No UPI Day: 2 अक्टूबर को UPI बंद होने की खबर पर CAIT का जवाब

2 अक्टूबर को देशभर में ‘नो UPI डे’ मनाए जाने की खबरों को कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यानी CAIT ने गलत बताया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि उसने इस तरह का कोई ऐलान नहीं किया है। CAIT का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था देश की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है और संगठन इसका समर्थन करता है। हालांकि, कुछ स्थानीय या क्षेत्रीय व्यापारी संगठन अपने स्तर पर विरोध कर सकते हैं।

CAIT ने ‘नो UPI डे’ की खबरों को बताया गलत

इससे पहले ऐसी खबरें सामने आई थीं कि 2 अक्टूबर को देशभर के व्यापारी और दुकानदार UPI से भुगतान लेना बंद कर सकते हैं। इन खबरों में कहा गया था कि व्यापारी 15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए MDR शुल्क के विरोध में अपनी दुकानों पर लगे QR कोड, स्कैनर, साउंड बॉक्स और अन्य डिजिटल भुगतान उपकरणों को काले कपड़े से ढककर विरोध करेंगे।

CAIT ने कहा है कि उसके नाम से ‘नो UPI डे’ से जुड़ी जो खबरें चल रही हैं, वे सही नहीं हैं। संगठन ने यह भी बताया कि UPI शुल्क के मुद्दे पर कुछ क्षेत्रीय व्यापारिक संगठन अपने स्तर पर प्रदर्शन कर सकते हैं, लेकिन उनके फैसले को CAIT का आधिकारिक रुख नहीं माना जाना चाहिए। संगठन ने मीडिया और आम लोगों से भी अपील की है कि ऐसी जानकारी पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक स्रोत से इसकी पुष्टि करें।

2 अक्टूबर को UPI बंद रहने की बात का क्या सच है?

CAIT ने देशभर में ‘नो UPI डे’ मनाने या UPI भुगतान बंद करने का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। कुछ स्थानीय या क्षेत्रीय व्यापारी संगठन अपने स्तर पर विरोध कर सकते हैं, लेकिन इसे CAIT का राष्ट्रीय फैसला नहीं माना जाना चाहिए।

UPI MDR शुल्क को लेकर क्यों है विरोध?

इस विवाद की शुरुआत UPI से जुड़े नए MDR शुल्क को लेकर हुई है। कुछ व्यापारिक संगठनों का कहना है कि कम मार्जिन पर काम करने वाले दुकानदारों और वितरकों के लिए डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त खर्च बढ़ने से कारोबार की लागत बढ़ सकती है। उनका तर्क है कि UPI ने नकद भुगतान पर निर्भरता कम करने और लेनदेन को आसान बनाने में मदद की है, इसलिए व्यापारियों पर अतिरिक्त शुल्क का असर नहीं पड़ना चाहिए।

व्यापारी संगठनों की ओर से यह भी कहा गया है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बजाय उस पर अतिरिक्त लागत लगाने से छोटे कारोबारियों पर दबाव बढ़ सकता है। कुछ संगठनों ने यह संकेत दिया है कि अगर शुल्क से जुड़ा फैसला वापस नहीं लिया गया तो विरोध आगे भी जारी रह सकता है। हालांकि, इन मांगों और विरोध के बीच CAIT ने खुद को 2 अक्टूबर के प्रस्तावित ‘नो UPI डे’ से अलग बताया है।

बड़े और छोटे व्यापारियों के लिए शुल्क व्यवस्था

नए नियमों के अनुसार, कुछ बड़े व्यापारियों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर 0.40 प्रतिशत MDR शुल्क लागू होने की बात कही गई है। इसके साथ GST का भी प्रावधान बताया गया है। वहीं जिन छोटे व्यापारियों की मासिक UPI प्राप्ति 1 लाख रुपये तक है, उन्हें इस शुल्क से राहत मिलने की जानकारी दी गई है। इसका मतलब यह है कि हर व्यापारी पर एक समान तरीके से शुल्क लागू नहीं होगा।

छोटे व्यापारियों के लिए शुल्क की स्थिति

बताई गई व्यवस्था के अनुसार, जिन छोटे व्यापारियों की मासिक UPI प्राप्ति 1 लाख रुपये तक है, उन्हें MDR शुल्क से राहत मिल सकती है। हालांकि, लगातार तीन महीने तक इस सीमा से अधिक प्राप्ति होने पर व्यापारी की श्रेणी और लागू शुल्क व्यवस्था बदल सकती है।

तीन महीने की UPI प्राप्ति सीमा का क्या मतलब है?

अगर कोई छोटा व्यापारी लगातार तीन महीने तक UPI के जरिए 1 लाख रुपये से ज्यादा की मासिक राशि प्राप्त करता है, तो उसे बड़ी श्रेणी में रखा जा सकता है। इसके बाद उस पर लागू शुल्क व्यवस्था बदल सकती है। वहीं बड़े व्यापारियों के लिए 2,000 रुपये तक के व्यक्तिगत भुगतान पर शुल्क नहीं होने की बात कही गई है।

MDR शुल्क की अधिकतम सीमा कितनी है?

नए ढांचे में शुल्क की अधिकतम सीमा भी बताई गई है। 75,000 रुपये या उससे अधिक के किसी लेनदेन पर व्यापारी से अधिकतम 300 रुपये और उस पर लागू GST लिया जा सकता है। 2,000 रुपये की सीमा हर अलग भुगतान के आधार पर देखी जाएगी, पूरे दिन की कुल बिक्री के आधार पर नहीं।

कुछ विशेष क्षेत्रों में अलग शुल्क व्यवस्था की जानकारी भी दी गई है। पेट्रोल पंप, रेलवे, बिल भुगतान, टेलीकॉम, बीमा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.40 प्रतिशत के बजाय 5 रुपये की तय फीस लागू होने की बात कही गई है।

MDR क्या है और यह किससे लिया जाता है?

MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है जो व्यापारी को डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने वाले बैंक या भुगतान सेवा से जुड़ी कंपनियों को देना पड़ता है। यह शुल्क भुगतान व्यवस्था, तकनीकी ढांचे और लेनदेन से जुड़ी सेवाओं की लागत को पूरा करने के लिए लिया जाता है। सामान्य तौर पर यह व्यापारी से लिया जाने वाला शुल्क होता है, ग्राहक से सीधे लिया जाने वाला शुल्क नहीं।

2 अक्टूबर को UPI को लेकर क्या स्थिति है?

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 2 अक्टूबर को देशभर में UPI बंद रहने की बात को CAIT ने आधिकारिक रूप से खारिज किया है। कुछ स्थानीय व्यापारिक संगठन अपने स्तर पर विरोध कर सकते हैं, लेकिन इसे पूरे देश के व्यापारियों या CAIT का सामूहिक फैसला मानना सही नहीं होगा। इसलिए UPI से जुड़े किसी भी बदलाव या विरोध की जानकारी के लिए आधिकारिक घोषणा की पुष्टि करना जरूरी है।

5 FAQs

1. क्या 2 अक्टूबर को पूरे देश में UPI बंद रहेगा?

CAIT ने देशभर में 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने या UPI भुगतान बंद करने की खबरों को गलत बताया है। कुछ स्थानीय या क्षेत्रीय व्यापारिक संगठन अपने स्तर पर विरोध कर सकते हैं, लेकिन इसे CAIT का राष्ट्रीय फैसला नहीं माना जाना चाहिए।

2. CAIT ने ‘नो UPI डे’ पर क्या कहा है?

CAIT ने स्पष्ट किया है कि उसने 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने का कोई ऐलान नहीं किया है। संगठन डिजिटल भुगतान व्यवस्था का समर्थन करता है और UPI को अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी मानता है।

3. MDR शुल्क क्या होता है?

MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट डिजिटल भुगतान की सुविधा देने वाली भुगतान व्यवस्था से जुड़ी लागत का शुल्क है। सामान्य तौर पर यह व्यापारी से लिया जाने वाला शुल्क होता है और ग्राहक से सीधे लिया जाने वाला शुल्क नहीं होता।

4. छोटे व्यापारियों को MDR शुल्क से राहत मिलेगी?

बताई गई व्यवस्था के अनुसार, जिन छोटे व्यापारियों की मासिक UPI प्राप्ति 1 लाख रुपये तक है, उन्हें शुल्क से राहत मिलने की जानकारी दी गई है। लगातार तीन महीने तक इस सीमा से अधिक प्राप्ति होने पर लागू व्यवस्था बदल सकती है।

5. बड़े व्यापारियों के लिए 2,000 रुपये की सीमा कैसे देखी जाएगी?

बताई गई व्यवस्था के अनुसार 2,000 रुपये की सीमा प्रत्येक अलग भुगतान के आधार पर देखी जाएगी, पूरे दिन की कुल बिक्री के आधार पर नहीं। 2,000 रुपये से अधिक के कुछ पात्र भुगतान पर MDR लागू होने की बात कही गई है।

Conclusion

2 अक्टूबर को देशभर में ‘नो UPI डे’ मनाने की खबरों को CAIT ने आधिकारिक रूप से खारिज किया है। हालांकि, UPI से जुड़े MDR शुल्क को लेकर कुछ स्थानीय और क्षेत्रीय व्यापारिक संगठनों की ओर से विरोध की बात सामने आई है। छोटे और बड़े व्यापारियों के लिए शुल्क व्यवस्था अलग हो सकती है। इसलिए UPI बंद रहने या शुल्क से जुड़े किसी भी दावे पर भरोसा करने से पहले संबंधित संगठन और आधिकारिक स्रोत की जानकारी जांचना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। UPI, MDR शुल्क और व्यापारिक भुगतान से जुड़े नियम समय के साथ बदल सकते हैं। किसी भी दावे या भुगतान संबंधी निर्णय से पहले संबंधित आधिकारिक स्रोत से मौजूदा जानकारी की पुष्टि करें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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