Online Festive Sales: दिवाली पर ऑनलाइन खरीदारी की रफ्तार क्यों घटी?

दिवाली से पहले ऑनलाइन खरीदारी में इस साल उम्मीद के मुताबिक तेजी नहीं दिखी। 8 नवंबर 2026 को प्रकाशित फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार दिवाली से पहले ऑनलाइन कारोबार का कुल बिक्री मूल्य सालाना आधार पर लगभग 13 से 15 प्रतिशत बढ़ा। उद्योग से जुड़े लोगों और विश्लेषकों को 20 से 25 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद थी। रिपोर्ट में इसे कम से कम पिछले पांच वर्षों में त्योहारों के दौरान दर्ज हुई सबसे धीमी वृद्धि बताया गया है।

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दिवाली के दौरान ऑनलाइन बिक्री की वृद्धि कितनी रही?

रिपोर्ट के मुताबिक त्योहारों से पहले ऑनलाइन बिक्री का कुल मूल्य 13 से 15 प्रतिशत बढ़ा, जबकि उद्योग की अपेक्षा 20 से 25 प्रतिशत की थी। इस अंतर से संकेत मिलता है कि ग्राहकों ने खरीदारी तो की, लेकिन महंगे सामान पर खर्च पहले जैसी गति से नहीं बढ़ा। यह आंकड़ा कुल कारोबार के मूल्य से जुड़ा है, केवल खरीदे गए सामान की संख्या से नहीं। इसलिए कम वृद्धि का मतलब यह जरूरी नहीं कि हर श्रेणी में ऑर्डर घट गए हों।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इनपुट लागत बढ़ने से कई उत्पादों के दाम ऊपर रहे और दुकानदारों के पास बड़ी छूट देने की गुंजाइश कम हुई। त्योहारों के समय ग्राहक आम तौर पर मोबाइल, लैपटॉप, बड़े घरेलू उपकरण और अन्य महंगी वस्तुओं पर खर्च करते हैं। जब इन उत्पादों की कीमतें ऊंची रहती हैं, तो कुछ ग्राहक खरीदारी टाल सकते हैं या कम कीमत वाले विकल्प चुन सकते हैं।

महंगे सामान की खरीदारी में कमजोरी

रिपोर्ट के अनुसार स्मार्टफोन, लैपटॉप और बड़े घरेलू उपकरणों की बिक्री में अपेक्षित तेजी नहीं आई। ये ऐसे उत्पाद हैं जिनकी कीमत आम तौर पर छोटी रोजमर्रा की खरीदारी से अधिक होती है। इनकी बिक्री की गति धीमी होने पर कुल कारोबार के मूल्य पर बड़ा असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, कम कीमत वाले सामान की बिक्री बढ़ने के बावजूद वह महंगे उत्पादों से होने वाली कमी की पूरी भरपाई नहीं कर पाई।

🛍️ त्योहारों की ऑनलाइन बिक्री के आंकड़े

  • वास्तविक वृद्धि: 13 से 15 प्रतिशत
  • उद्योग की उम्मीद: 20 से 25 प्रतिशत
  • अवधि: दिवाली से पहले की बिक्री
  • रिपोर्ट की तारीख: 8 नवंबर 2026
  • कमजोर श्रेणियां: स्मार्टफोन, लैपटॉप और बड़े उपकरण
  • बेहतर रुझान: सजावट, फैशन, जूते, सौंदर्य उत्पाद और किराना

किन उत्पादों की खरीदारी में ग्राहकों की रुचि रही?

रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्राहक घर की सजावट, फैशन, जूते, सौंदर्य और व्यक्तिगत देखभाल से जुड़े सामान तथा किराना जैसी श्रेणियों में खर्च कर रहे थे। इन उत्पादों की कीमतें कई बड़े इलेक्ट्रॉनिक सामान की तुलना में कम होती हैं। त्योहारों के दौरान घर सजाने, कपड़े खरीदने और रोजमर्रा की जरूरतों का सामान लेने की मांग बनी रह सकती है।

हालांकि इन श्रेणियों में बेहतर गतिविधि के बावजूद कुल बिक्री वृद्धि को अपेक्षित स्तर तक पहुंचाना संभव नहीं हुआ। इसका एक कारण यह है कि बड़े उत्पादों का कुल बिक्री मूल्य अधिक हो सकता है। उदाहरण के लिए, एक महंगे घरेलू उपकरण की खरीद का कुल कारोबार में योगदान कई छोटे उत्पादों की खरीद से अधिक हो सकता है। इसलिए कम कीमत वाली श्रेणियों में ऑर्डर बढ़ने के बावजूद कुल कारोबार की वृद्धि सीमित रह सकती है।

छूट और उत्पाद कीमतों की भूमिका

रिपोर्ट में बढ़ती इनपुट लागत को भी बिक्री की रफ्तार कम होने से जोड़ा गया है। जब निर्माताओं और विक्रेताओं की लागत बढ़ती है, तो वे हर उत्पाद पर बड़ी छूट देने की स्थिति में नहीं होते। इसका असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जो त्योहारों के दौरान बड़ी खरीदारी के लिए विशेष प्रस्तावों की प्रतीक्षा करते हैं। हालांकि सभी कंपनियों और सभी उत्पादों पर लागत का असर एक जैसा नहीं होता।

📌 ऑनलाइन खरीदारी से पहले ध्यान दें

  • अंतिम कीमत: छूट के बाद देय कुल राशि देखें।
  • जरूरत: केवल विज्ञापन देखकर महंगा सामान न खरीदें।
  • तुलना: अलग-अलग विक्रेताओं के दाम और शर्तें जांचें।
  • भुगतान: बैंक प्रस्ताव की पात्रता और सीमा पढ़ें।
  • वापसी: वापसी, बदलने और वारंटी की शर्तें समझें।

ऑनलाइन कारोबार और विक्रेताओं पर क्या असर पड़ सकता है?

त्योहारों के मौसम में ऑनलाइन मंचों, ब्रांडों और विक्रेताओं के लिए बिक्री का प्रदर्शन पूरे वर्ष की योजना का अहम हिस्सा होता है। यदि महंगे उत्पादों की मांग धीमी रहती है, तो विक्रेताओं को भंडार, छूट और विपणन खर्च की योजना पर दोबारा ध्यान देना पड़ सकता है। हालांकि केवल एक त्योहार अवधि के आंकड़ों से पूरे वर्ष की बिक्री या किसी कंपनी के लाभ का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।

ऑनलाइन कारोबार में केवल छूट ही बिक्री बढ़ाने का साधन नहीं है। उत्पाद की गुणवत्ता, समय पर वितरण, ग्राहक सहायता, भुगतान की सुरक्षा और वापसी की आसान प्रक्रिया भी खरीदारी के फैसले को प्रभावित करती है। त्योहारों के दौरान ग्राहक यदि किसी उत्पाद की खरीद टाल रहे हैं, तो बेहतर जानकारी और भरोसेमंद सेवा उन्हें आगे खरीदारी के लिए प्रेरित कर सकती है।

ग्राहकों के खर्च में बदलाव क्या संकेत देता है?

इस रिपोर्ट से यह संकेत मिलता है कि त्योहारों के दौरान ग्राहक खर्च को लेकर अधिक सोच-समझकर फैसला कर रहे हैं। वे रोजमर्रा की जरूरतों और अपेक्षाकृत कम कीमत वाले उत्पादों पर खर्च जारी रख सकते हैं, लेकिन महंगी खरीदारी को टाल सकते हैं। यह व्यवहार हर परिवार पर लागू नहीं होता, फिर भी कुल बिक्री के आंकड़ों में इसका असर दिखाई दे सकता है।

ग्राहकों के लिए जरूरी है कि वे त्योहारों की खरीदारी को अपनी वास्तविक जरूरत और बजट से जोड़कर देखें। केवल सीमित समय की बिक्री या छूट का संदेश देखकर ऐसी वस्तु खरीदना उचित नहीं है जिसकी तत्काल जरूरत नहीं है। यदि महंगे सामान की खरीद जरूरी है, तो अलग-अलग विक्रेताओं की अंतिम कीमत, वारंटी और सेवा की तुलना करनी चाहिए।

रिपोर्ट में बिक्री वृद्धि का आंकड़ा उद्योग से जुड़े विश्लेषकों और अधिकारियों के हवाले से दिया गया है। इसे सरकारी खुदरा बिक्री आंकड़ा नहीं समझना चाहिए। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए फाइनेंशियल एक्सप्रेस की खबर देखी जा सकती है। खरीदारी का मासिक हिसाब रखने के लिए खर्च लिखने वाली डायरी भी उपयोगी हो सकती है। इस संबद्ध लिंक से खरीदारी होने पर वेबसाइट को कमीशन मिल सकता है।

आगे ऑनलाइन बाजार में किन बातों पर नजर रहेगी?

आने वाले महीनों में यह देखना होगा कि महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान की मांग फिर से तेज होती है या ग्राहक कम कीमत वाली श्रेणियों पर अधिक खर्च जारी रखते हैं। विक्रेताओं की ओर से मिलने वाली छूट, उत्पादों की कीमत और परिवारों की खर्च करने की क्षमता भी बाजार की दिशा तय कर सकती है। त्योहारों के बाद सामान्य महीनों में बिक्री की गति से यह समझने में मदद मिलेगी कि धीमापन केवल मौसमी था या ग्राहकों के खर्च में व्यापक बदलाव का संकेत है।

कंपनियों के लिए बिक्री के मूल्य के साथ ऑर्डर की संख्या, औसत खरीद राशि और लौटाए गए सामान का अनुपात देखना भी जरूरी होगा। इन संकेतकों से पता चल सकता है कि ग्राहक कम कीमत वाले सामान की ओर बढ़े हैं या कुल खरीदारी ही सीमित हुई है। अभी उपलब्ध रिपोर्ट से हर श्रेणी की अलग-अलग वृद्धि का पूरा विवरण नहीं मिलता, इसलिए किसी एक निष्कर्ष को सभी ऑनलाइन कारोबार पर लागू नहीं करना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. दिवाली से पहले ऑनलाइन बिक्री कितनी बढ़ी?

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की 8 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार दिवाली से पहले ऑनलाइन बिक्री का कुल मूल्य सालाना आधार पर लगभग 13 से 15 प्रतिशत बढ़ा। यह वृद्धि उद्योग से जुड़े लोगों की 20 से 25 प्रतिशत की उम्मीद से कम रही।

2. ऑनलाइन बिक्री की वृद्धि उम्मीद से कम क्यों रही?

रिपोर्ट में बढ़ती इनपुट लागत, उत्पादों की ऊंची कीमत और सीमित छूट को प्रमुख कारणों में बताया गया है। महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान और बड़े घरेलू उपकरणों की मांग अपेक्षा से कमजोर रही, जिससे कुल बिक्री मूल्य की वृद्धि प्रभावित हुई।

3. किन उत्पाद श्रेणियों में खरीदारी बनी रही?

रिपोर्ट के अनुसार घर की सजावट, फैशन, जूते, सौंदर्य और व्यक्तिगत देखभाल से जुड़े सामान तथा किराना श्रेणियों में ग्राहकों की खरीदारी बनी रही। हालांकि इन श्रेणियों की गतिविधि महंगे सामान की कमजोर बिक्री की पूरी भरपाई नहीं कर पाई।

4. क्या ऑनलाइन खरीदारी में कुल ऑर्डर घट गए?

रिपोर्ट मुख्य रूप से कुल बिक्री मूल्य की वृद्धि बताती है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हर श्रेणी में ऑर्डर घट गए। कम कीमत वाले सामान की खरीदारी बनी रहने के बावजूद महंगे उत्पादों की धीमी मांग ने कुल मूल्य को प्रभावित किया।

5. ग्राहकों को ऑनलाइन त्योहारों की खरीदारी कैसे करनी चाहिए?

ग्राहकों को पहले अपनी जरूरत और बजट तय करना चाहिए। छूट के बाद अंतिम कीमत, बैंक प्रस्ताव की शर्तें, वितरण शुल्क, वारंटी और वापसी की नीति जांचनी चाहिए। केवल सीमित समय के विज्ञापन के कारण गैर-जरूरी महंगी खरीदारी करने से बचना बेहतर है।

निष्कर्ष

दिवाली से पहले ऑनलाइन बिक्री में वृद्धि हुई, लेकिन वह उद्योग की उम्मीद से कम रही। महंगे सामान की कमजोर मांग और सीमित छूट ने कुल कारोबार को प्रभावित किया। आगे ग्राहकों की खर्च क्षमता और कीमतों का रुझान महत्वपूर्ण रहेगा।

अस्वीकरण: यह लेख प्रकाशित उद्योग रिपोर्ट पर आधारित है। बिक्री के आंकड़े अनुमानित हैं और सभी कंपनियों या उत्पाद श्रेणियों पर समान रूप से लागू नहीं होते।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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