
- स्थिति: ब्रिटेन में कानूनी प्रक्रिया जारी रही
- जेल: लंदन की पेंटनविल जेल में बंद
- मामला: प्रत्यर्पण और कानूनी अपील
- चर्चा: भारत और ब्रिटेन के बीच सहयोग
अवैध प्रवासियों को लेकर दावा
प्रीति पटेल ने कहा कि भारत से अवैध प्रवासियों और असफल शरणार्थियों को वापस लेने की प्रक्रिया में उन्हें काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। उनका मानना है कि नीरव मोदी जैसे बड़े मामलों में कार्रवाई में देरी होने से दोनों देशों के बीच सहयोग प्रभावित हुआ।
नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े करीब 2 अरब डॉलर के कथित घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी है। वह लंबे समय से लंदन की पेंटनविल जेल में बंद है। इसके अलावा उस पर जांच से जुड़े सबूतों और गवाहों को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए गए हैं।
प्रत्यर्पण प्रक्रिया में देरी के कारण
- कानूनी चुनौती: नीरव मोदी ने कई अपील कीं
- मानवाधिकार: अदालत में कई आधार उठाए गए
- शरण मामला: राजनीतिक शरण से जुड़ी दलील
- अदालत: ब्रिटेन की न्यायिक प्रक्रिया
- देरी: कई कानूनी चरणों के कारण प्रक्रिया लंबी हुई
- नजर: भारत भेजे जाने की संभावना पर
नीरव मोदी की कानूनी लड़ाई
नीरव मोदी के प्रत्यर्पण मामले में ब्रिटेन की अदालतों में कई कानूनी चुनौतियां सामने आईं। उसने मानवाधिकारों और अन्य आधारों पर कई अपील कीं। इसके साथ ही उसने राजनीतिक शरण से जुड़ा मामला भी उठाया था, जिसके कारण प्रक्रिया में देरी हुई।
हालांकि, नीरव मोदी अपनी सभी कानूनी कोशिशों में सफल नहीं हो पाया। मार्च 2026 में इंग्लैंड की हाई कोर्ट ने उसके प्रत्यर्पण मामले को दोबारा खोलने की याचिका भी खारिज कर दी थी। इसके बाद उसके भारत भेजे जाने की संभावना और मजबूत मानी जा रही है।
भारत-ब्रिटेन संबंधों पर असर
प्रीति पटेल ने कहा कि नीरव मोदी को भारत में कानूनी प्रक्रिया का सामना करना चाहिए और वहीं सजा पूरी करनी चाहिए। उन्होंने ब्रिटेन की प्रत्यर्पण व्यवस्था में हो रही देरी पर सवाल उठाते हुए इसे सिस्टम की कमजोरी बताया।
यह मामला भारत और ब्रिटेन के बीच कानूनी सहयोग और प्रत्यर्पण प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर चर्चा में आ गया है। दोनों देशों के बीच अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और अवैध प्रवास से जुड़े मुद्दों पर सहयोग को महत्वपूर्ण माना जाता है।
अस्वीकरण: यह जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों और सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। मामले की अंतिम स्थिति आधिकारिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।