Nithin Kamath ने बताया Stock Market का सबसे बड़ा जोखिम

शेयर बाजार में बढ़ते निवेश के साथ उधार लेकर निवेश करने की प्रवृत्ति भी तेजी से बढ़ी है। ऐसे में Zerodha के सह-संस्थापक नितिन कामथ ने Margin Trading Facility यानी MTF से जुड़े संभावित जोखिमों को लेकर निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

MTF को लेकर नितिन कामथ ने जताई सबसे बड़ी चिंता

शेयर बाजार में बढ़ते निवेश के बीच Zerodha के सह-संस्थापक नितिन कामथ ने एक ऐसे जोखिम की ओर ध्यान दिलाया है, जिसे वह अपने कारोबार के लिए सबसे बड़ी चिंता मानते हैं। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में MTF का उपयोग बहुत तेजी से बढ़ा है। यदि भविष्य में भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आती है, तो यह व्यवस्था कई निवेशकों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है और मजबूरी में बड़े पैमाने पर शेयर बेचने की स्थिति पैदा हो सकती है।

MTF से जुड़े प्रमुख तथ्य

  • मुख्य चिंता: बाजार गिरने पर मजबूरी में शेयर बिक सकते हैं
  • पोर्टफोलियो: करीब 9,000 करोड़ रुपये
  • जोखिम: कम तरलता वाले शेयरों में अधिक दबाव
  • फोकस: उधार लेकर निवेश करने का बढ़ता चलन
  • प्रभाव: तेज गिरावट में नुकसान बढ़ सकता है
  • सलाह: जोखिम समझकर ही MTF का उपयोग करें

नितिन कामथ ने कहा कि उनके ब्रोकरेज कारोबार की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी और तब से अब तक जितने भी जोखिम सामने आए, उनमें मौजूदा समय का यह जोखिम सबसे बड़ा है। उनका कहना है कि चिंता केवल कारोबार के आकार की नहीं है, बल्कि इस बात की भी है कि बड़ी राशि ऐसे शेयरों में लगी हुई है जिनमें तेज गिरावट के समय खरीद-बिक्री करना आसान नहीं होता।

उन्होंने बताया कि कंपनी के पास इस व्यवस्था के तहत करीब 9,000 करोड़ रुपये का पोर्टफोलियो है। इसमें लगभग आधा हिस्सा ऐसे शेयरों में निवेश किया गया है जो वायदा और विकल्प कारोबार का हिस्सा नहीं हैं। यदि बाजार में अचानक भारी गिरावट आती है और इन शेयरों में लगातार निचली सीमा लगने लगे, तो निवेशकों और ब्रोकरेज कंपनियों के लिए समय पर बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है।

बाजार में गिरावट आने पर कैसे बढ़ सकता है जोखिम

कामथ ने दक्षिण कोरिया के बाजार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां तेजी के दौरान निवेशकों ने उधार लेकर बड़े पैमाने पर निवेश किया। जब शेयरों की कीमत बढ़ती है तो उनके बदले अधिक पैसा उधार मिल जाता है और लोग उसी धन से फिर निवेश करने लगते हैं। इससे बाजार में तेजी और बढ़ती है, लेकिन यही स्थिति गिरावट के समय सबसे बड़ा खतरा बन जाती है।

उन्होंने समझाया कि जब बाजार नीचे आने लगता है, तो निवेशकों की गिरवी रखी गई संपत्ति का मूल्य भी कम हो जाता है। इसके बाद अतिरिक्त राशि जमा करने की मांग की जाती है। यदि निवेशक ऐसा नहीं कर पाते, तो उनके शेयर बेचे जाने लगते हैं। इससे बाजार में बिकवाली और तेज हो जाती है। अगर इस दौरान ETF जैसे निवेश साधनों में भी दबाव बढ़ जाए, तो गिरावट और अधिक गहरी हो सकती है।

निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बातें

  • ETF: दबाव बढ़ने पर गिरावट तेज हो सकती है
  • COVID-19: उस समय MTF का दायरा छोटा था
  • SEBI: उधार आधारित निवेश के लिए सख्त नियम
  • जोखिम: छोटे और मझोले शेयर अधिक प्रभावित हो सकते हैं
  • सावधानी: क्षमता के अनुसार ही निवेश करें
  • उद्देश्य: जोखिम और लाभ दोनों को समझकर निवेश करें

SEBI के नियमों से जोखिम पर नियंत्रण

कामथ का कहना है कि भारत में इस व्यवस्था का विस्तार पिछले तीन से चार वर्षों में तेजी से हुआ है। इससे पहले COVID-19 महामारी के दौरान बाजार में भारी उतार-चढ़ाव जरूर देखने को मिला था, लेकिन उस समय इस तरह का उधार आधारित निवेश अभी इतना बड़ा नहीं था। इसलिए मौजूदा स्थिति का वास्तविक असर किसी बड़े बाजार संकट के दौरान ही पूरी तरह सामने आ सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि कुल बाजार मूल्य के मुकाबले इस तरह का निवेश अभी बहुत बड़ा नहीं दिखता, लेकिन यदि अचानक तेज गिरावट आती है तो इसका असर खास तौर पर छोटे और मझोले शेयरों पर अधिक पड़ सकता है। आज कई ब्रोकरेज कंपनियां बड़ी संख्या में शेयरों पर यह सुविधा दे रही हैं, इसलिए दबाव एक साथ कई कंपनियों के शेयरों में दिखाई दे सकता है।

हालांकि उन्होंने यह भी माना कि भारत में बाजार नियामक SEBI ने उधार आधारित निवेश को लेकर पहले से ही सख्त नियम बनाए हैं। उनके अनुसार यही वजह है कि भारतीय बाजार में जोखिम कई दूसरे देशों की तुलना में अभी नियंत्रित है। फिर भी निवेशकों को यह समझना चाहिए कि उधार लेकर निवेश करने पर लाभ के साथ-साथ नुकसान भी कई गुना बढ़ सकता है।

कामथ का मानना है कि निवेश करते समय केवल तेजी को देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। बाजार हमेशा एक दिशा में नहीं चलता और गिरावट के समय सबसे ज्यादा नुकसान उन लोगों को होता है जिन्होंने जरूरत से ज्यादा उधार लेकर निवेश किया होता है। इसलिए निवेशकों को अपनी क्षमता के अनुसार ही निवेश करना चाहिए और जोखिम को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य लें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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