Parents Gift Tax: माता-पिता से घर के लिए पैसे, कितना टैक्स?

भारत में घर खरीदना कई लोगों का बड़ा सपना होता है, लेकिन प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों और आमदनी में उस हिसाब से बढ़ोतरी नहीं होने के कारण घर की शुरुआती रकम जुटाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में कई युवा अपने माता-पिता से आर्थिक मदद लेते हैं।

इस रकम का इस्तेमाल घर खरीदते समय शुरुआती भुगतान करने के लिए किया जाता है। हालांकि, माता-पिता से मिलने वाली इस आर्थिक सहायता को लेकर यह समझना जरूरी है कि इस पर कितना टैक्स लग सकता है और आयकर विभाग की ओर से पैसों के स्रोत के बारे में सवाल पूछे जाने पर कौन से दस्तावेज काम आ सकते हैं।

Table of Contents

माता-पिता से घर खरीदने के लिए मिले पैसों पर कितना टैक्स लगता है?

Parents Gift Tax: घर खरीदने के लिए माता-पिता से मिले पैसों पर टैक्स के नियम
Parents Gift Tax: घर के डाउन पेमेंट के लिए माता-पिता से मिली रकम पर टैक्स नियम

 

सस्ते घरों की उपलब्धता में कमी आने से यह परेशानी और बढ़ गई है। पहले की तुलना में अब कम कीमत वाले मकानों की हिस्सेदारी घट गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018 में कुल मकानों की आपूर्ति में 50 लाख रुपये से कम कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी 52.4 प्रतिशत थी। वर्ष 2025 की पहली छमाही में यह घटकर केवल 17 प्रतिशत रह गई। इससे पहली बार घर खरीदने वाले लोगों के लिए पर्याप्त रकम जुटाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

उदाहरण के तौर पर, अगर किसी घर की कीमत 50 लाख रुपये है, तो 20 प्रतिशत शुरुआती भुगतान के हिसाब से करीब 10 लाख रुपये की जरूरत होगी। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन, स्टांप शुल्क और अन्य शुरुआती खर्च भी हो सकते हैं। इन सभी खर्चों को मिलाकर रकम लगभग 12.5 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।

इसी तरह, 75 लाख रुपये की कीमत वाले घर के लिए करीब 18.75 लाख रुपये और एक करोड़ रुपये के घर के लिए लगभग 25 लाख रुपये की व्यवस्था करनी पड़ सकती है। हालांकि, वास्तविक खर्च शहर, मकान के प्रकार और अन्य शुल्कों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

घर खरीदने वालों के लिए जरूरी बात

घर की शुरुआती रकम जुटाते समय केवल डाउन पेमेंट ही नहीं, बल्कि स्टांप शुल्क, रजिस्ट्रेशन और अन्य खर्चों का भी बजट बनाएं। माता-पिता से मिलने वाली रकम का बैंक रिकॉर्ड सुरक्षित रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर लेन-देन का प्रमाण दिया जा सके।

माता-पिता से मिले उपहार पर टैक्स के नियम

माता-पिता से मिलने वाली आर्थिक मदद को लेकर अच्छी बात यह है कि आयकर कानून के तहत माता-पिता से मिले पैसों को उपहार माना जाता है और यह प्राप्त करने वाले के हाथों में सामान्यतः टैक्स से मुक्त होता है। इसके लिए रकम की कोई निश्चित अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं है। यानी माता-पिता अपने बेटे या बेटी को घर खरीदने के लिए बड़ी रकम भी दे सकते हैं और केवल उपहार मिलने के कारण उस पर आयकर नहीं लगता। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पैसे के स्रोत से जुड़े सवाल कभी नहीं पूछे जा सकते।

दूसरी ओर, गैर-रिश्तेदारों से मिलने वाले पैसों के मामले में नियम अलग हैं। अगर एक वित्त वर्ष में ऐसे लोगों से मिले उपहारों की कुल कीमत 50,000 रुपये से अधिक हो जाती है, तो सामान्यतः पूरी रकम कर योग्य हो सकती है, केवल 50,000 रुपये से ऊपर की राशि नहीं। कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट भी मिलती है, जैसे व्यक्ति की अपनी शादी के अवसर पर प्राप्त उपहार। इसलिए पैसे लेने से पहले यह समझना जरूरी है कि उपहार देने वाला व्यक्ति किस श्रेणी में आता है और उस पर कौन से नियम लागू होते हैं।

उपहार और टैक्स से जुड़ा नियम

माता-पिता से प्राप्त उपहार सामान्यतः प्राप्तकर्ता के लिए कर-मुक्त होता है। वहीं, गैर-रिश्तेदारों से मिले उपहारों पर अलग नियम लागू हो सकते हैं। रकम का स्रोत, उपहार देने वाले से संबंध और लागू कर प्रावधानों को समझना जरूरी है।

आयकर विभाग पैसों के स्रोत के बारे में कब पूछ सकता है?

माता-पिता से बड़ी रकम मिलने पर भी आयकर विभाग पैसों के स्रोत के बारे में जानकारी मांग सकता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति घर खरीदने के लिए अपने बच्चे को 30 लाख रुपये देता है, तो यह रकम कहां से आई, इस बारे में सवाल उठ सकते हैं।

यदि माता-पिता अपनी आमदनी या बचत के स्रोत को स्पष्ट नहीं कर पाते हैं, तो विभाग लेन-देन से संबंधित जानकारी और दस्तावेज मांग सकता है। इसलिए केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि पैसा माता-पिता ने दिया है। जरूरत पड़ने पर यह भी दिखाना पड़ सकता है कि उनके पास इतनी रकम कहां से आई।

आयकर नियमों के तहत 30 लाख रुपये या उससे अधिक कीमत की अचल संपत्ति खरीदने से जुड़े लेन-देन की जानकारी संबंधित रजिस्ट्रार या उप-पंजीयक द्वारा वित्तीय लेन-देन विवरण के माध्यम से आयकर विभाग को दी जाती है। इसका उद्देश्य बड़े वित्तीय लेन-देन पर नजर रखना, कर चोरी को रोकना और पैसों के गलत इस्तेमाल पर नियंत्रण रखना है। ऐसे में घर खरीदने वाले व्यक्ति के लिए पैसों के लेन-देन का स्पष्ट रिकॉर्ड रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।

आयकर से जुड़े आधिकारिक नियमों और जानकारी के लिए आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।

माता-पिता से मिली रकम के लिए कौन से दस्तावेज रखें?

माता-पिता से मिली रकम का सही रिकॉर्ड रखने के लिए सबसे पहले बैंक स्टेटमेंट सुरक्षित रखना चाहिए। इसमें माता-पिता के खाते से बच्चे के खाते में पैसे भेजे जाने की जानकारी दिखाई देनी चाहिए। जहां तक संभव हो, रकम का हस्तांतरण बैंक के माध्यम से करना बेहतर होता है, ताकि लेन-देन का प्रमाण उपलब्ध रहे। इसके साथ ही माता-पिता और बच्चे के बीच संबंध साबित करने वाले दस्तावेज, जैसे जन्म प्रमाणपत्र या अन्य संबंधित रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखे जा सकते हैं।

पैसों के स्रोत को साबित करने के लिए माता-पिता की वेतन पर्ची, बैंक स्टेटमेंट, निवेश भुनाने से मिले पैसों का रिकॉर्ड या अन्य आय संबंधी दस्तावेज भी उपयोगी हो सकते हैं। इसके अलावा घर खरीदने का समझौता, होम लोन से जुड़े कागजात और शुरुआती भुगतान की रसीदें भी संभालकर रखनी चाहिए। इन दस्तावेजों से यह स्पष्ट करने में मदद मिलती है कि रकम किसने दी, कहां से आई और उसका इस्तेमाल किस काम के लिए किया गया।

घर खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

इस तरह, माता-पिता से घर खरीदने के लिए आर्थिक मदद लेना सामान्यतः कर के लिहाज से सुविधाजनक हो सकता है, लेकिन लेन-देन में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। यदि रकम बड़ी है या पैसों के स्रोत को लेकर कोई संदेह है, तो किसी योग्य कर सलाहकार से परामर्श लेना बेहतर रहेगा। सही दस्तावेज रखने और लागू नियमों का पालन करने से भविष्य में आयकर विभाग की ओर से सवाल पूछे जाने पर अपनी स्थिति स्पष्ट करना आसान हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. क्या माता-पिता से घर खरीदने के लिए मिले पैसों पर टैक्स लगता है?

आमतौर पर माता-पिता से उपहार के रूप में मिली रकम प्राप्तकर्ता के हाथों में आयकर से मुक्त होती है। इसके लिए उपहार की कोई सामान्य अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं है। हालांकि, पैसों का स्रोत और लेन-देन का रिकॉर्ड जरूरत पड़ने पर दिखाना पड़ सकता है।

2. क्या माता-पिता 30 लाख रुपये घर खरीदने के लिए दे सकते हैं?

हां, माता-पिता अपने बेटे या बेटी को घर खरीदने के लिए 30 लाख रुपये या इससे अधिक रकम दे सकते हैं। केवल उपहार मिलने के कारण आमतौर पर प्राप्तकर्ता पर टैक्स नहीं लगता। फिर भी माता-पिता के पास रकम का वैध स्रोत होना और उसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है।

3. क्या माता-पिता से मिले पैसों के बारे में आयकर विभाग सवाल पूछ सकता है?

हां, बड़ी रकम के लेन-देन या अन्य परिस्थितियों में आयकर विभाग पैसों के स्रोत और इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी मांग सकता है। बैंक स्टेटमेंट, आय के दस्तावेज और उपहार से संबंधित रिकॉर्ड यह स्पष्ट करने में मदद कर सकते हैं कि रकम कहां से आई थी।

4. माता-पिता से मिले पैसों का कौन सा प्रमाण रखना चाहिए?

बैंक स्टेटमेंट, पैसे भेजने का रिकॉर्ड, माता-पिता की आय या बचत के दस्तावेज और संबंध साबित करने वाले रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। घर खरीदने का समझौता, होम लोन के कागजात और शुरुआती भुगतान की रसीदें भी उपयोगी हो सकती हैं।

5. क्या गैर-रिश्तेदार से मिले उपहार पर टैक्स लग सकता है?

हां, सामान्य नियमों के अनुसार एक वित्त वर्ष में गैर-रिश्तेदारों से मिले उपहारों का कुल मूल्य 50,000 रुपये से अधिक होने पर पूरी रकम कर योग्य हो सकती है। हालांकि, कानून में कुछ अपवाद हैं। किसी विशेष स्थिति में कर सलाहकार से सलाह लेना बेहतर है।

FAQ Schema

डिस्क्लेमर

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। टैक्स संबंधी निर्णय लेने से पहले मौजूदा आयकर नियमों की जांच करें और योग्य कर सलाहकार से परामर्श लें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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